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Home बिहार अररिया अग्नि सुरक्षा मानकों पर जिला प्रशासन सख्त, 48 घंटे में होगा होटलों-अस्पतालों का महा-ऑडिट

अग्नि सुरक्षा मानकों पर जिला प्रशासन सख्त, 48 घंटे में होगा होटलों-अस्पतालों का महा-ऑडिट

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अग्नि सुरक्षा मानकों पर जिला प्रशासन सख्त, 48 घंटे में होगा होटलों-अस्पतालों का महा-ऑडिट
स्वास्थ्य संस्थानों की जांच करती पुलिस
अररिया से पंकज कुमार की रिपोर्ट

Fire Safety Audit: देश के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में अस्पतालों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में हुए भीषण अग्निकांडों से सबक लेते हुए अररिया जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है. जिलाधिकारी के निर्देशानुसार जिले के तमाम होटलों, लॉज, गेस्ट हाउसों, निजी अस्पतालों, क्लिनिकों और भीड़-भाड़ वाले अन्य सार्वजनिक संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों (Fire Safety Norms) का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए एक सघन विशेष अभियान की घोषणा की गई है. प्रशासन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जिन संस्थानों का अब तक फायर ऑडिट नहीं हुआ है, उनका अगले 48 घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से निरीक्षण संपन्न कराया जाएगा.

लापरवाही पर सीलिंग की क्रोनोलॉजी: जानें सुधार के लिए कितना मिलेगा समय?

  • नया ऑडिट (48 घंटे में): जिन संस्थानों का अब तक एक बार भी ऑडिट नहीं हुआ है, उनका अगले दो दिनों में सघन निरीक्षण कर कमियों की सूची थमाई जाएगी.
  • पहला अल्टीमेटम (7 दिन): ऑडिट के दौरान मिली तकनीकी कमियों को दूर करने के लिए संचालकों को पहली बार में 7 दिनों (एक सप्ताह) का समय दिया जाएगा.
  • अंतिम मोहलत (15 दिन): यदि एक सप्ताह में सुधार नहीं होता है, तो कड़ी चेतावनी के साथ अंतिम रूप से 15 दिनों की अतिरिक्त अवधि प्रदान की जाएगी.
  • सीलिंग और दंडात्मक कार्रवाई: इस अंतिम डेडलाइन के बीत जाने के बाद भी यदि मानकों को पूरा नहीं किया गया, तो संबंधित होटल या अस्पताल को बिना कोई नया नोटिस दिए सीधे सील (Lockdown) कर दिया जाएगा और संचालक पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा.

फायर सेफ्टी का कड़ा पैमाना; इन 7 मुख्य बिंदुओं पर टिकी है जांच टीम की नजर

असाइनमेंट पर रहेगी स्पेशल टीम: जिला प्रशासन द्वारा गठित विशेष संयुक्त टीम और फायर ब्रिगेड के अधिकारी जब संस्थानों का औचक निरीक्षण करेंगे, तो मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीकी बिंदुओं की कड़ाई से जांच की जाएगी:

  1. फायर सर्टिफिकेट (NOC): संस्थान के पास वैध और अप-टू-डेट ‘फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट’ उपलब्ध है या नहीं.
  2. अग्निशमन यंत्र (Extinguishers): बिल्डिंग के हर फ्लोर पर पर्याप्त संख्या में फायर एक्सटिंग्विशर चालू और रिफिल हालत में मौजूद हैं या नहीं.
  3. इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास): संकट के समय भागने के लिए आपातकालीन निकास द्वार की व्यवस्था और वह पूरी तरह से अवरोधमुक्त (खुला) होना अनिवार्य है.
  4. इलेक्ट्रिक ऑडिट: बिजली के तारों पर अत्यधिक लोड (विद्युत अधिभार), शॉर्ट सर्किट के खतरे और ओपन वायरिंग की स्थिति की जांच.
  5. गैस सिलेंडरों का भंडारण: होटलों की रसोई और पैंट्री में एलपीजी (LPG) सिलेंडरों का सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से भंडारण व उपयोग.
  6. अवैध डंपिंग पर रोक: बेसमेंट, मुख्य सीढ़ियों, गलियारों और रैंप के पास किसी भी प्रकार का असुरक्षित या कबाड़ का अवैध भंडारण नहीं होना चाहिए.
  7. दमकल वाहनों का रास्ता: क्या आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड की बड़ी गाड़ियां आसानी से और सुगमता से संस्थान के मुख्य द्वार तक पहुंच सकती हैं या रास्ता तंग है.

“मानव जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सर्वोपरि”: जिला अग्निशमन पदाधिकारी

अभियान के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए जिला अग्निशमन पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि इस विशेष मुहिम का मकसद किसी भी कारोबारी को परेशान करना बिल्कुल नहीं है, बल्कि मानव जीवन और जनता की गाढ़ी कमाई व संपत्ति को सुरक्षा देना है.

उन्होंने सभी होटल और निजी क्लिनिक संचालकों से अपील की है कि वे जांच के लिए पहुंचने वाली आधिकारिक ऑडिट टीम को पूरा प्रशासनिक सहयोग प्रदान करें और निरीक्षण कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न होने दें. डॉ. कुमार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अभियान के दौरान मिलने वाली दैनिक रिपोर्ट की समीक्षा सीधे जिला स्तर पर की जाएगी. जो भी संस्थान नियमों की अवहेलना करते पाए जाएंगे, उन्हें बंद करने (सीलिंग) और उनका लाइसेंस रद्द करने का कड़ा प्रस्ताव तुरंत राज्य मुख्यालय (पटना) को भेज दिया जाएगा.

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