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Home Religion हापामुनी महामाया मंदिर: झारखंड का 1100 वर्ष पुराना पवित्र स्थल, जहां देख नहीं सकते मां की प्रतिमा

हापामुनी महामाया मंदिर: झारखंड का 1100 वर्ष पुराना पवित्र स्थल, जहां देख नहीं सकते मां की प्रतिमा

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हापामुनी महामाया मंदिर: झारखंड का 1100 वर्ष पुराना पवित्र स्थल, जहां देख नहीं सकते मां की प्रतिमा
हापामुनी महामाया मंदिर, गुमला

Hapamuni Mahamaya Temple: हापामुनी मंदिर मां महामाया का अत्यंत प्राचीन और पवित्र मंदिर माना जाता है. लोहरदगा मार्ग पर स्थित यह मंदिर प्राकृतिक हरियाली और शांत वातावरण के बीच श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अद्भुत अनुभव कराता है. यहां आने वाले भक्त मां महामाया के चरणों में अपनी मनोकामनाएं अर्पित करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं.

905 ईस्वी में हुआ था मंदिर का निर्माण

हापामुनी महामाया मंदिर का निर्माण वर्ष 908 ईस्वी में नागवंशी शासक गजघंट राय द्वारा कराया गया था. बाद में वर्ष 1391 ईस्वी में राजा मोहन राय के पुत्र राजा शिवदास ने मंदिर परिसर में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित कराई. यह मंदिर गुमला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और झारखंड की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है.

आग पर नंगे पांव चलकर निभाई जाती है आस्था

हापामुनी मंदिर में रामनवमी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है. इसके अगले दिन से प्रसिद्ध मंडा पूजा की शुरुआत होती है, जिसमें विशाल मेले का आयोजन भी किया जाता है. इस अनूठी परंपरा के दौरान श्रद्धालु नंगे पांव जलते अंगारों पर चलकर अपनी श्रद्धा और विश्वास का परिचय देते हैं. इस धार्मिक आयोजन में दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं.

क्यों ढंककर रखी जाती है मां महामाया की मूर्ति?

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मां महामाया की प्रतिमा सदैव वस्त्र से ढंककर रखी जाती है. ऐसी लोकमान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति मां की प्रतिमा को खुले नेत्रों से देख ले, तो उसकी दृष्टि चली जाती है. इसी कारण मंदिर के पुजारी भी जब मां का वस्त्र बदलते हैं, तो अपनी आंखों पर काली पट्टी बांध लेते हैं. हालांकि इस मान्यता और मंदिर की स्थापना को लेकर समय-समय पर अलग-अलग मत भी सामने आते रहे हैं.

मां महामाया की आज्ञा और चमत्कारिक कथा

हापामुनी मंदिर का इतिहास लरका आंदोलन से भी जुड़ा हुआ माना जाता है. जनश्रुति के अनुसार, जब बरजू राम मंदिर में मां महामाया की पूजा कर रहे थे, तभी बाहरी आक्रमणकारियों ने गांव पर हमला कर उनकी पत्नी और बच्चे की हत्या कर दी. यह दुखद समाचार उनके सहयोगी राधो राम ने उन्हें दिया. इसका बदला लेने के लिए कहानी के अनुसार राधो राम ने अकेले ही आक्रमणकारियों का सामना किया. युद्ध के दौरान मां ने उन्हें चेतावनी दी कि यदि वे पीछे मुड़कर देखेंगे तो उनका सिर धड़ से अलग हो जाएगा. राधो राम वीरतापूर्वक लड़ते रहे, लेकिन जैसे ही उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, उनका सिर धड़ से अलग हो गया. आज भी जिस स्थान पर राधो राम पूजा किया करते थे, वहां उनका और बरजू राम का समाधि स्थल मौजूद है, जिसे श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं.

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खपड़े का मुख्य मंदिर और अनेक देवी-देवताओं की प्रतिमाएं

हापामुनी का मुख्य मंदिर आज भी पारंपरिक खपड़े (टाइल) की संरचना में सुरक्षित है. मंदिर परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थल एक महत्वपूर्ण तांत्रिक पीठ भी माना जाता है, जहां साधना और शक्ति उपासना का विशेष महत्व है.

झारखंड की आध्यात्मिक विरासत का अनमोल केंद्र

हापामुनी महामाया मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान का जीवंत प्रतीक है. प्राचीन इतिहास, रहस्यमयी मान्यताएं, लोककथाएं और अनूठी धार्मिक परंपराएं इस मंदिर को देशभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनाती हैं. यहां पहुंचकर भक्त मां महामाया की दिव्य उपस्थिति और अलौकिक शांति का अनुभव करते हैं.

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शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.
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