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Home Religion हिंदू धर्म में पेड़ों पर कलावा क्यों बांधा जाता है? जानें इसके पीछे का धार्मिक रहस्य

हिंदू धर्म में पेड़ों पर कलावा क्यों बांधा जाता है? जानें इसके पीछे का धार्मिक रहस्य

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हिंदू धर्म में पेड़ों पर कलावा क्यों बांधा जाता है? जानें इसके पीछे का धार्मिक रहस्य
पेड़ पर कलावा बांधते हुए श्रद्धालु

Hindu Ritual: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान कलावा (मौली) बांधने की परंपरा सदियों पुरानी है. अक्सर हम देखते हैं कि लोग न केवल अपनी कलाई पर, बल्कि कई पवित्र पेड़ों पर भी कलावा बांधते हैं. यह केवल एक धागा नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, सुरक्षा और संकल्प का प्रतीक है. 

किन-किन पेड़ों और पौधों पर कलावा बांधा जाता है?

हिंदू धर्म में माना जाता है कि कुछ पेड़ और पौधे, जैसे- पीपल, बरगद और तुलसी में स्वयं भगवान का वास होता है. ऐसे में इनकी आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

पीपल: मान्यता है कि पीपल के पेड़ में तैंतीस कोटि देवी-देवताओं का वास होता है. ऐसे में इसकी पूजा कर इस पर कलावा बांधने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

बरगद (वट):  वट वृक्ष को लंबी आयु और अमरता का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस पेड़ में त्रिदेव, यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है. माताएं और पत्नियां अपने परिवार की लंबी उम्र के लिए इसके चारों ओर कलावा लपेटती हैं.

तुलसी: तुलसी में मां लक्ष्मी का वास माना जाता है. यहां कलावा बांधना घर में सुख-समृद्धि और धन के आगमन का संकेत माना जाता है.

कलावा क्यों बांधा जाता है?

संकल्प और मनोकामना की पूर्ति: पेड़ पर कलावा बांधना एक प्रकार का ‘मानसिक संकल्प’ होता है. जब भक्त अपनी किसी विशेष इच्छा के लिए प्रार्थना करते हैं, तो वे साक्ष्य के रूप में कलावा बांधते हैं. मान्यता है कि जब तक वह धागा वहां रहता है, आपकी प्रार्थना ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ी रहती है.

रक्षा सूत्र: कलावे को ‘रक्षा सूत्र’ भी कहा जाता है. मान्यता है कि जिस तरह कलाई पर बंधा कलावा व्यक्ति की रक्षा करता है, उसी तरह पेड़ों पर इसे बांधना प्रकृति और मनुष्य के बीच एक सुरक्षा कवच तैयार करता है. यह नकारात्मक ऊर्जा को सोखने और सकारात्मकता का संचार करने का माध्यम माना जाता है.

कलावा बांधते समय ध्यान रखने योग्य बातें:

  • शुद्धता: हमेशा पेड़ों पर स्नान करने के बाद ही कलावा बांधें.
  • परिक्रमा: कलावा बांधते समय पेड़ की 3, 5 या 7 बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है.

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वे धर्म, ज्योतिष, राशिफल, व्रत-त्योहार, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं. उनकी विशेष रुचि धार्मिक परंपराओं, ज्योतिषीय विश्लेषण और दैनिक राशिफल को सरल, सटीक और पाठक-हितैषी भाषा में प्रस्तुत करने में है. नेहा का उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धर्म, संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों को आसानी से समझ सकें. उनकी लेखन शैली शोध-आधारित, सरल और स्पष्ट है, जो जटिल विषयों को भी सहज और रोचक बना देती है. वे राशिफल, ग्रह-गोचर, व्रत-त्योहार, धार्मिक मान्यताओं, वास्तु, पौराणिक प्रसंगों और भारतीय रीति-रिवाजों से संबंधित विषयों पर नियमित रूप से लेख लिखती हैं. डिजिटल पत्रकारिता में उनकी रुचि पाठकों की जरूरतों को समझते हुए जानकारीपूर्ण, SEO-अनुकूल और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में है.
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