Pradosh Vrat 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है और व्रत रखा जाता है. प्रदोष व्रत जिस वार को पड़ता है, उसी के आधार पर उसका नाम रखा जाता है. चूंकि इस वर्ष आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रविवार को पड़ रही है, इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत या भानु प्रदोष व्रत कहा जाएगा.

प्रदोष व्रत जुलाई 2026: शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के समय, यानी प्रदोष काल में की जाती है. पंचांग के अनुसार समय इस प्रकार है:
- त्रयोदशी तिथि आरंभ: 12 जुलाई 2026, सुबह 02:04 बजे से
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 12 जुलाई 2026, रात्रि 10:29 बजे तक
- प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 07:22 बजे से रात 09:24 बजे तक
प्रदोष व्रत की सरल पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें तथा भगवान शिव के समक्ष दीपक जलाएं. दिनभर निराहार या फलाहार रहकर व्रत का पालन करें. इस दौरान मन ही मन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें और तामसिक विचारों से दूर रहें.
शाम को सूर्यास्त से पहले दोबारा स्नान करें और पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें. इसके बाद उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें. शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से अभिषेक करें. फिर चंदन का तिलक लगाएं और बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद फूल तथा अक्षत अर्पित करें.
इसके बाद भगवान शिव को मिठाई और फलों का भोग लगाएं. फिर शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें. अंत में कपूर या दीपक से भगवान शिव की आरती करें. पूजा संपन्न होने के बाद प्रसाद वितरित करें और जल अथवा पारण सामग्री ग्रहण कर व्रत का पारण करें.
रवि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति रवि प्रदोष व्रत रखता है, उसकी कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है. भगवान भोलेनाथ की कृपा से जीवन के अनेक संकट दूर होते हैं और पितृ दोष का प्रभाव कम होता. साथ ही, सुख-समृद्धि और यश की प्राप्ति भी होती है.
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