Rath Yatra 2026: जगन्नाथ रथ यात्रा हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख और पवित्र उत्सवों में से एक मानी जाती है. हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होने वाला यह नौ दिवसीय पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं. इस पावन अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु ओडिशा के पुरी पहुंचते हैं और रथ यात्रा में शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
क्यों निकाली जाती है जगन्नाथ रथ यात्रा?

बहन सुभद्रा की इच्छा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा ने अपने दोनों भाइयों भगवान कृष्ण और बलभद्र (बलराम) से नगर भ्रमण कराने की इच्छा व्यक्त की. अपनी प्रिय बहन की यह इच्छा पूरी करने के लिए दोनों भाइयों ने उन्हें भव्य रथ पर बैठाकर पूरे नगर का भ्रमण कराया. तभी से इस परंपरा की स्मृति में हर वर्ष जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली जाती है.
मौसी के घर जाने की परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने भक्तों के बीच से होते हुए गुंडीचा मंदिर, जिसे भगवान की मौसी का घर माना जाता है, पहुंचते हैं. वहां वे कुछ दिनों तक विराजमान रहते हैं. इस दौरान उनका विशेष स्वागत-सत्कार किया जाता है और उन्हें पारंपरिक ओड़िया व्यंजन ‘पोड़ा पीठा’ का भोग अर्पित किया जाता है.
रथ यात्रा का धार्मिक महत्व

भगवान जगन्नाथ को ‘जगत के नाथ’ अर्थात संपूर्ण सृष्टि के स्वामी कहा जाता है. सामान्य दिनों में भक्तों को भगवान के दर्शन के लिए मंदिर जाना पड़ता है, लेकिन रथ यात्रा के दौरान भगवान स्वयं अपने गर्भगृह से बाहर निकलकर सभी भक्तों को दर्शन देते हैं. धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस पवित्र रथ यात्रा में शामिल होकर भगवान के रथ को खींचता है या श्रद्धापूर्वक रथ के दर्शन करता है, उसे भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन-मरण के बंधनों से मुक्ति (मोक्ष) का मार्ग प्रशस्त होता है.
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