Folarin Balogun: रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था फीफा ने अमेरिका के स्टार फॉरवर्ड फोलारिन बालोगुन को दिखाया गया लाल कार्ड रद्द कर दिया. इस फैसले के चलते बालोगुन पर लगा एक मैच का निलंबन भी समाप्त हो गया और अब वह बेल्जियम के खिलाफ होने वाले महत्वपूर्ण प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में अमेरिकी टीम का हिस्सा बन सकेंगे. इस अभूतपूर्व फैसले ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत में नई बहस छेड़ दी है.
LOL!!! “Nah bro I have the Trump card, I win.”
— Gunther Eagleman™ (@GuntherEagleman) July 5, 2026
Trump card always wins! pic.twitter.com/gGTlmDm0wH
इस मैच में मिला था लाल कार्ड
अमेरिका ने बोस्निया-हर्जेगोविना को 2-0 से हराकर अंतिम-16 में अपनी जगह पक्की कर ली है, लेकिन इस जीत के दौरान टीम को एक बड़ा झटका भी लगा. मैच में अमेरिका के स्टार फॉरवर्ड फोलारिन बालोगुन को विरोधी खिलाड़ी तारिक मुहारेमोविच के पैर पर चोट पहुंचाने के आरोप में सीधा लाल कार्ड दिखाया गया. मैदान पर मौजूद रेफरी राफेल क्लॉस ने शुरुआत में कोई कार्रवाई नहीं की थी, लेकिन वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) की समीक्षा के बाद उन्होंने अपना निर्णय बदलते हुए बालोगुन को बाहर का रास्ता दिखा दिया. इस लाल कार्ड के कारण बालोगुन अब नियमों के अनुसार अगले मुकाबले में नहीं खेल पाएंगे.
🚨 NOW: After MASSIVE pressure, FIFA has REVERSED the unfair red card against US men's national soccer team's Folarin Balogun — meaning the crucial scorer is AVAILABLE for America's next match against Belgium
— Eric Daugherty (@EricLDaugh) July 5, 2026
LFG! PRESIDENT TRUMP: "Thank you to FIFA for doing what was right, and… pic.twitter.com/h3nRlkncOx
फीफा ने निलंबन हटाया
रविवार को फीफा ने आधिकारिक रूप से घोषणा की कि फोलारिन बालोगुन का एक मैच का निलंबन समाप्त कर दिया गया है. इस फैसले के बाद वह बेल्जियम के खिलाफ होने वाले नॉकआउट मुकाबले में अमेरिका की ओर से मैदान पर उतर सकेंगे. विश्व कप के दौरान लाल कार्ड मिलने के बाद किसी खिलाड़ी का निलंबन हटाया जाना बेहद दुर्लभ माना जाता है. बताया जा रहा है कि 1962 के बाद यह पहला अवसर है जब विश्व कप के बीच किसी खिलाड़ी का लाल कार्ड बरकरार रहने के बावजूद उसका प्रतिबंध समाप्त किया गया है.
क्या ट्रंप ने फीफा अध्यक्ष से की थी बात
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने दावा किया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मैच खत्म होने के बाद फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को फोन किया था. सूत्र के मुताबिक ट्रंप ने बालोगुन के मामले की दोबारा समीक्षा कराने का आग्रह किया था. इसके बाद फीफा ने मामले की समीक्षा की और अंत में खिलाड़ी का निलंबन समाप्त करने का फैसला लिया. हालांकि फीफा की ओर से आधिकारिक रूप से यह नहीं बताया गया कि निर्णय बदलने की वजह क्या थी.
ट्रंप ने फीफा का जताया आभार
फीफा के फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए संस्था का धन्यवाद किया. उन्होंने लिखा कि “सही काम करने और अन्याय को पलटने के लिए फीफा का आभार.” ट्रंप की इस टिप्पणी के बाद यह मामला और अधिक चर्चा का विषय बन गया. आलोचकों का कहना है कि किसी राजनीतिक नेता के हस्तक्षेप के बाद खेल संस्था का फैसला बदलना खेल की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
बेल्जियम फुटबॉल संघ ने जताई नाराजगी
फीफा के फैसले से सबसे ज्यादा नाराज बेल्जियम फुटबॉल संघ नजर आया. रॉयल बेल्जियन फुटबॉल एसोसिएशन (RBFA) ने इस फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा कि उसे इस निर्णय की कोई उम्मीद नहीं थी. संघ का मानना है कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में सभी टीमों के लिए समान नियम होने चाहिए और किसी एक खिलाड़ी के मामले में अपवाद बनाना उचित नहीं है.
बेल्जियम के कोच ने उड़ाया फीफा का मजाक
बेल्जियम के मुख्य कोच रूडी गार्सिया ने भी फीफा के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता था कि फीफा के दफ्तरों में 5 जुलाई को यूरोप के 1 अप्रैल यानी अप्रैल फूल दिवस की तरह माना जाता है. गार्सिया ने कहा कि उनके अनुसार विश्व कप के इतिहास में ऐसा फैसला पहली बार देखने को मिला है. उन्होंने संकेत दिया कि यह निर्णय खेल के स्थापित नियमों और परंपराओं के विपरीत है.
बेल्जियम मुकाबले पर रहेंगी सभी की निगाहें
अब सभी की नजरें अमेरिका और बेल्जियम के बीच होने वाले मुकाबले पर टिकी हैं. फोलारिन बालोगुन इस विश्व कप में अमेरिका के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं और तीन गोल कर चुके हैं. ऐसे में उनके खेलने से अमेरिकी टीम को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है. हालांकि इस विवाद ने विश्व कप के रोमांच के साथ-साथ खेल प्रशासन की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है. आने वाले दिनों में फीफा पर इस फैसले को लेकर और सवाल उठने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
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