[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Religion गरुड़ पुराण: किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद क्यों की जाती है 13वीं? जानें यमलोक तक आत्मा की यात्रा का रहस्य 

गरुड़ पुराण: किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद क्यों की जाती है 13वीं? जानें यमलोक तक आत्मा की यात्रा का रहस्य 

0
गरुड़ पुराण: किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद क्यों की जाती है 13वीं? जानें यमलोक तक आत्मा की यात्रा का रहस्य 
गरुड़ पुराण सांकेतिक तस्वीर (एआई)

Garud Puran: हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक 16 संस्कारों का विधान है, जिनमें अंतिम संस्कार (अंत्येष्टि) को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. अक्सर आपने देखा होगा कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद परिवार में 13 दिनों तक शोक मनाया जाता है. 13वें दिन ‘तेरहवीं’ की रस्म तथा मृत्युभोज का आयोजन किया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह रस्म ठीक 13वें दिन ही क्यों की जाती है? गरुड़ पुराण में इस विषय का विस्तार से वर्णन मिलता है. आइए जानते हैं कि मृत्यु के बाद इन 13 दिनों के दौरान आत्मा के साथ क्या-क्या होता है.

13 दिनों तक घर में रहती है आत्मा

गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी मनुष्य के प्राण निकलते हैं, तो यमराज के दूत उसकी आत्मा को यमलोक ले जाते हैं. वहां जीवात्मा को उसके पूरे जीवन के अच्छे और बुरे कर्मों का लेखा-जोखा दिखाया जाता है. इसके बाद यमदूत आत्मा को वापस उसी घर में छोड़ देते हैं, जहां उसने अंतिम सांस ली थी.

शास्त्रों के अनुसार, आत्मा तुरंत दूसरा जन्म नहीं लेती. मोह के कारण वह अगले 13 दिनों तक अपने परिजनों के बीच रहती है, लेकिन उसकी आवाज़ कोई सुन नहीं पाता. इस दौरान आत्मा अत्यंत कमजोर और अंगहीन होती है. इसलिए शुरुआती दिनों में किए जाने वाले कर्मकांडों को आवश्यक बताया गया है.

  • 1 से 10वां दिन: इस अवधि में परिवार द्वारा किए जाने वाले दैनिक पिंडदान और तर्पण से मृत आत्मा के नए ‘सूक्ष्म शरीर’ के अंगों का निर्माण होता है.
  • 11वां और 12वां दिन: इन दिनों किए जाने वाले संचयन तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों से आत्मा के सूक्ष्म शरीर पर मांस और त्वचा का निर्माण होता है.
  • 13वां दिन (तेरहवीं): तेरहवीं के दिन किए जाने वाले विशेष पिंडदान से आत्मा को ‘पाथेय’ (यात्रा के लिए बल और भोजन) प्राप्त होता है, जिससे वह यमलोक की यात्रा शुरू करती है.

यमलोक पहुंचने में लगता है एक वर्ष

गरुड़ पुराण के अनुसार, पृथ्वी लोक से यमलोक तक पहुंचने के लिए आत्मा को लगभग 86,000 योजन की दूरी तय करनी पड़ती है, जिसमें करीब एक वर्ष का समय लगता है. मान्यता है कि तेरहवीं के दिन किया गया पिंडदान और दान-पुण्य इस पूरी यात्रा के दौरान आत्मा के भोजन और जल का आधार बनता है. वहीं, यदि तेरहवीं और अन्य आवश्यक कर्मकांड न किए जाएं, तो आत्मा को यमलोक की यात्रा में अनेक कष्ट उठाने पड़ते हैं.

यह भी पढ़ें: Garud Puran : स्त्रियों के लिए गरुड़ पुराण में बताए गए खास कर्म, जानिए फल

Previous article जहानाबाद के नोआवां स्लुइसगेट से शटर चोरी, किसानों की सिंचाई ठप, विभाग पर लापरवाही का आरोप
Next article बिहार के 17 जिलों के यात्रियों के लिए खुशखबरी, इन राज्यों के लिए चलेंगी 119 नई बसें
Avatar Of Neha Kumari
नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वे धर्म, ज्योतिष, राशिफल, व्रत-त्योहार, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं. उनकी विशेष रुचि धार्मिक परंपराओं, ज्योतिषीय विश्लेषण और दैनिक राशिफल को सरल, सटीक और पाठक-हितैषी भाषा में प्रस्तुत करने में है. नेहा का उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धर्म, संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों को आसानी से समझ सकें. उनकी लेखन शैली शोध-आधारित, सरल और स्पष्ट है, जो जटिल विषयों को भी सहज और रोचक बना देती है. वे राशिफल, ग्रह-गोचर, व्रत-त्योहार, धार्मिक मान्यताओं, वास्तु, पौराणिक प्रसंगों और भारतीय रीति-रिवाजों से संबंधित विषयों पर नियमित रूप से लेख लिखती हैं. डिजिटल पत्रकारिता में उनकी रुचि पाठकों की जरूरतों को समझते हुए जानकारीपूर्ण, SEO-अनुकूल और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel