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Home Sports हनी ट्रैप के खतरे को देखते हुए BCCI ने सख्त किए नियम, खिलाड़ियों के कमरे में प्रवेश हुआ मुश्किल; फ्रेंचाइजी के मालिक भी नहीं कर पाएंगे बात

हनी ट्रैप के खतरे को देखते हुए BCCI ने सख्त किए नियम, खिलाड़ियों के कमरे में प्रवेश हुआ मुश्किल; फ्रेंचाइजी के मालिक भी नहीं कर पाएंगे बात

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हनी ट्रैप के खतरे को देखते हुए BCCI ने सख्त किए नियम, खिलाड़ियों के कमरे में प्रवेश हुआ मुश्किल; फ्रेंचाइजी के मालिक भी नहीं कर पाएंगे बात
बीसीसीआई ने सख्त किए नियम

BCCI Honey Trap Warning : आईपीएल में हनी ट्रैप के खतरे को देखते हुए बीसीसीआई ने खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ के सदस्यों और टीम अधिकारियों के होटल के कमरों में अनधिकृत लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है. बीसीसीआई ने आईपीएल की सभी टीमों को पत्र लिखकर यह जानकारी दी है.बीसीसीआई की भ्रष्टाचार विरोधी इकाई (एसीयू) ने दुर्व्यवहार और प्रोटोकॉल के उल्लंघन की घटनाओं को उजागर किया था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है.

मैनेजरों की अनुमति के बिना कमरे में नहीं मिलेगा प्रवेश

बीसीसीआई ने आईपीएल की 10 फ्रेंचाइजी के लिए जारी एक पत्र में कहा है कि खिलाड़ियों और अधिकारियों के कमरों में मेहमानों के प्रवेश के लिए टीम मैनेजरों से लिखित अनुमति लेना जरूरी होगा. पीटीआई न्यूज एजेंसी के अनुसार बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने 10 फ्रेंचाइजी के सीईओ को पत्र लिखकर इस बारे में जानकारी दी है.सैकिया ने पत्र में कहा है कि इस सीजन में कुछ घटनाओं को देखते हुए यह सलाह जारी की गई है और इसका उद्देश्य आईपीएल में अनुशासन और प्रोटोकॉल बनाये रखना है.

मामलाबीसीसीआई का फैसला
होटल के कमरों में प्रवेशखिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ और अधिकारियों के कमरों में अनधिकृत लोगों के प्रवेश पर रोक
मेहमान बुलाने का नियमटीम मैनेजर की पूर्व लिखित अनुमति जरूरी
हनी ट्रैप चेतावनीफ्रेंचाइजियों को हनी ट्रैप, ब्लैकमेलिंग और सुरक्षा जोखिमों को लेकर सतर्क रहने को कहा
होटल से बाहर जानाखिलाड़ियों और स्टाफ को बिना सूचना वक्त-बेवक्त बाहर जाने की अनुमति नहीं
सूचना देना अनिवार्यबाहर जाने से पहले संबंधित अधिकारियों को जानकारी देनी होगी
नई SOP लागूसभी खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर लागू
नियम उल्लंघन पर कार्रवाईजुर्माना, निलंबन या अयोग्यता तक की कार्रवाई संभव
निगरानी व्यवस्थाबीसीसीआई और IPL संचालन परिषद समय-समय पर जांच कर सकती है
मालिकों पर रोकमैच के दौरान फ्रेंचाइजी मालिक खिलाड़ियों से सीधे बातचीत या संपर्क नहीं कर सकेंगे
प्रतिबंधित क्षेत्रडगआउट, ड्रेसिंग रूम और मैदान में मालिकों/प्रतिनिधियों की पहुंच सीमित
वेपिंग/ई-सिगरेटड्रेसिंग रूम, होटल और प्रैक्टिस एरिया में पूरी तरह प्रतिबंधित
कानूनी चेतावनीई-सिगरेट भारतीय कानून के तहत प्रतिबंधित, उल्लंघन अपराध माना जाएगा
बीसीसीआई की चिंताप्रोटोकॉल उल्लंघन से आईपीएल, फ्रेंचाइजी और बीसीसीआई की छवि को नुकसान का खतरा

बीसीसीआई ने कहा-खिलाड़ियों को हनी ट्रैप और सुरक्षा जोखिमों से बचाना जरूरी

बीसीसीआई की ओर से जो जानकारी दी गई है उसके अनुसार आईपीएल जैसे टूर्नामेंट में खिलाड़ियों पर यौन शोषण और हनी ट्रैपिंग का जोखिम रहता है.इस परिस्थिति में खिलाड़ियों की सुरक्षा बोर्ड के लिए जरूरी है, क्योंकि ऐसी घटनाओं की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है, जिसमें गंभीर कानूनी आरोप लग सकते हैं. सबसे आम शिकायत यौन दुर्व्यवहार से संबंधित होती है. बोर्ड ने कहा कि आईपीएल फ्रेंचाइजी को ऐसे जोखिमों को कम करने के लिए हर समय सतर्क और सक्रिय रहना चाहिए. सुरक्षा के नये नियमों के अनुसार खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ के सदस्यों को अपने सुरक्षा अधिकारी (एसएलओ) और टीम इंटीग्रिटी अधिकारी (टीआईओ) को सूचित किए बिना अनियमित समय पर टीम के होटलों से बाहर निकलने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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