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Home Religion कल खत्म हो रहा खरमास, शुरू होंगे शुभ कार्य, गूंजेंगी शादी की शहनाइयां

कल खत्म हो रहा खरमास, शुरू होंगे शुभ कार्य, गूंजेंगी शादी की शहनाइयां

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कल खत्म हो रहा खरमास, शुरू होंगे शुभ कार्य, गूंजेंगी शादी की शहनाइयां
रथ पर सवार सूर्य देव (एआई निर्मित तस्वीर)

Kharmas 2026: हिंदू धर्म में खरमास को अशुभ अवधि माना गया है. यह लगभग एक महीने तक चलता है. इस दौरान सभी प्रकार के मांगलिक कार्य, जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, व्यवसाय की शुरुआत और जनेऊ समेत अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव देवगुरु बृहस्पति की राशि में गोचर करते हैं, तब खरमास लगता है.

सूर्य देव करेंगे मेष राशि में गोचर

14 अप्रैल 2026 को सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे ‘मेष संक्रांति’ कहा जाता है. इसी के साथ खरमास का समापन हो जाएगा और देशभर में एक बार फिर शादियों की धूम शुरू हो जाएगी. साथ ही सभी प्रकार के मांगलिक कार्य दोबारा शुरू हो जाएंगे.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, खरमास के दौरान सूर्य की स्थिति कमजोर मानी जाती है. सूर्य को जीवन का आधार माना गया है. कहा जाता है कि जब सूर्य कमजोर रहता है, तब उस समय किए गए कार्यों पर अशुभ प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण इस समय शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं. लेकिन 14 अप्रैल की शाम को खरमास समाप्त होते ही 15 अप्रैल 2026 से सभी रुके हुए मांगलिक कार्य पूरे उत्साह के साथ शुरू किए जा सकेंगे.

विवाह के शुभ मुहूर्त की तिथियां

अप्रैल: 15, 20, 29
मई: 1, 4, 11, 13, 14
जून: 17, 24, 25, 27
जुलाई: 1, 2, 4, 15

पौराणिक कथा

भगवान सूर्य हमेशा अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड का चक्कर लगाते हैं, क्योंकि यदि वे रुक जाएं तो पूरी दुनिया थम जाएगी. लेकिन लगातार दौड़ते रहने की वजह से एक बार उनके घोड़े प्यास और थकान से बहुत व्याकुल हो गए. घोड़ों की हालत देखकर सूर्य देव का हृदय पिघल गया और उन्होंने उन्हें आराम देने का निर्णय लिया. वे रथ को एक तालाब के पास ले गए, लेकिन समस्या यह थी कि रथ को बिना किसी चालक के छोड़ा नहीं जा सकता था.

तभी उन्हें वहां दो गधे (खर) दिखाई दिए. सूर्य देव ने अपने घोड़ों को पानी पीने के लिए छोड़ दिया और उनकी जगह रथ में उन गधों को जोड़ दिया. गधे भला घोड़ों की गति का मुकाबला कैसे करते? इस वजह से रथ की गति धीमी हो गई और सूर्य का तेज भी कम हो गया.

गधों द्वारा रथ खींचे जाने के कारण ही इस एक महीने की अवधि को ‘खरमास’ कहा जाने लगा. जब एक महीने बाद घोड़ों की थकान दूर हो गई और वे वापस रथ में लौटे, तब सूर्य की गति फिर से तेज हुई और खरमास समाप्त हो गया.

यह भी पढ़ें: Kharmas 2026: आखिर क्यों लगता है खरमास? पौराणिक कथाओं में छिपा है इसका रहस्य

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वे धर्म, ज्योतिष, राशिफल, व्रत-त्योहार, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं. उनकी विशेष रुचि धार्मिक परंपराओं, ज्योतिषीय विश्लेषण और दैनिक राशिफल को सरल, सटीक और पाठक-हितैषी भाषा में प्रस्तुत करने में है. नेहा का उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धर्म, संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों को आसानी से समझ सकें. उनकी लेखन शैली शोध-आधारित, सरल और स्पष्ट है, जो जटिल विषयों को भी सहज और रोचक बना देती है. वे राशिफल, ग्रह-गोचर, व्रत-त्योहार, धार्मिक मान्यताओं, वास्तु, पौराणिक प्रसंगों और भारतीय रीति-रिवाजों से संबंधित विषयों पर नियमित रूप से लेख लिखती हैं. डिजिटल पत्रकारिता में उनकी रुचि पाठकों की जरूरतों को समझते हुए जानकारीपूर्ण, SEO-अनुकूल और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में है.
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