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Home Religion Manokamna Prayer: हे भगवान, पास करा दो, सवा किलो लड्डू चढ़ाऊंगा, क्या ऐसी प्रार्थना सुनते हैं ईश्वर, जानिए सच

Manokamna Prayer: हे भगवान, पास करा दो, सवा किलो लड्डू चढ़ाऊंगा, क्या ऐसी प्रार्थना सुनते हैं ईश्वर, जानिए सच

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Manokamna Prayer: हे भगवान, पास करा दो, सवा किलो लड्डू चढ़ाऊंगा, क्या ऐसी प्रार्थना सुनते हैं ईश्वर, जानिए सच
लड्डू नहीं, श्रद्धा चढ़ाइए…भगवान जरूर सुनते हैं

Manokamna Prayer: अधिकांश लोगों को लगता है कि पूजा-पाठ न करने से ईश्वर नाराज हो जाएंगे, लेकिन सच यह है कि हमारी अधिकतर पूजा सच्चे समर्पण से नहीं होती. वह दिखावे, परंपरा और सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति तक सीमित रहती है. हम ईश्वर को तब याद करते हैं, जब हमें कुछ चाहिए होता है. बड़े-बड़े यज्ञ, अनुष्ठान और व्रत भी कई बार केवल कामना पूर्ति के साधन बन जाते हैं, जिन्हें शास्त्रों में “इष्ट कार्य” कहा गया है.

ईश्वर सौदेबाजी नहीं, कर्म को मानता है

ईश्वर किसी की खुशामद से प्रभावित नहीं होता. उसने सृष्टि के जो नियम बनाए हैं, वे सभी पर समान रूप से लागू होते हैं. कर्म करो और उसी के अनुसार फल भोगो—यह नियम अटल है. ईश्वर पूजा से अधिक कर्म की सच्चाई देखता है.

जब भक्ति बन जाती है सौदा

अक्सर लोग परंपरा, भय, विश्वास या स्वार्थ के कारण पूजा करते हैं. उदाहरण के तौर पर, साल भर पढ़ाई न करने के बाद परीक्षा से पहले मंदिर जाकर कहना— “हे भगवान, पास करा दो, सवा किलो लड्डू चढ़ाऊंगा.”ल यह भक्ति नहीं, सीधी सौदेबाजी है. ऐसे में पास या फेल होना प्रार्थना से नहीं, बल्कि उत्तर पुस्तिका में लिखे कर्मों से तय होता है.

आस्तिक और नास्तिक—दोनों के लिए एक ही नियम

जो व्यक्ति ईश्वर को नहीं मानता, लेकिन अपने कर्म और आत्मविश्वास पर भरोसा रखता है, उसे भी कर्मफल सिद्धांत के अनुसार फल मिलता है. उसी प्रकार पूजा करने वाले व्यक्ति को भी उसके कर्मों के अनुसार ही परिणाम मिलता है—
“अवश्यमेव भोक्तव्यं कर्मफल शुभाशुभम.”

क्या ईश्वर विनती नहीं सुनता?

ईश्वर आर्त भाव से की गई प्रार्थना सुनता है, लेकिन उसके लिए गहरी आस्था और अटूट विश्वास चाहिए. केवल शब्दों की प्रार्थना या चढ़ावे से कर्मफल नहीं बदलता. कई बार ईश्वर पहले भक्त की परीक्षा लेते हैं. ऐसी सच्ची निष्ठा बहुत दुर्लभ होती है.

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पूजा भी कर्म है, विकल्प भी

मीमांसा दर्शन के अनुसार मनुष्य कर्म करने में स्वतंत्र है. पूजा करना या न करना भी एक कर्म है. लेकिन फल तो कर्म-विपाक के अनुसार ही मिलेगा. यदि ईश्वर में विश्वास आत्मबल बढ़ाता है, तो उसका लाभ अवश्य है. लेकिन कठिन समय में जब न ईश्वर पर भरोसा हो और न स्वयं पर, तब दिखावटी पूजा किसी काम नहीं आती.

सच्ची भक्ति क्या है?

कर्मकांड से परे, सच्ची भक्ति प्रेम, श्रद्धा और सेवा भावना है. वह स्वार्थ से मुक्त होती है. जैसा कहा गया है— “दुःख में सुमिरन सब करें, सुख में करे न कोय.” यहां सुख में सुमिरन का अर्थ दिखावटी स्मरण नहीं, बल्कि निरंतर प्रेमपूर्ण स्मरण है.

धर्म का असली स्वरूप

सच्ची भक्ति व्यक्ति को दूसरों के दुःख से जोड़ती है. वह परहित को ही धर्म मानता है. तुलसीदास जी ने कहा है— “परहित सरिस धरम नहीं भाई, पर पीड़ा सम नहीं अधमाई.” ऐसी भावना वाला व्यक्ति बिना कर्मकांड जाने भी ईश्वर के संरक्षण का अधिकारी बन जाता है. वह हर क्षण ईश्वर से जुड़ा रहता है.

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक विश्वासों पर आधारित है.

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शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.
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