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Home Cricket IPL 2026 KKR की फजीहत के बाद अजिंक्य रहाणे की कप्तानी पर उठे सवाल, टीम में बने रहना भी मुश्किल

KKR की फजीहत के बाद अजिंक्य रहाणे की कप्तानी पर उठे सवाल, टीम में बने रहना भी मुश्किल

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KKR की फजीहत के बाद अजिंक्य रहाणे की कप्तानी पर उठे सवाल, टीम में बने रहना भी मुश्किल
शुभमन के साथ रहाणे

KKR vs CSK : दो बार आईपीएल का खिताब अपने नाम करने वाली कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम इस बार के सीजन में एक मैच जीतने के लिए भी संघर्ष कर रही है. प्वाइंट टेबल में केकेआर अभी 10वें नंबर पर है और उसके खाते में 1 प्वाइंट है, वह भी इसलिए क्योंकि मैच का रिजल्ट नहीं निकला था. टीम के खराब प्रदर्शन की वजह से केकेआर के कप्तान अजिंक्य रहाणे को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.

रहाणे पर लग रहे हैं लापरवाही के आरोप

पीटीआई न्यूज एजेंसी के अनुसार ऐसे कई मौके आए हैं जब टीमों की आईपीएल में शुरुआत बेहद खराब रही है लेकिन कोई भी टीम कोलकाता नाइट राइडर्स जितनी बिखरी हुई और कोई भी कप्तान इतना बेखबर पहले कभी नहीं दिखा. इसके अलावा बल्लेबाजी का अंदाज भी आईपीएल की शुरुआत के समय जितना ही पुराना है.अभिषेक शर्मा और इशान किशन जैसे युवा खिलाड़ियों ने टी20 में बल्लेबाजी का अंदाज पूरी तरह से बदल दिया है और अब वैभव सूर्यवंशी ने तो इसे एक बिल्कुल ही नए स्तर पर पहुंचा दिया है. ऐसे में 37 की उम्र में रहाणे के लिए अब इस बदलते खेल के साथ कदम मिलाना या अपनी बल्लेबाजी के तरीके को बदलना नामुमकिन सा है.

रहाणे की कप्तानी पर उठे सवाल

बैटिंग में रहाणे के खराब प्रदर्शन के बाद उनकी कप्तानी पर भी सवाल उठ रहे हैं. आलोचक यह कह रहे हैं कि रहाणे उस टीम के कप्तान कैसे बने रह सकते हैं जबकि एक बल्लेबाज के तौर पर भी उनकी जगह पक्की नहीं है.पांच मैच में रहाणे सिर्फ सात छक्के लगा पाए हैं लेकिन इससे भी अधिक हैरानी की बात यह है कि उन्होंने सिर्फ आठ चौके जड़े हैं. एक शीर्ष क्रम के बल्लेबाजी के लिए जो या तो पारी का आगाज करता है या फिर तीसरे नंबर पर आता है उसके लिए इस स्तर पर हर मैच में औसतन तीन बाउंड्री लगाना बहुत बड़ी नाकामी मानी जाएगी.रहाणे का स्ट्राइक रेट भी 150 से कम है जो कोविड से पहले के दिनों में अच्छा माना जाता था लेकिन अब उस खिलाड़ी के लिए एक निराशाजनक तस्वीर पेश कर रहा है जो देश के लिए 80 से टेस्ट मैच खेल चुका है और सम्मानित पूर्व टेस्ट कप्तान है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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