[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Religion महिलाएं बाएं हाथ में क्यों बांधती हैं कलावा, क्या हैं इसे पहनने के नियम

महिलाएं बाएं हाथ में क्यों बांधती हैं कलावा, क्या हैं इसे पहनने के नियम

0
महिलाएं बाएं हाथ में क्यों बांधती हैं कलावा, क्या हैं इसे पहनने के नियम
Kalawa Rules

Kalawa Rules: कलावा, जिसे मौली के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण है. इसे पूजा-पाठ के समय हाथ में बांधने की परंपरा है. इसे एक पवित्र धागा माना जाता है. कलावा आमतौर पर लाल और पीले रंग के धागों से निर्मित होता है. इसे देवताओं की कृपा, सुरक्षा और शुभता का प्रतीक माना जाता है.

केवल विवाहित महिलाओं के लिए रक्षा सूत्र बायें हाथ में बांधा जाता है, जबकि अन्य सभी व्यक्तियों, जैसे पुरुष, कन्याएं, अविवाहित महिलाएं या जिनके जीवन साथी का निधन हो चुका है, के लिए यह दाएं हाथ में बांधा जाता है.

योगसूत्र और आयुर्वेद के अनुसार, मानव शरीर में 72 हजार नाड़ियां (सूक्ष्म धमनियां) होती हैं, और महिलाओं के दाएं हाथ की नाड़ी गर्भावस्था पर प्रभाव डाल सकती है. दाएं हाथ की नाड़ी पर विशेष दबाव डालने से गर्भस्थ शिशु और मां दोनों को नुकसान हो सकता है. इस कारण विवाहित महिलाओं के स्वास्थ्य और गर्भधारण की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उनके बाएं हाथ में कलावा या रक्षा सूत्र नहीं बांधा जाता है.

झारखंड का सबसे भव्य राधा कृष्ण मंदिर आम जनता के लिए खुला, दिखेगी खूबसूरत कांच की कलाकारी

Mahakumbh Mela 2025: महाकुंभ में किस घाट पर नहाने का है सबसे अधिक महत्व

प्राचीन काल में रक्षा सूत्र बांधने के लिए विशेष प्रशिक्षण और अभ्यास को अत्यधिक महत्व दिया जाता था, क्योंकि इसका धार्मिक महत्व के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका होती थी.

विशिष्ट स्थान पर विशेष तरीके से गांठ बांधने से व्यक्ति की स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, आवश्यकता और शरीर की प्रकृति पर प्रभाव डाला जा सकता है.

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में कलाई की नाड़ी का परीक्षण और उसे संतुलित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है. रक्षा सूत्र भी कलाई की उसी नाड़ी पर बांधा जाता है, जिस नाड़ी का परीक्षण वैद्य या नाड़ी चिकित्सक कलाई के विशेष बिंदु पर करते हैं.

Previous article Chanakya Niti: पैसे गिनते-गिनते थक जाएंगे आप, चाणक्य नीति में बताई गयी इन बातों का रखें ख्याल
Next article Video: मंईयां सम्मान के 2500 रुपए से मोबाईल रीचार्ज और शॉपिंग समेत क्या हैं महिलाओं के प्लान
Avatar Of Shaurya Punj
शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel