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Home Religion महेश नवमी 2026: माहेश्वरी समाज के उदय की कहानी, जानें शिव-पार्वती से जुड़ी पौराणिक मान्यता

महेश नवमी 2026: माहेश्वरी समाज के उदय की कहानी, जानें शिव-पार्वती से जुड़ी पौराणिक मान्यता

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महेश नवमी 2026: माहेश्वरी समाज के उदय की कहानी, जानें शिव-पार्वती से जुड़ी पौराणिक मान्यता
महेश नवमी 2026

Mahesh Navami 2026: ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाने वाला महेश नवमी का पर्व माहेश्वरी समाज का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव माना जाता है. आज 23 जून 2026 ये त्योहार मनाया जाएगा. यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन माहेश्वरी समाज की स्थापना हुई थी. इसलिए यह पर्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि समाज की पहचान और इतिहास से भी जुड़ा हुआ है. देशभर में माहेश्वरी समाज के लोग इस दिन विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं.

राजा खडगलसेन की चिंता और पुत्र प्राप्ति का वरदान

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में राजा खडगलसेन का राज्य समृद्ध और सुखी था. उनकी प्रजा भी प्रसन्न थी और राज्य व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही थी. लेकिन राजा के जीवन में एक बड़ी चिंता थी. उनके कोई संतान नहीं थी, जिससे राज्य के उत्तराधिकारी को लेकर चिंता बनी हुई थी.

राजा ने अपने कुलगुरु की सलाह पर पुत्र कामेष्टि यज्ञ का आयोजन कराया. यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद ऋषियों ने उन्हें वीर और पराक्रमी पुत्र होने का आशीर्वाद दिया. साथ ही यह चेतावनी भी दी कि राजकुमार को बीस वर्ष की आयु तक उत्तर दिशा में नहीं जाने देना चाहिए.

राजकुमार सुजान कुंवर को मिला ऋषियों का शाप

कुछ समय बाद राजा के घर पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम सुजान कुंवर रखा गया. जब राजकुमार युवा हुए तो एक दिन वे बहत्तर उमरावों के साथ शिकार खेलने वन में गए. घूमते-घूमते वे उत्तर दिशा की ओर बढ़ने लगे. साथियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने किसी की बात नहीं मानी.

उत्तर दिशा में सूर्यकुंड के समीप कुछ ऋषि यज्ञ कर रहे थे. वहां पहुंचकर राजकुमार ने अनजाने में ऋषियों का अपमान कर दिया और यज्ञ में विघ्न उत्पन्न कर दिया. इससे क्रोधित होकर ऋषियों ने राजकुमार और उनके साथ गए बहत्तर उमरावों को पाषाण मूर्ति बनने का शाप दे दिया.

चंद्रावती की तपस्या से प्रसन्न हुए शिव-पार्वती

जब यह समाचार राजा और रानी तक पहुंचा तो वे अत्यंत दुखी हुए और प्राण त्याग दिए. दूसरी ओर राजकुमार की पत्नी चंद्रावती सभी उमरावों की पत्नियों के साथ ऋषियों के पास पहुंचीं और क्षमा याचना की. ऋषियों ने कहा कि उनका शाप वापस नहीं हो सकता, लेकिन भगवान शिव और माता पार्वती ही उन्हें इस संकट से मुक्त कर सकते हैं.

इसके बाद चंद्रावती और अन्य महिलाओं ने कठोर तपस्या कर शिव-पार्वती की आराधना की. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव और माता पार्वती प्रकट हुए तथा उन्हें अखंड सौभाग्य और पुत्रवती होने का आशीर्वाद दिया.

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ऐसे हुई माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति

चंद्रावती के अनुरोध पर भगवान शिव और माता पार्वती ने राजकुमार तथा बहत्तर उमरावों को शापमुक्त कर पुनः जीवित कर दिया. साथ ही भगवान शिव ने इस समाज को अपना नाम प्रदान किया. ‘महेश’ अर्थात भगवान शिव और ‘वारी’ अर्थात समुदाय. इसी से ‘माहेश्वरी’ नाम की उत्पत्ति मानी जाती है.

भगवान शिव की आज्ञा से इस समाज के पूर्वजों ने क्षत्रिय कर्म का त्याग कर वैश्य कर्म को अपनाया. यही कारण है कि वर्तमान में माहेश्वरी समाज वैश्य समुदाय के रूप में जाना जाता है. समाज के 72 गोत्रों की परंपरा भी इसी कथा से जुड़ी मानी जाती है.

महेश नवमी पर पूजा का विशेष महत्व

महेश नवमी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन श्रद्धालु रुद्राभिषेक, शिव चालीसा पाठ और दान-पुण्य के कार्य करते हैं. माना जाता है कि सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है.

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शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.
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