[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Religion इटखोरी का भद्रकाली मंदिर: जहां आज भी मौजूद हैं प्राचीन सभ्यता के प्रमाण

इटखोरी का भद्रकाली मंदिर: जहां आज भी मौजूद हैं प्राचीन सभ्यता के प्रमाण

0
इटखोरी का भद्रकाली मंदिर: जहां आज भी मौजूद हैं प्राचीन सभ्यता के प्रमाण
झारखंड का प्रसिद्ध मां भद्रकाली मंदिर

Bhadrakali Jayanti Temple Visit: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है. ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है, जिसे अचला एकादशी और कुछ क्षेत्रों में भद्रकाली एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 13 मई, बुधवार को रखा जाएगा. इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस अवसर पर आज हम आपको झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 150 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध मां भद्रकाली मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जो अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक और तांत्रिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है.

प्राचीन इतिहास से जुड़ा है मां भद्रकाली मंदिर

मां भद्रकाली का यह प्राचीन मंदिर झारखंड के चतरा जिले के इटखोरी प्रखंड से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर भदुली गांव में स्थित है. माना जाता है कि मंदिर के नाम पर ही गांव का नाम भदुली पड़ा. यह मंदिर अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व का केंद्र माना जाता है. मंदिर में स्थापित मां भद्रकाली की प्रतिमा एक ही विशाल शिलाखंड पर तराशी गई है. यह प्रतिमा लगभग साढ़े चार फीट ऊँची, ढाई फीट चौड़ी और करीब 30 मन वजनी बताई जाती है. विद्वानों के अनुसार इस प्रतिमा की स्थापना पाल काल यानी पांचवीं-छठी शताब्दी में हुई थी.

196 एकड़ में फैला है विशाल मंदिर परिसर

मां भद्रकाली मंदिर का परिसर लगभग 196 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. मंदिर परिसर में एक विशाल यज्ञशाला भी बनाई गई है, जिसका निर्माण वर्ष 1980 में हुआ था. यह यज्ञशाला 52 फीट ऊँची, 70 फीट लंबी और 50 फीट चौड़ी है. यज्ञशाला के पूर्व दिशा में एक संग्रहालय स्थित है, जहां उत्खनन में प्राप्त 418 मूर्तियों और प्राचीन भग्नावशेषों को सुरक्षित रखा गया है.

तंत्र साधना के लिए यह स्थान विशेष रूप से प्रसिद्ध माना जाता है. यहां मां तारा की प्रतिमा इस प्रकार बनाई गई है कि साधक को माँ के पैर का अंगूठा सीधे आज्ञाचक्र यानी भृकुटी मध्य के सामने दिखाई देता है. शोधकर्ताओं का मानना है कि मगध के प्रसिद्ध शाक्त साधक भैरवनाथ ने इस स्थल को साधना के लिए चुना था.

ये भी पढ़ें: भद्रकाली जयंती 2026 आज, जानें मां भद्रकाली के चार दिव्य स्वरूप और उनका महत्व

मंदिर परिसर में मौजूद हैं कई अद्भुत धरोहरें

मंदिर परिसर में कोठेश्वरनाथ स्तूप भी स्थित है, जिसके चारों ओर भगवान बुद्ध की मूर्तियां अंकित हैं. स्तूप के ऊपर एक छोटा गड्ढा बना हुआ है, जिसमें चमत्कारिक रूप से हमेशा पानी भरा रहता है. मान्यता है कि इस जल को पूरी तरह खाली नहीं किया जा सकता.

इसके अलावा यहां सहस्रलिंगी शिवलिंग भी स्थापित है, जिसमें 1008 छोटे-छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं. यह शिवलिंग श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र माना जाता है.

भगवान बुद्ध और जैन धर्म से भी जुड़ा है संबंध

ऐसी मान्यता है कि ज्ञान और शांति की खोज में निकले युवराज सिद्धार्थ ने इस स्थान पर तपस्या की थी. कहा जाता है कि जब उनकी माता उन्हें वापस ले जाने आईं और सिद्धार्थ का ध्यान नहीं टूटा, तब उनके मुख से “इत खोई” शब्द निकला, जो आगे चलकर इटखोरी कहलाया.

जैन धर्मावलंबी भी इस स्थान को पवित्र मानते हैं. मान्यता है कि जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ स्वामी की जन्मभूमि यही क्षेत्र है. साथ ही यह स्थान तपस्वी मेघा मुनि की तपस्थली भी माना जाता है.

पुरातात्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है मंदिर

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा वर्ष 2011-12 और 2012-13 में यहां की गई खुदाई में कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक तथ्य सामने आए. खुदाई में नौवीं-दसवीं शताब्दी के मठ और मंदिरों के अवशेष मिले, जिन्हें आज संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है. वर्तमान समय में मंदिर प्रबंधन समिति इस प्राचीन धरोहर को उसके पुराने वैभव के साथ संरक्षित करने का प्रयास कर रही है.

Previous article कोल इंडिया में खत्म होगी यूनियनों की ‘दावा राजनीति’, अब सीक्रेट बैलेट से मिलेगी मान्यता
Next article अखिलेश के भाई और मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक का निधन
Avatar Of Shaurya Punj
शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel