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Home Religion मिथिला में आज भी सभी लड़कियों की एक जैसी चाहत, महादेव की तरह मिले मेरा पति

मिथिला में आज भी सभी लड़कियों की एक जैसी चाहत, महादेव की तरह मिले मेरा पति

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मिथिला में आज भी सभी लड़कियों की एक जैसी चाहत, महादेव की तरह मिले मेरा पति
मिथिला की परंपरा

Mahashivratri 2026: मिथिला में एक दामाद के रूप में महादेव का स्थान सदा सर्वोपरी रहा है. 18वीं सदी में राम जरुर मिथिला में प्रचारित किये गये, लेकिन राम गीतों तक ही आज भी सिमित है. लोकाचार या व्यवहार में महादेव ही मिथिला में समाहित हैं. आज भी दूल्हे के आगे आगे शंकर चलता है. लडकी के आंगन में शंकर के आने की सूचना ही विवाह की शुरुआत मानी जाती है.

कोहबर में शिव-गौरी की तस्वीर उकेरी जाती है

कुमुद सिंह ने बताया कि कोहबर में शिव-गौरी की तस्वीर उकेरी जाती है. कोहबर में गौरी पूजा जाता है. और रहे भी क्यों ना, गौरी को वो सारा सुख मिला, जो एक महिला की चाहत होती है. गौरी के जीवन में दुख जैसा शब्द महादेव ने कभी आने ही नहीं दिया. महादेव ने पति के हर दायित्व को ऐसे निभाया कि वो पति के मानक बन गये. गौरी से ताकतवर पत्नी दूसरी नहीं हुई, जिस महादेव के गुस्से से तीनों लोक कांप जाता है, वो महादेव महज गौरी के रूठ जाने से परेशान हो जाते हैं. यह दापत्य का स्नेह है, जो गौरी को मिला.

मिथिला में वर का मतलब महादेव

महादेव से अधिक नारी सम्मान देने वाला दूसरा पति नहीं है. महादेव से अधिक नारी सशक्तिकरण किसी दूसरे ईश्वर ने नहीं किया. आदर्श परिवार किसे कहते हैं, वो महादेव के परिवार को देखकर ही समझा जा सकता है. आज भी जब मिथिला में कोई पिता अपनी बेटी के लिए वर खोजता है, तो वो महादेव खोजता है, न कि विष्णु खोजता है.

मिथिला की लड़कियों की चाहत, महादेव सा पति

कुमुद सिंह बताती हैं कि वसंत पंचमी के दिन जब मिथिला के लोग कैलाश (शिवालय) जाकर महादेव को गौरी से विवाह का निमंत्रण देते हैं, तो दल का हर सदस्य बेटी का पिता होता है और उसके लिए जीवन का सबसे अनमोल वरदान महादेव को दामाद के रूप में निमंत्रित करने का सुअवसर होता है. आज भी मिथिला की हर बेटी यही कामना करती है कि पति हो तो महादेव सा, वर्ना जीवन व्यर्थ है.

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