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जिले में हवा की सेहत हो रही खराब, 169 हुआ एक्यूआइ

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जिले में हवा की सेहत हो रही खराब, 169 हुआ एक्यूआइ

स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलता पैदा कर सकता है प्रदूषित हवाजागरूकता की कमी व लापरवाही से प्रभावित हो रही हवा की गुणवत्ता

प्रतिनिधि, अररिया

जिले में हवा की सेहत खराब होने लगी है. पूरा जिला वायु प्रदूषण की चपेट में आता जा रहा है. रविवार को जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स 169 रिकार्ड किया गया. जो यहां के हवा की खराब सेहत को दर्शाता है. गौरतलब है कि जिले के मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है. जिले भर में जारी धान कटनी व बढ़ती ठंड की वजह से भी वायु प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी हुई है. दरअसल ठंड की दस्तक व तापमान में आयी गिरावट के कारण वायुमंडल में हवा का दबाव कम हो चुका है. इस कारण धूल का अंबार वायुमंडल में रूकना शुरू हो गया है. लिहाजा धूल व धुंध की समस्या गहराने लगी है. जो लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा कर रहा है.

एयर क्वालिटी इंडेक्स से मापी जाती है हवा की गुणवत्ता

प्रसिद्ध पर्यावरणविद सूदन सहाय बताते हैं कि हवा की क्वालिटी के स्तर को मापने के लिए एयर क्वालिटी इंडेक्स यानि एक्यूआइ का इस्तेमाल किया जाता है. एक्यूआइ को स्तर व रीडिंग के हिसाब से छह कैटेगरी में बांटा गया है. 0-50 के बीच एक्यूआइ गुणवत्तापूर्ण, शुद्ध हवा को दर्शाता है. वहीं 51 से 100 के बीच एक्यूआइ वायु की शुद्धता को संतोषजनक माना जाता है. 101 से 200 के बीच मध्यम, 201 से 300 के बीच एक्यूआइ को खराब, 301 से 400 एक्यूआइ को बेहद खराब व 401-500 के बीच एक्यूआइ को गंभीर श्रेणी में रखा गया है.

कई कारणों से प्रदूषित हो रही जिले की हवा

जिले में वायु प्रदूषण के बढ़ते खतरों के लिए विशेषज्ञ कई कारणों को जिम्मेदार मान रहे हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक जिले में जारी धान की कटाई, खेतों में जलाये जा रहे पराली के साथ-साथ जिले में लगातार हो रहे निर्माण कार्य व वाहनों से निकलने वाले धूंआ के कारण जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है. इसके अलावा जिले में बगैर पीयूसी प्रमाणपत्र के दौड़ रहे वाहनों पर सख्तीपूर्वक रोक को जरूरी महसूस की जा रही है.

स्वास्थ्य संबंधी जटिलता पैदा कर सकता है प्रदूषित हवा

जिले की हवा की सेहत में आयी गिरावट की स्थिति अगर लंबे समय तक बनी रहती है. तो यह लोगों के लिये स्वास्थ्य संबंधी कई जटिलताएं खड़ी कर सकता है. प्रदूषित हवा के कारण लोगों को सांस फूलने के साथ-साथ सूखी खांसी, गले में संक्रमण जैसी अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. गंभीर रोग से पीड़ित मरीज, बुजुर्ग व बच्चों की सेहत को यह गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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