मुख्य बातें:
अररिया से पंकज कुमार की रिपोर्ट
Araria DM Janta Darbar: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘सात निश्चय-3.0’ के अंतर्गत संचालित ‘सबका सम्मान–जीवन आसान’ कार्यक्रम के तहत अररिया जिला समाहरणालय सभागार में एक भव्य जनता दरबार का आयोजन किया गया. जिला पदाधिकारी (DM) विनोद दूहन की अध्यक्षता में आयोजित इस जनसुनवाई में जिले के विभिन्न सुदूर ग्रामीण व शहरी प्रखंडों से आए सैकड़ों फरियादियों ने अपनी व्यक्तिगत और सार्वजनिक समस्याओं से संबंधित आवेदन जिलाधिकारी के समक्ष रखे. इस दौरान कुल 142 गंभीर मामलों की एक-एक कर विस्तृत सुनवाई की गई. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जनसमस्याओं का त्वरित निवारण ही जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
जनता दरबार में गूंजे ये मुख्य मामले; पीड़ितों ने लगाई न्याय की गुहार
- शिक्षा व रोजगार: मोहम्मद सद्दाम आलम ने ‘शारीरिक शिक्षक सह स्वास्थ्य अनुदेशक’ पद की मेधा सूची और अंतिम मेधा सूची अब तक प्रकाशित नहीं होने का मुद्दा उठाया. वहीं, किशन पासवान व अन्य ग्रामीणों ने अनुकंपा के आधार पर चौकीदार पद पर अविलंब नियुक्ति की मांग से संबंधित आवेदन सौंपा.
- स्कूल आधार ऑपरेटरों की पीड़ा: जितेंद्र कुमार और उनके प्रतिनिधिमंडल ने सरकारी विद्यालयों में कार्यरत डिजिटल आधार ऑपरेटरों के कई महीनों से बकाया वेतन और ईपीएफ (EPF) की राशि खाते में जमा नहीं किए जाने की गंभीर शिकायत दर्ज कराई, जिस पर डीएम ने शिक्षा विभाग को तुरंत रिपोर्ट करने को कहा.
- भूमि विवाद व अवैध कब्जा: मो. इलियास ने दबंगों द्वारा अवैध रूप से मुख्य रास्ता बंद किए जाने का मामला रखा, जबकि फागु राम ने सरकार द्वारा आवंटित बंदोबस्ती की जमीन से भू-माफियाओं द्वारा बेदखल किए जाने की गुहार लगाई.
- वेतन विसंगति व कल्याणकारी योजनाएं: श्यामलाल पासवान और उनके साथियों ने दफादार व चौकीदारों को देय एसीपी (ACP) व एमएसीपी (MACP) का लाभ नहीं मिलने की बात कही. इसके अलावा, शांति देवी ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत अब तक गैस कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराए जाने की शिकायत रखी.
Araria DM Janta Darbar: ऑन-द-स्पॉट निर्देश: हर आवेदन की होगी डिजिटल मॉनिटरिंग
जिलाधिकारी विनोद दूहन ने स्पष्ट किया कि जनता दरबार में प्राप्त होने वाले प्रत्येक आवेदन को लोक शिकायत निवारण प्रणाली के तहत ऑनलाइन पंजीकृत कर उसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी. जिलाधिकारी ने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण, राजस्व, शिक्षा और बिजली विभाग के कनीय अभियंताओं को कड़े निर्देश दिए कि वे केवल कागजी खानापूर्ति न करें, बल्कि धरातल पर जाकर पीड़ितों को समय पर न्याय व राहत दिलाएं. निर्धारित समय-सीमा के बाद लंबित रहने वाले मामलों के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
जनता दरबार समाप्त होने के बाद समाहरणालय परिसर से बाहर निकले कई फरियादियों ने जिलाधिकारी के इस त्वरित एक्शन और संवेदनशील रुख की सराहना की. लोगों को उम्मीद है कि जिला प्रमुख के सीधे हस्तक्षेप के बाद बरसों से फाइलों में दबे उनके मामलों का अब स्थायी समाधान हो सकेगा.
