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Home Religion मंगलसूत्र पहनते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना पड़ सकता है असर

मंगलसूत्र पहनते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना पड़ सकता है असर

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मंगलसूत्र पहनते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना पड़ सकता है असर
मंगलसूत्र को पहनने के दौरान ना करें ये गलती

Mangalsutra Mistakes: हिंदू धर्म में मंगलसूत्र को विवाहित स्त्री के सुहाग की सबसे महत्वपूर्ण निशानी माना जाता है. यह केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट संबंध, प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक होता है. शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार, मंगलसूत्र से जुड़े कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है, जिससे वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है.

सही धातु और बनावट का महत्व

मंगलसूत्र हमेशा सोने और काले मोतियों से बना होना चाहिए. मान्यता है कि सोना भगवान शिव का प्रतीक होता है, जबकि काले मोती माता पार्वती का प्रतिनिधित्व करते हैं. इन दोनों का मेल पति-पत्नी के पवित्र बंधन को मजबूत करता है और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है.

किन बातों से करना चाहिए परहेज

कभी भी किसी अन्य पुरुष द्वारा दिया गया मंगलसूत्र नहीं पहनना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है. इसके अलावा अपना मंगलसूत्र किसी और को देना या किसी और का पहना हुआ मंगलसूत्र पहनना भी वर्जित माना गया है. मंगलसूत्र को बार-बार गले से उतारना भी सही नहीं माना जाता, क्योंकि यह वैवाहिक स्थिरता का प्रतीक है.

पहनने और संभालने के नियम

मंगलसूत्र को हमेशा गले में ही धारण करना चाहिए, इसे हाथ की कलाई में पहनना अनुचित माना गया है. शादी का मंगलसूत्र सुहाग की पहली निशानी होता है, इसलिए इसे बार-बार बदलना नहीं चाहिए. यह रिश्ते की निरंतरता और विश्वास का प्रतीक होता है.

शुभ दिन और पूजा का महत्व

मंगलसूत्र खरीदते समय मंगलवार के दिन से बचना चाहिए. नया मंगलसूत्र पहनने से पहले माता पार्वती को समर्पित करना शुभ माना जाता है. करवाचौथ के दिन मंगलसूत्र की विशेष पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है.

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क्यों जरूरी हैं ये नियम

इन सभी नियमों का पालन करने से दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और स्थिरता बनी रहती है. साथ ही यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि को बनाए रखने में भी सहायक माने जाते हैं.

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शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.
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