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Home Religion कुंडली में शनि-मंगल-राहु की यह स्थिति कराती है जेल यात्रा, जानें कारण

कुंडली में शनि-मंगल-राहु की यह स्थिति कराती है जेल यात्रा, जानें कारण

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कुंडली में शनि-मंगल-राहु की यह स्थिति कराती है जेल यात्रा, जानें कारण
जेल योग

Astrology Prediction: जेल यात्रा या कानूनी बंधन का विचार कुंडली के विशिष्ट भावों और क्रूर ग्रहों की स्थिति से किया जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी व्यक्ति की कुंडली में शनि, मंगल और राहु जेल के योग को निर्मित करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं.

कारावास के ज्योतिषीय कारण

द्वादश भाव (कुंडली के 12वें घर): यह भाव दंड, व्यय, बंधन और एकांतवास (जेल) का मुख्य प्रतिनिधित्व करता है.
षष्ठ भाव (कुंडली के 6वें घर): यह शत्रु, विवाद और कानूनी मुकदमों का भाव है.
अष्टम भाव (कुंडली के 8वें घर): यह अचानक आने वाली विपत्ति और गंभीर संकट को दर्शाता है.

जेल योग का निर्माण

कुंडली में ग्रहों की स्थिति लग्न-द्वादश, तृतीय-एकादश, चतुर्थ-दशम, पंचम-नवम या षष्ठ-अष्टम भाव में समान संख्या में ग्रह स्थित हों, तो एक विशेष ‘जेल योग’ बनता है.

कुंडली के लग्न का स्वामी (लग्नेश) और छठे भाव का स्वामी (षष्ठेश) शनि के साथ युति बनाकर केंद्र या त्रिकोण में बैठ जाएं, तो उस व्यक्ति को जेल की सजा होने की प्रबल संभावना रहती है.

राहु-केतु का प्रभाव

आपकी कुंडली के केंद्र या त्रिकोण में लग्नेश और 6वें भाव में बैठे ग्रहों के साथ राहु या केतु भी स्थित हों, तो यह स्थिति व्यक्ति को कानूनी उलझनों और कैद की ओर धकेलती है.

पाप ग्रहों का दबाव

कुंडली के दूसरे (द्वितीय) और बारहवें (द्वादश) भाव में यदि समान संख्या में पाप ग्रह बैठ जाएं, तो यह स्पष्ट रूप से कारावास का संकेत देता है.

कब सक्रिय होता है यह योग?

कुंडली में योग होने से जेल नहीं होती है. यह स्थितियां तब सक्रिय होती हैं, जब अशुभ ग्रहों की महादशा या अंतर्दशा प्रभावी हो. गोचर में जब शनि या राहु का प्रभाव छठे, आठवें या बारहवें भाव पर पड़ता है और लग्नेश कमजोर स्थिति में होता है, तब व्यक्ति स्वयं का बचाव नहीं कर पाता है. कई बार ग्रहों के अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति निर्दोष होने के बावजूद भी षड्यंत्र का शिकार होकर जेल चला जाता है.

ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु:
ज्योतिष एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ | 12 साल का अनुभव
Mo- +91 8620920581

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