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Home Sports टीम सेलेक्टर्स पर भड़के जेसन रॉय, कहा-मुझे टीम से बाहर करने का तरीका सही नहीं था

टीम सेलेक्टर्स पर भड़के जेसन रॉय, कहा-मुझे टीम से बाहर करने का तरीका सही नहीं था

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टीम सेलेक्टर्स पर भड़के जेसन रॉय, कहा-मुझे टीम से बाहर करने का तरीका सही नहीं था
जेसन रॉय

Jason Roy : इंग्लैंड को 2019 का विश्वकप जिताने में अहम भूमिका निभाने वाले सलामी बल्लेबाज जेसन रॉय ने एक इंटरव्यू के दौरान टीम सेलेक्टर्स पर अपना गुस्सा निकाला है. उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी के तौर पर आप सालों तक अपने देश के लिए जी-जान लगा देते है. ऐसे में बस आप सिर्फ इतनी उम्मीद करते हैं कि अगर आपको ड्रॉप भी किया जा रहा है, तो कम से कम सामने बैठकर साफ शब्दों में बात की जाए. मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. मुझे जिस तरह टीम से बाहर किया गया, वह तरीका बिल्कुल गलत था. रॉय ने यह भी कहा कि अगर बोर्ड और सेलेक्टर्स खिलाड़ियों के साथ वफादार नहीं रह सकते, तो खिलाड़ियों को भी अपने करियर और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कड़े फैसले लेने पड़ते हैं.

2023 विश्वकप से शुरू हुआ विवाद

जेसन रॉय और सेलेक्टर्स के बीच विवाद की कहानी 2023 विश्वकप से जुड़ी हुई है. रॉय को भारत में होने वाले इस टूर्नामेंट के लिए शुरूआती टीम में चुन लिया गया था, लेकिन टूर्नामेंट शुरू होने से ठीक पहले अचानक उन्हें ड्रॉप करके युवा बल्लेबाज हैरी ब्रूक को टीम में शामिल कर लिया गया. इसके बाद रॉय ने एसीबी का नेशनल कॉन्ट्रैक्ट ठुकरा दिया था. तब से उनके और बोर्ड के बीच दूरियां बढ़ गयी.

फ्रैंचाइजी क्रिकेट पर ज्यादा ध्यान

अपने भविष्य के बारे में बात करते हुए जेसन रॉय ने यह साफ बयान दिया कि वह अभी भी पूरी तरह फिट हैं और रन बनाने के भूखे हैं. उन्होंने यह भी माना कि वह अब इंग्लैंड के लिए खेलने की उम्मीद छोड़ चुके है. उनका पूरा ध्यान अब आईपीएल, एसए 20 और मेजर क्रिकेट लीग जैसी दुनिया भर की T-20 लीग्स पर है.

-स्वयं ऋषि-

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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