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Home Rajya बिहार आरा से बलिया की दूरी 40 KM होगी कम, 60 साल पुराना सपना होगा पूरा, 2300 करोड़ होंगे खर्च

आरा से बलिया की दूरी 40 KM होगी कम, 60 साल पुराना सपना होगा पूरा, 2300 करोड़ होंगे खर्च

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आरा से बलिया की दूरी 40 KM होगी कम, 60 साल पुराना सपना होगा पूरा, 2300 करोड़ होंगे खर्च
आरा-बलिया रेल लाइन (सांकेतिक तस्वीर)

New Rail Line: बिहार और उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों के लंबे इंतजार को अब राहत मिलने वाली है. आरा-बलिया रेल लाइन परियोजना अब कागजों से निकलकर जमीन पर उतरने वाली है. वर्षों से अटकी इस योजना को लेकर अब तैयारियां तेज हो गई हैं. फाइनल लोकेशन सर्वे, ड्रोन मैपिंग और डीपीआर तैयार कर रेलवे मंत्रालय को सौंप दी गई है. अब जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है.

करीब 2300 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना भोजपुर, बक्सर, सारण और बलिया के साथ दियारा इलाके के लाखों लोगों के लिए बड़ी सौगात मानी जा रही है. इस रेल लाइन के शुरू होने से आरा और बलिया के बीच की दूरी लगभग 40 किलोमीटर तक कम हो जाएगी.

रघुनाथपुर होकर तैयार किया गया नया रूट

नई रेल लाइन बलिया जिले के रघुनाथपुर स्थित जीत बाबा स्थान के पास से गुजरेगी. वहां से यह वीर लोरिक स्थान, जलालपुर खुर्द, रामपुर बस्तर, पिंडारी और बादिलपुर होते हुए गंगा नदी पार कर भोजपुर जिले में दाखिल होगी. इसके बाद यह जगजीवन हॉल्ट के पास आरा रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगी.

रेलवे अधिकारियों के अनुसार शुरुआती सर्वे के दौरान कुछ हिस्सों में दलदली जमीन मिलने की वजह से तकनीकी दिक्कतें सामने आई थीं. खासकर बकुल्हा-आरा और संहतवार-बादिलपुर के बीच चुनौती ज्यादा थी. इसी कारण रूट में बदलाव कर इसे रघुनाथपुर की ओर मोड़ा गया.

ड्रोन सर्वे और थ्रीडी मैपिंग से तैयार हुई रिपोर्ट

इस परियोजना के लिए रेलवे ने लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है. हैदराबाद की आरबी एसोसिएट सर्वे कंपनी की 16 सदस्यीय टीम ने पूरे रूट पर ग्राउंड लेवलिंग, मिट्टी जांच और जीपीएस आधारित सर्वे पूरा किया. इससे पहले ड्रोन सर्वे और थ्रीडी मैपिंग भी कराई गई थी.

अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेज दी गई है. परियोजना में दो बड़ी नदियों पर एलिवेटेड रेल पुल बनाने की योजना भी शामिल है, जिससे रेल संचालन और सुरक्षित हो सके.

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1960 के दशक का सपना अब पकड़ रहा रफ्तार

आरा-बलिया रेल लाइन की मांग कोई नई नहीं है. इस परियोजना की मांग 1960 के दशक से लगातार उठती रही है. 2009 के रेल बजट में इसकी घोषणा भी हुई थी, लेकिन लंबे समय तक यह योजना फाइलों में ही सीमित रही. पिछले कुछ वर्षों में पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह और पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के प्रयासों से इस योजना ने फिर गति पकड़ी. पूर्व सांसद ने कहा कि अगले एक-दो महीने में टेंडर प्रक्रिया शुरू हो सकती है.

इस परियोजना के पूरा होने के बाद जिन गांवों में अब तक बेहतर सड़क और रेल संपर्क नहीं था, वहां व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे. किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी. छात्रों के लिए आवागमन बेहतर होगा और व्यापारियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा.

रेलवे के मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी सुमित कुमार के अनुसार सर्वे रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी जा चुकी है. करीब 78 करोड़ रुपये सर्वे पर खर्च हो चुके हैं, इसलिए दोबारा सर्वे की संभावना बेहद कम है. अब तकनीकी और इंजीनियरिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मंजूरी का इंतजार है.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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