[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Religion Guru Ravidas Jayanti 2026: संत रविदास हैं ज्ञान, प्रेम और समानता के प्रतीक

Guru Ravidas Jayanti 2026: संत रविदास हैं ज्ञान, प्रेम और समानता के प्रतीक

0
Guru Ravidas Jayanti 2026: संत रविदास हैं ज्ञान, प्रेम और समानता के प्रतीक
संत रविदास का जीवन परिचय

कृष्ण प्रसाद सिंह
(फैजाबाद, अयोध्या)

Guru Ravidas Jayanti 2026:संत रविदास को भले ही लोग रैदास, रोहिदास, रेमदास या रौदास के नाम से जानते हों, लेकिन उनके जीवन का मुख्य परिचय उनके संतत्व और भक्ति से जुड़ा है. वे भक्ति और ज्ञान के उस मार्ग के अग्रदूत थे, जो निराकार ईश्वर में विश्वास करता है, जाति और कर्मकांड को नकारता है और मन की पवित्रता, प्रेम और गुरु की महत्ता को सबसे ऊपर मानता है.

संत रविदास का जन्म और परिवार

संत रविदास का जन्म विक्रम संवत 1441 से 1455 के बीच किसी रविवार को हुआ माना जाता है. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में मंडेसर तालाब के पास मांडव ऋषि के आश्रम के पास मांडुर गांव में हुआ था. यह गांव अब मंडुआडीह के नाम से जाना जाता है.

उनके पिता को संतोषदास, रग्धू या राघव कहा जाता था, जबकि माता का नाम कलसां या करमा था. जीवनसंगिनी लोना थीं. रविदास के कई नाम प्रचलित हैं—रैदास, रविदास, रोहिदास, रडदास, रायादास, रेदास, रेमदास और रौदास. इन सभी नामों में उनका संत का परिचय सबसे ऊपर है, जिसे खुद संत कबीर ने मान्यता दी थी. कबीर ने उन्हें “संतन में अग्रणी” कहा और कुछ विद्वान उन्हें कबीर का आध्यात्मिक शिष्य भी मानते हैं.

गुरु और भक्ति का महत्व

रविदास का जीवन गुरु भक्ति और ईश्वर प्रेम से भरा रहा. वे मानते थे कि ईश्वर तक पहुँचने का सबसे सही मार्ग गुरु के माध्यम से ही संभव है. उनके अनुसार, “परम परस गुरु भेटिए, पूरब लिखत लिलाट. उन मन मन मन ही मिले छुटकत बजर कपाट.” अर्थात गुरु ही हमारे लिए वज्र के दरवाजे खोल सकता है और उसके बिना ईश्वर से मिलना संभव नहीं.

संत रविदास का मानना था कि मन की पवित्रता सबसे जरूरी है. उन्होंने कहा, “मन चंगा तो कठौती में गंगा.” इसका मतलब यह है कि अगर मन शुद्ध है तो हर जगह ईश्वर का वास महसूस होता है.

प्रेम और निष्कपटता

रविदास के लिए प्रेम सर्वथा निःस्वार्थ और निर्मल होना चाहिए. उन्होंने इसे बड़े सरल शब्दों में समझाया:
“रैदास प्रेम नहिं छिप सकड़, लाख छिपाए कोय. प्रेम न मुख खोले कभऊं, नैन देत हैं रोय.”
इसका अर्थ है कि सच्चा प्रेम कभी छिपाया नहीं जा सकता और इसे दिल से महसूस किया जाता है.

उनके भजनों और दोहों में ज्ञान, प्रेम, सरलता और व्यावहारिकता सभी मौजूद हैं. उनके चालीस से अधिक पद सिखों के गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल किए गए हैं.

रविदासिया धर्म और सिख धर्म से जुड़ाव

संत रविदास की शिक्षाओं से रविदासिया धर्म का विकास हुआ, जो अपनी एकेश्वरवादी, मानवतावादी और समतावादी सोच के लिए जाना जाता है. 2009 के बाद यह धर्म एक अलग पंथ के रूप में उभरा. रविदासिया अनुयायी अपनी मान्यताएं हिंदू और सिख धर्म दोनों से साझा करते हैं. वे अपने गुरु के रूप में रविदास को सर्वोच्च मानते हैं और उनकी शिक्षाओं को सर्वोपरि मानकर जीवन में अपनाते हैं. उनका विश्वास है कि सभी का ईश्वर एक है और मानवता में समानता सर्वोपरि है.

ये भी पढ़ें: रविदास जयंती आज, संत शिरोमणि के विचारों को याद करने का पावन दिन

ज्ञान और शिक्षा की भूमिका

संत रविदास का जीवन ज्ञानाश्रयी था. उनके पदों और भजनों में न केवल भक्ति और प्रेम है, बल्कि लोगों को जीवन में सही मार्ग अपनाने और समाज में सुधार करने की सीख भी मिलती है. उन्होंने जाति, कर्मकांड और मूर्तिपूजा का विरोध करते हुए सरल और व्यावहारिक जीवन जीने की प्रेरणा दी. उनकी शिक्षाओं का प्रभाव न केवल धर्म और भक्ति तक सीमित रहा, बल्कि सामाजिक समानता और मानवता के संदेश के रूप में भी फैला. उनके भजनों और दोहों ने लोगों को निष्कपट प्रेम, ज्ञान और आंतरिक शांति का मार्ग दिखाया.

संत रविदास का जीवन आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उन्होंने सिखाया कि ईश्वर तक पहुँचने के लिए सच्चा गुरु, निर्मल मन और निष्कपट प्रेम जरूरी हैं. उनका संदेश जाति, धर्म या सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर समानता और मानवता को महत्व देता है. आज उनके अनुयायी उनके मार्ग का अनुसरण करते हैं, उनकी शिक्षाओं को फैलाते हैं और समाज में समानता, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देते हैं. संत रविदास न केवल एक महान संत थे, बल्कि एक ऐसे समाजदर्शी भी थे, जिन्होंने भक्ति, ज्ञान और मानवता को जीवन का मूल आधार बनाया.

Previous article Anupama Twist: भूत बनकर लौटी अनुपमा, रजनी के पापों का हुआ खुलासा, अनु की चाल ने पलट दी पूरी बाजी
Next article Tribal Mahakumbh: राजमहल की उत्तर वाहिनी गंगा में लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, मरांग बुरू का जलाभिषेक
Avatar Of Shaurya Punj
शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel