FIFA World Cup 2026 Cooling Vest Technology: अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में खेला जा रहा फीफा विश्व कप 2026 सिर्फ मैदान पर मुकाबलों के लिए नहीं, बल्कि भीषण गर्मी के लिए भी चर्चा में है. कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जिससे खिलाड़ियों के प्रदर्शन और स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है.
रविवार को फिलाडेल्फिया के लिंकन फाइनेंशियल फील्ड में फ्रांस और पराग्वे के बीच खेले गए प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में मैच शुरू होने के समय तापमान 37.9 डिग्री सेल्सियस था, जबकि मैच के दौरान यह 43.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. इसके चलते खिलाड़ियों को मैदान पर गर्मी से जूझते देखा गया. गर्मी के खतरे को देखते हुए फीफा मैचों के दौरान हाइड्रेशन ब्रेक दे रहा है. वहीं कई राष्ट्रीय टीमों ने खिलाड़ियों को ठंडा रखने के लिए अत्याधुनिक कूलिंग तकनीक अपनाई है.
‘कूलिंग वेस्ट’ बन रही खिलाड़ियों की ढाल
दक्षिण अफ्रीका, स्पेन और अर्जेंटीना समेत कई टीमों के बीच इस विश्व कप में ‘क्लाइमाकूल सिस्टम’ चर्चा का विषय बना हुआ है. इस सिस्टम में कूलिंग वेस्ट, इंसुलेटेड जैकेट और कूलिंग ओवरबूट शामिल हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक यह तकनीक शरीर के आंतरिक तापमान को लगभग 0.5 डिग्री सेल्सियस और त्वचा के तापमान को 13 डिग्री सेल्सियस तक कम करने में मदद करती है.
कूलिंग वेस्ट के अंदर विशेष जेल भरा होता है, जिसे इस्तेमाल से पहले फ्रीज किया जाता है. खिलाड़ी जब इसे जर्सी के ऊपर पहनते हैं तो जेल धीरे-धीरे पिघलते हुए शरीर से गर्मी सोखता है और शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में मदद करता है.
जर्सी और जूतों में भी हाई-टेक बदलाव
सिर्फ कूलिंग वेस्ट ही नहीं, खिलाड़ियों की जर्सियों में भी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. नई जर्सियों में माइक्रो-वेंटिलेशन सिस्टम लगाया गया है, जिससे पसीना तेजी से बाहर निकलता है और खिलाड़ी अधिक समय तक ठंडक महसूस करते हैं.
इसके अलावा खिलाड़ियों के जूतों के ऊपर विशेष कूलिंग ओवरबूट लगाए जा रहे हैं. यह तकनीक पैरों की गर्मी और सूजन को कम करने में मदद करती है. दावा किया जा रहा है कि सिर्फ सात मिनट में पैरों का तापमान करीब 2 डिग्री सेल्सियस तक घटाया जा सकता है.
फॉर्मूला-1 से फुटबॉल तक पहुंची तकनीक
दिलचस्प बात यह है कि इन कूलिंग उपकरणों को मूल रूप से फॉर्मूला-1 ड्राइवरों के लिए विकसित किया गया था. अब इन्हें फुटबॉल में भी इस्तेमाल किया जा रहा है. टीमों द्वारा मैच से पहले, हाफ टाइम के दौरान और ट्रेनिंग सत्रों में खिलाड़ियों को ठंडा रखने के लिए इनका व्यापक उपयोग किया जा रहा है.
गर्मी ने बढ़ाई फीफा की चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बड़े खेल आयोजनों में अत्यधिक गर्मी एक नई चुनौती बनकर उभरी है. फीफा विश्व कप 2026 में रिकॉर्ड तापमान के बीच खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नई तकनीकों और मेडिकल प्रोटोकॉल की अहम भूमिका देखने को मिल रही है.
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