[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Religion Malmas 2026: नववर्ष में दो महीने रहेगा मलमास, 13 महीनों का होगा साल, जानें पुरुषोत्तम मास का महत्व और नियम

Malmas 2026: नववर्ष में दो महीने रहेगा मलमास, 13 महीनों का होगा साल, जानें पुरुषोत्तम मास का महत्व और नियम

0
Malmas 2026: नववर्ष में दो महीने रहेगा मलमास, 13 महीनों का होगा साल, जानें पुरुषोत्तम मास का महत्व और नियम
नववर्ष 2026 है 13 महीने का साल

मार्कण्डेय शारदेय
(ज्योतिष और धर्मशास्त्र विशेषज्ञ)

Malmas 2026: नववर्ष 2026 धार्मिक दृष्टि से बेहद विशेष रहने वाला है. इस वर्ष जेठ माह में मलमास लगने जा रहा है, जिसे अधिमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. पंचांग के अनुसार यह मलमास 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक रहेगा. इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन और नए व्यवसाय की शुरुआत वर्जित मानी जाती है. मलमास के कारण वर्ष 2026 में 13 महीने होंगे, जो इसे ज्योतिषीय रूप से दुर्लभ बनाता है.

क्या है मलमास और क्यों पड़ता है?

मलमास हमारे प्राचीन खगोलविद और ज्योतिषाचार्यों की अद्भुत खोज है. इसका मूल उद्देश्य चंद्रमास और सौर वर्ष के बीच संतुलन बनाए रखना है. चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिनों का. इस अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर ढाई से तीन वर्ष में एक अधिमास जोड़ा जाता है.

यदि यह व्यवस्था न होती, तो हमारे पर्व-त्योहार अपने मौसम से भटक जाते. कभी होली बरसात में और कभी दिवाली भीषण गर्मी या कड़ाके की ठंड में पड़ती. मलमास के कारण ही भारतीय पर्व अपने प्राकृतिक और मौसमी स्वरूप में बने रहते हैं.

क्यों कहलाता है पुरुषोत्तम मास?

मलमास को सामान्यतः अशुभ माना जाता है, लेकिन शास्त्रों में इसे पुरुषोत्तम मास कहकर विशेष सम्मान दिया गया है. पौराणिक कथा के अनुसार जब मलमास को कोई देवता या ग्रह स्वीकार नहीं कर रहा था, तब वह भगवान विष्णु की शरण में गया. भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम दिया और कहा कि यह मास भक्ति, साधना और पुण्य कर्मों के लिए सर्वोत्तम होगा. तभी से इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा.

पद्म पुराण के अनुसार पुरुषोत्तम मास की महिमा कार्तिक, माघ और वैशाख मास से भी कम नहीं, बल्कि कुछ मामलों में उनसे भी अधिक मानी गई है. इस माह में किया गया एक दिन का भी पुण्य कर्म कई गुना फल देता है.

पुरुषोत्तम मास में क्या करें?

इस मास में विशेष रूप से प्रातः स्नान, भगवान विष्णु की पूजा, नाम-स्मरण, जप, व्रत, दान और कथा श्रवण करना अत्यंत फलदायी माना गया है. विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता पाठ और तुलसी पूजन का विशेष महत्व है.

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस मास में किए गए कर्म नैमित्तिक होते हैं, यानी इनका पालन करना अनिवार्य माना गया है. शास्त्रों में इसकी अवहेलना को गंभीर दोष का कारण बताया गया है.

पुरुषोत्तम मास की अवहेलना का फल

पौराणिक कथाओं में पुरुषोत्तम मास की अवहेलना के दुष्परिणामों का वर्णन मिलता है. दुर्वासा ऋषि और राजा अम्बरीष की कथा इसका उदाहरण है. मान्यता है कि इस मास का तिरस्कार करने से व्यक्ति को आर्थिक कष्ट, रोग, संतान सुख की कमी और मानसिक अशांति का सामना करना पड़ सकता है.

पद्म पुराण में यहां तक कहा गया है कि जो लोग इस मास का सम्मान नहीं करते, वे जन्म-जन्मांतर तक दुर्भाग्य, पराधीनता और संतोषहीन जीवन से ग्रस्त रहते हैं.

कौन से कार्य वर्जित हैं?

मलमास के दौरान विवाह, गृहप्रवेश, भूमि पूजन, नामकरण और नए व्यवसाय की शुरुआत नहीं की जाती. हालांकि दान, व्रत, तप, जप और भक्ति पर कोई रोक नहीं होती, बल्कि इन्हें विशेष फलदायी माना गया है.

क्यों है यह मास विशेष?

वस्तुतः पुरुषोत्तम मास आत्मशुद्धि और भक्ति का काल है. यह हमें भौतिक इच्छाओं से हटकर ईश्वर की ओर उन्मुख करता है. शास्त्रों में कहा गया है कि इस मास का सही पालन करने वाला व्यक्ति जीवन में स्थायी सुख और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है.

Previous article Shilpi Raj New Bhojpuri Song: शिल्पी राज का नया गाना ‘ए मरद दरद बढईलअ’ मचाएगा धूम, सुनीता सिंह के ग्लैमरस लुक ने मचाया शोर
Next article Winter Special Warm Foods: ठंड में शरीर को अंदर से गर्म रखने वाले ये खास फूड्स जरूर करें डाइट में शामिल
Avatar Of Shaurya Punj
शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel