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Home Religion Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या के दिन भूलकर भी न करें ये काम, वरना लग सकता है पितृ दोष

Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या के दिन भूलकर भी न करें ये काम, वरना लग सकता है पितृ दोष

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Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या के दिन भूलकर भी न करें ये काम, वरना लग सकता है पितृ दोष
मौनी अमावस्या 2026

Mauni Amavasya 2026: 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या की तिथि पड़ रही है. हिंदू धर्म में यह दिन स्नान-दान और पितरों के तर्पण के लिए अत्यंत उत्तम माना गया है. कहा जाता है कि इस दिन किए गए तर्पण से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं. हालांकि, इस दिन कुछ सावधानियां बरतना बेहद जरूरी होता है, वरना तर्पण कार्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है और पितर नाराज भी हो सकते हैं.

मौनी अमावस्या के दिन क्या करना चाहिए?

मौन धारण करें

मौनी अमावस्या के दिन मौन रहने की परंपरा है. इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और मौन धारण करने का संकल्प लें. मौन धारण करने से आत्मा को शांति मिलती है.

दीपक जलाएं

अमावस्या तिथि के दिन शाम के समय दक्षिण दिशा में दीपक जलाना शुभ माना गया है. दीपक जलाने के लिए सरसों या तिल के तेल और मिट्टी के दीये का प्रयोग करना चाहिए.

भगवान विष्णु की आराधना करें

मौनी अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की आराधना करना बेहद फलदायक माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु को तिल अर्पित करना चाहिए. इससे नकारात्मकता का नाश होता है.

काले तिल के लड्डू अर्पित करें

पितृ दोष से राहत पाने के लिए इस दिन तिल से बने लड्डू किसी पवित्र नदी में अर्पित करने चाहिए. कहा जाता है कि इससे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और पितृ दोष का नाश होता है.

मौनी अमावस्या के दिन क्या नहीं करना चाहिए?

देर तक न सोएं

मौनी अमावस्या के दिन सूर्योदय के बाद नहीं सोना चाहिए. इसलिए सुबह जल्दी उठकर भगवान की आराधना, मंत्र जाप और ध्यान साधना करना उत्तम माना जाता है.

तामसिक भोजन से बचें

मौनी अमावस्या के दिन तामसिक भोजन का सेवन वर्जित माना गया है. कहा जाता है कि इस दिन तामसिक भोजन करने से पितर नाराज होते हैं और पितृ दोष लगने की संभावना बढ़ जाती है.

नशीली चीजों का सेवन न करें

इस दिन शराब, तंबाकू, गुटखा और सिगरेट जैसी नशीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. इसे अशुभ माना जाता है.

मौन बीच में न तोड़ें

यदि इस दिन मौन धारण करने का संकल्प लिया है, तो उसे बीच में नहीं तोड़ना चाहिए. ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है.

यह भी पढ़ें: Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर मौन व्रत क्यों है जरूरी? जानिए पौराणिक कारण

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. प्रभात खबर किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वे धर्म, ज्योतिष, राशिफल, व्रत-त्योहार, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं. उनकी विशेष रुचि धार्मिक परंपराओं, ज्योतिषीय विश्लेषण और दैनिक राशिफल को सरल, सटीक और पाठक-हितैषी भाषा में प्रस्तुत करने में है. नेहा का उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धर्म, संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों को आसानी से समझ सकें. उनकी लेखन शैली शोध-आधारित, सरल और स्पष्ट है, जो जटिल विषयों को भी सहज और रोचक बना देती है. वे राशिफल, ग्रह-गोचर, व्रत-त्योहार, धार्मिक मान्यताओं, वास्तु, पौराणिक प्रसंगों और भारतीय रीति-रिवाजों से संबंधित विषयों पर नियमित रूप से लेख लिखती हैं. डिजिटल पत्रकारिता में उनकी रुचि पाठकों की जरूरतों को समझते हुए जानकारीपूर्ण, SEO-अनुकूल और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में है.
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