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Home Religion रंग पंचमी क्यों मनाई जाती है? जानिए इसकी पौराणिक कथा और महत्व

रंग पंचमी क्यों मनाई जाती है? जानिए इसकी पौराणिक कथा और महत्व

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रंग पंचमी क्यों मनाई जाती है? जानिए इसकी पौराणिक कथा और महत्व
रंग पंचमी की कथा

Rang Panchami 2026: हिंदू धर्म में रंग पंचमी का त्योहार बहुत उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है. यह त्योहार होली के पांच दिन बाद मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रंग पंचमी को देवी-देवताओं की होली भी कहा जाता है. माना जाता है कि इस दिन देवी-देवता स्वर्ग से धरती पर आते हैं और भक्तों के साथ रंगों से होली खेलते हैं.

इस दिन मंदिरों और घरों में देवी-देवताओं को अबीर और गुलाल चढ़ाया जाता है. लोग पूजा-अर्चना करते हैं और खुशियां मनाते हैं. रंग पंचमी का पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. इस साल यह तिथि 8 मार्च, रविवार को पड़ रही है, इसलिए इसी दिन रंग पंचमी का उत्सव मनाया जाएगा.

श्रीकृष्ण और राधा रानी से जुड़ी कथा

रंग पंचमी से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी से संबंधित है. मान्यता है कि चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी के साथ रंगों की होली खेली थी.

कहा जाता है कि जब गोपियों ने देखा कि राधा रानी भगवान कृष्ण के प्रेम में पूरी तरह डूबी हुई हैं, तो वे भी इस आनंद में शामिल हो गईं. इसके बाद सभी ने मिलकर रंगों से होली खेली और पूरा वातावरण रंगों से भर गया. उस दिन धरती रंगों से इतनी सुंदर लग रही थी कि उसका नजारा बहुत ही अद्भुत था.

जब स्वर्ग में बैठे देवी-देवताओं ने यह दृश्य देखा तो उनके मन में भी भगवान कृष्ण और राधा रानी के साथ होली खेलने की इच्छा हुई. तब वे गोपियों और ग्वालों का रूप लेकर धरती पर आए और भगवान के साथ होली खेलने लगे. यही वजह है कि रंग पंचमी को देवी-देवताओं की होली कहा जाता है.

भगवान शिव और कामदेव की कथा

रंग पंचमी से जुड़ी एक और कथा भगवान शिव, माता पार्वती और कामदेव से जुड़ी हुई है. पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती के हवन कुंड में कूदकर प्राण त्याग देने के बाद भगवान शिव गहरी साधना में लीन हो गए थे.

उसी समय तारकासुर नाम का असुर बहुत अत्याचार करने लगा था. उसका वध तभी संभव था जब भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हो. इसलिए देवताओं ने भगवान शिव की साधना भंग करने के लिए कामदेव को भेजा.

कामदेव ने भगवान शिव पर पुष्प बाण चलाया, जिससे उनकी साधना टूट गई. इससे क्रोधित होकर भगवान शिव ने अपना तीसरा नेत्र खोल दिया और कामदेव भस्म हो गए. बाद में कामदेव की पत्नी रति के विलाप और प्रार्थना करने पर भगवान शिव ने उन्हें फिर से जीवनदान दे दिया.

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इस खुशी में देवी-देवताओं और ऋषियों ने रंगों के साथ उत्सव मनाया. कहा जाता है कि तभी से रंग पंचमी का त्योहार मनाया जाने लगा.

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शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.
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