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Home Religion झारखंड का प्रसिद्ध सरहुल पर्व इस दिन, साल वृक्ष की पूजा से जुड़ी अनोखी मान्यता

झारखंड का प्रसिद्ध सरहुल पर्व इस दिन, साल वृक्ष की पूजा से जुड़ी अनोखी मान्यता

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झारखंड का प्रसिद्ध सरहुल पर्व इस दिन, साल वृक्ष की पूजा से जुड़ी अनोखी मान्यता
सरहुल पर्व 2026 में कब

Sarhul Festival 2026: झारखंड और आसपास के इलाकों में मनाया जाने वाला सरहुल पर्व आदिवासी समाज का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार है. यह उत्सव प्रकृति की पूजा और उसके संरक्षण का प्रतीक माना जाता है. सरहुल के दौरान साल वृक्ष की पूजा, पारंपरिक नृत्य, गीत और सामुदायिक भोज का विशेष महत्व होता है. इस पर्व के माध्यम से लोग प्रकृति, सूर्य और पृथ्वी के प्रति आभार व्यक्त करते हैं. सरहुल का त्योहार खासतौर पर झारखंड के उरांव, मुंडा, और अन्य आदिवासी समुदायों के बीच बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस अवसर पर गांवों में खुशी और उत्सव का माहौल देखने को मिलता है.

2026 में कब मनाया जाएगा सरहुल

इस वर्ष यानी 2026 में सरहुल पर्व 21 मार्च, शनिवार को मनाया जाएगा. हालांकि अलग-अलग गांवों और समुदायों में इस पर्व को मनाने की तिथि में थोड़ा अंतर भी देखने को मिलता है. कई स्थानों पर सरहुल का उत्सव एक ही दिन नहीं बल्कि अलग-अलग दिनों में मनाने की परंपरा भी है. पर्व से पहले गांवों में इसकी घोषणा की जाती है और सभी लोग मिलकर सरहुल की तैयारी में जुट जाते हैं.

सरहुल शब्द का अर्थ और महत्व

सरहुल शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है — ‘सर’ या ‘सराय’ और ‘हुल’. ‘सर’ या ‘सराय’ का अर्थ होता है साल का पेड़ (शोरिया रोबस्टा), जबकि ‘हुल’ का अर्थ होता है सामूहिक रूप से या उत्सव. इस तरह सरहुल का अर्थ हुआ साल के पेड़ के माध्यम से प्रकृति का सामूहिक उत्सव. मान्यता के अनुसार सरहुल पर्व पृथ्वी और सूर्य के बीच विवाह का प्रतीक भी माना जाता है. इस दिन लोग पवित्र सरना स्थल या सरना वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना करते हैं और प्रकृति से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.

विभिन्न जनजातियों में अलग नाम

सरहुल पर्व विभिन्न जनजातियों के बीच अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है. उरांव सरना समाज में इसे ‘खद्दी’ या ‘खेखेल बेंजा’ कहा जाता है. अलग-अलग समुदायों में इसकी परंपराएं और अनुष्ठान थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन प्रकृति की पूजा और सामूहिक उत्सव इसकी मुख्य विशेषता है. इस दिन गांव के लोग एकजुट होकर प्रकृति और ग्राम देवताओं की पूजा करते हैं.

सरहुल पर्व की पूजा विधि

सरहुल पर्व की तैयारियां लगभग एक सप्ताह पहले से ही शुरू हो जाती हैं. गांव के पाहन (पुजारी) इस पर्व से पहले उपवास रखते हैं. पर्व की सुबह सूर्योदय से पहले पुजारी दो नए घड़ों में पवित्र जल भरकर सरना स्थल पर अर्पित करते हैं. इसके बाद साल के वृक्ष की पूजा की जाती है और गांव की समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है. पूजा के दौरान मां सरना, सूर्य देवता, ग्राम देवताओं और पूर्वजों को याद किया जाता है. पूजा से पहले सरना स्थल की अच्छी तरह सफाई की जाती है. पूजा के दौरान कुछ स्थानों पर पारंपरिक रीति के अनुसार मुर्गे या अन्य पशु-पक्षियों की बलि देने की भी परंपरा रही है.

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नृत्य, गीत और सामुदायिक उत्सव

सरहुल पर्व के दौरान आदिवासी समुदाय के लोग रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजते हैं. पुरुष, महिलाएं और बच्चे सभी मिलकर पारंपरिक नृत्य और गीत प्रस्तुत करते हैं. गांव के अखड़ा में सामूहिक नृत्य का आयोजन किया जाता है, जो इस पर्व का मुख्य आकर्षण होता है. इस दौरान लोग चावल से बने पारंपरिक पेय हांडिया का सेवन भी करते हैं. महिलाएं और पुरुष साल के फूलों को अपने सिर और चेहरे पर सजाते हैं और प्रकृति के इस उत्सव में शामिल होते हैं. सरहुल केवल एक त्योहार ही नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान, सामूहिकता और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने का प्रतीक है. यही कारण है कि झारखंड में यह पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है.

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शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.
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