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Home Religion कालाष्टमी कब है? नोट करें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

कालाष्टमी कब है? नोट करें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

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कालाष्टमी कब है? नोट करें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
कालाष्टमी 2026 (एआई द्वारा निर्मित तस्वीर)

Kalashtami 2026: कालाष्टमी हिंदू धर्म का एक विशेष पर्व है. इस दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप कालभैरव की पूजा की जाती है. कालाष्टमी हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. मान्यता है कि भगवान कालभैरव की आराधना से डर-भय का नाश होता है, आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और जीवन के संकट व बाधाएं दूर होती हैं.

कालाष्टमी तिथि

कालाष्टमी 09 फरवरी 2026, सोमवार के दिन मनाई जाएगी.

  • कालाष्टमी तिथि प्रारंभ — 08 फरवरी 2026, शाम 5 बजकर 19 मिनट पर
  • कालाष्टमी तिथि समाप्त — 10 फरवरी 2026, सुबह 7 बजकर 15 मिनट पर

कालाष्टमी पूजा शुभ मुहूर्त

  • कालाष्टमी पूजा का शुभ समय — 9 फरवरी को सुबह 06:29 से 07:53 तक रहेगा.
  • अभिजीत मुहूर्त — 9 फरवरी को सुबह 11:41 से दोपहर 12:26 तक.

व्रत पारण का शुभ मुहूर्त

  • कालाष्टमी व्रत पारण — 10 फरवरी को सुबह 09:16 से दोपहर 12:04 तक.

कालाष्टमी पूजा विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
  • व्रत का संकल्प: हाथ में जल लेकर भगवान शिव और कालभैरव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें.
  • मंदिर दर्शन: यदि संभव हो तो कालभैरव मंदिर जाए, अन्यथा घर पर भी पूजा कर सकते हैं.
  • चौकी स्थापना: एक चौकी लें, उस पर साफ लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएँ और उस पर भैरव बाबा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें.
  • दीपक: भगवान भैरव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
  • विशेष अर्पण: भगवान भैरव को नींबू, काले तिल, उड़द की दाल और सरसों का तेल अर्पित करें.
  • भोग: भगवान को काले चने, हलवा, खीर और पूए का भोग लगाएं.
  • मंत्र जाप: पूजा के दौरान “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें.
  • आरती: अंत में भगवान की आरती कर पूजा समाप्त करें.

महत्व

धार्मिक मान्यता है कि कालाष्टमी का व्रत रखने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है, नकारात्मकता दूर होती है, तंत्र-मंत्र या बुरी नजर का प्रभाव कम होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. इसके अलावा कुंडली में राहु-केतु और शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए भी कालभैरव की उपासना की जाती है.

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वे धर्म, ज्योतिष, राशिफल, व्रत-त्योहार, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं. उनकी विशेष रुचि धार्मिक परंपराओं, ज्योतिषीय विश्लेषण और दैनिक राशिफल को सरल, सटीक और पाठक-हितैषी भाषा में प्रस्तुत करने में है. नेहा का उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धर्म, संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों को आसानी से समझ सकें. उनकी लेखन शैली शोध-आधारित, सरल और स्पष्ट है, जो जटिल विषयों को भी सहज और रोचक बना देती है. वे राशिफल, ग्रह-गोचर, व्रत-त्योहार, धार्मिक मान्यताओं, वास्तु, पौराणिक प्रसंगों और भारतीय रीति-रिवाजों से संबंधित विषयों पर नियमित रूप से लेख लिखती हैं. डिजिटल पत्रकारिता में उनकी रुचि पाठकों की जरूरतों को समझते हुए जानकारीपूर्ण, SEO-अनुकूल और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में है.
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