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Home Sports डल झील की लहरों पर उड़ी मछुआरे की बेटी, पिता बिस्तर पर, 9 साल की उम्र में मां का निधन, अब सोने से चमकाई सालों की मेहनत

डल झील की लहरों पर उड़ी मछुआरे की बेटी, पिता बिस्तर पर, 9 साल की उम्र में मां का निधन, अब सोने से चमकाई सालों की मेहनत

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डल झील की लहरों पर उड़ी मछुआरे की बेटी, पिता बिस्तर पर, 9 साल की उम्र में मां का निधन, अब सोने से चमकाई सालों की मेहनत
इंडिया वॉटर गेम्स फेस्टिवल 2025 में रश्मिता साहू ने C-1 200 मीटर में 53.53 सेकंड का शानदार समय निकालते हुए स्वर्ण पदक जीता.

Rashmita Sahoo: 9 साल की उम्र में पिता हादसे में घायल, 2015 में माँ का निधन, लेकिन… सपने नहीं टूटे. मुश्किलें चाहे कितनी भी हों, सपनों को पंख मेहनत ही देती है. रश्मिता साहू ने खेलो इंडिया वॉटर गेम्स फेस्टिवल 2025 में डल झील की लहरों पर सुनहरा इतिहास लिख दिया. यह कहानी है ओड़िशा की रश्मिता साहू के बारे में, जिन्होंने सारी बाधाओं को पार करते हुए एक नया मुकाम हासिल किया है. रश्मिता साहू ने खेलो इंडिया वॉटर गेम्स फेस्टिवल 2025 में शुक्रवार को महिला कैनोइंग सी-1 200 मीटर स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया है. 23 वर्षीय रश्मिता की वर्षों की मेहनत का नतीजा उन्हें शीर्ष सम्मान के रूप में मिला. उन्होंने 53.53 सेकंड का समय निकालते हुए श्रीनगर की ऐतिहासिक डल झील में केरल और मध्य प्रदेश की खिलाड़ियों को पछाड़कर पहला स्थान हासिल किया. स्वर्ण पदक जीतने के बाद रश्मिता साहू ने कहा कि उन्होंने कभी खेल छोड़ने के बारे में सोचा था, लेकिन उनके पिता ने उन्हें जारी रखने के लिए प्रेरित किया.

बाधाओं को पार कर सफलता के शिखर पर रश्मिता

कटक के चौदवार की मछुआरा समुदाय से आने वाली रश्मिता महज नौ साल की थीं, जब 2011 में उनके पिता, सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए. मछुआरा समुदाय में सीमित आय होने और फिर इस हादसे से परिवार की जीविका छिन गई और पाँच सदस्यों वाला परिवार संकट में पड़ गया. चार साल बाद, 2015 में उनकी मां भी सड़क दुर्घटना का शिकार हुईं, लेकिन वे अपने पति की तरह बच नहीं सकीं और उनकी मृत्यु हो गई. इस घटना ने रश्मिता को भीतर तक तोड़ दिया और परिवार को असहाय बना दिया.

पदक जीतने के बाद रश्मिता ने एएनआई से कहा, “अगर हम हमेशा दुखों के बारे में सोचते रहेंगे तो जिंदगी में आगे नहीं बढ़ पाएंगे. मैंने भी परिवार की वजह से खेल छोड़ने का सोचा था, लेकिन पिता ने कहा कि खेल मत छोड़ो. तब मैंने उनकी बात मानी और खेल जारी रखा. इसके बाद मैंने खुद को बहुत प्रेरित किया. अभ्यास के दौरान हमेशा सोचती थी कि मुझे ऐसा अभ्यास करना है जिससे मैं पदक जीत सकूँ.”

पहले भी जीत चुकी हैं कैनोइंग की प्रतियोगिताएं

उत्तराखंड में हुई पिछली राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में रश्मिता ने कैनोइंग डबल्स महिलाओं में रजत और कैनोइंग सिंगल्स महिलाओं में कांस्य पदक जीता था. इससे पहले भोपाल में वे कैनोइंग सिंगल्स महिलाओं की स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत चुकी थीं.

ओडिशा पुलिस में अधिकारी भी हैं रश्मिता

राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के बाद रश्मिता ओडिशा पुलिस में भर्ती के लिए पात्र हुईं और 2024 से वह गर्व के साथ पुलिस अधिकारी के रूप में काम कर रही हैं, साथ ही चार सदस्यीय परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं.

एशियाई खेलों में पदक जीतने की है उम्मीद

उनके कोच लाइशराम जोहानसन सिंह ने कहा कि उन्हें रश्मिता से अंतरराष्ट्रीय पदक की उम्मीद है और वह उन्हें 2026 एशियाई खेलों के लिए तैयार करेंगे. उन्होंने कहा, “मैं 2020 से लगातार उन्हें ट्रेनिंग दे रहा हूँ, जूनियर से सीनियर स्तर तक. उन्होंने पहली बार 2018 के स्पेशल एरिया गेम्स में पहचान बनाई थी. तब से वे लंबा सफर तय कर चुकी हैं और मुझे विश्वास है कि 2026 एशियाई खेलों में वे पदक जीतेंगी.”

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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