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Home Religion बिहार के इस मंदिर में हैं भगवान विष्णु के चरणचिह्न, यहां पिंडदान करने से मिलता है मोक्ष 

बिहार के इस मंदिर में हैं भगवान विष्णु के चरणचिह्न, यहां पिंडदान करने से मिलता है मोक्ष 

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बिहार के इस मंदिर में हैं भगवान विष्णु के चरणचिह्न, यहां पिंडदान करने से मिलता है मोक्ष 
विष्णुपद मंदिर

Vishnupad Mandir: बिहार के गया में स्थित विष्णुपद मंदिर भगवान विष्णु के पवित्र चरणचिह्नों और पिंडदान की प्राचीन परंपरा के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. हिंदू धर्म में यह मंदिर पितरों के श्राद्ध और पिंडदान के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है. इस मंदिर से गयासुर और भगवान विष्णु से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा भी प्रचलित है, जो इसके धार्मिक महत्व को और अधिक बढ़ा देती है. 

भगवान विष्णु के चरणचिह्नों की होती है पूजा

Vishnupad
बिहार के इस मंदिर में हैं भगवान विष्णु के चरणचिह्न, यहां पिंडदान करने से मिलता है मोक्ष  4

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां किसी मूर्ति की नहीं, बल्कि भगवान विष्णु के चरणचिह्नों की पूजा की जाती है. मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु के लगभग 40 सेंटीमीटर लंबे चरणचिह्न मौजूद हैं. इन्हें धर्मशिला कहा जाता है. यह पवित्र पदचिह्न चांदी की प्लेटों से घिरे एक विशेष घेरे में सुरक्षित रखा गया है. इन चरणचिह्नों पर भगवान विष्णु के दिव्य प्रतीक, जैसे शंख, चक्र और गदा के निशान भी स्पष्ट दिखाई देते हैं.

गयासुर और भगवान विष्णु की पौराणिक कथा

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पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में गयासुर नाम का एक शक्तिशाली राक्षस था. उसने कठोर तपस्या करके भगवान से ऐसा वरदान प्राप्त किया कि जो भी उसे देख ले, उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाए. इस वरदान के कारण पापी लोग भी बिना अच्छे कर्म किए मोक्ष प्राप्त करने लगे, जिससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा. तब सृष्टि की व्यवस्था बनाए रखने के लिए भगवान विष्णु स्वयं गया पहुंचे. उन्होंने गयासुर की छाती पर अपना चरण रखकर उसे भारी दबाव के साथ धरती के नीचे, यानी पाताल में दबा दिया. मान्यता है कि उसी समय भगवान विष्णु के चरणों की छाप पत्थर पर अंकित हो गई, जो आज विष्णुपद मंदिर में पूजित है.

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वे धर्म, ज्योतिष, राशिफल, व्रत-त्योहार, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं. उनकी विशेष रुचि धार्मिक परंपराओं, ज्योतिषीय विश्लेषण और दैनिक राशिफल को सरल, सटीक और पाठक-हितैषी भाषा में प्रस्तुत करने में है. नेहा का उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धर्म, संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों को आसानी से समझ सकें. उनकी लेखन शैली शोध-आधारित, सरल और स्पष्ट है, जो जटिल विषयों को भी सहज और रोचक बना देती है. वे राशिफल, ग्रह-गोचर, व्रत-त्योहार, धार्मिक मान्यताओं, वास्तु, पौराणिक प्रसंगों और भारतीय रीति-रिवाजों से संबंधित विषयों पर नियमित रूप से लेख लिखती हैं. डिजिटल पत्रकारिता में उनकी रुचि पाठकों की जरूरतों को समझते हुए जानकारीपूर्ण, SEO-अनुकूल और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में है.
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