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Home Religion अधिकतर लोग आरती के बाद यह गलती करते हैं, धर्मशास्त्र में है इसका उल्लेख

अधिकतर लोग आरती के बाद यह गलती करते हैं, धर्मशास्त्र में है इसका उल्लेख

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अधिकतर लोग आरती के बाद यह गलती करते हैं, धर्मशास्त्र में है इसका उल्लेख
पूजा की आरती के नियम, लोग हो जाते हैं अंजान

Aarti Rules: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और आरती का विशेष महत्व माना गया है. अधिकांश लोग प्रतिदिन भगवान की पूजा करने के बाद आरती करते हैं, लेकिन कई बार अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिनका उल्लेख धर्मशास्त्रों में उचित नहीं माना गया है. इनमें सबसे आम गलती आरती समाप्त होने के तुरंत बाद बिना श्रद्धा के वहां से उठ जाना या आरती की लौ का सम्मान न करना है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आरती केवल एक अनुष्ठान नहीं बल्कि भगवान के प्रति समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है. इसलिए आरती के बाद कुछ नियमों का पालन करना भी उतना ही आवश्यक माना गया है.

आरती की लौ को ग्रहण करना क्यों माना जाता है शुभ?

धर्मशास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि आरती के बाद श्रद्धालुओं को आरती की लौ से अपने हाथों को स्पर्श कर माथे और आंखों पर लगाना चाहिए. मान्यता है कि इससे आरती के माध्यम से प्राप्त सकारात्मक ऊर्जा और दिव्य आशीर्वाद व्यक्ति तक पहुंचता है.

कई लोग आरती होते ही जल्दबाजी में वहां से चले जाते हैं या आरती की लौ ग्रहण नहीं करते. धार्मिक दृष्टि से इसे पूजा की प्रक्रिया को अधूरा छोड़ने जैसा माना गया है.

आरती के बाद करें यह कार्य

आरती के पश्चात कुछ क्षण भगवान का ध्यान करना, प्रार्थना करना और प्रसाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है. साथ ही पूजा स्थल को व्यवस्थित रखना और दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखना भी आवश्यक है.

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, आरती के बाद भगवान का स्मरण करते हुए परिवार और समाज के कल्याण की कामना करनी चाहिए. इससे पूजा का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है.

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श्रद्धा और नियम दोनों हैं जरूरी

धर्म में केवल पूजा करना ही पर्याप्त नहीं माना गया, बल्कि उसे सही विधि और श्रद्धा के साथ पूर्ण करना भी आवश्यक बताया गया है. इसलिए अगली बार आरती के बाद जल्दबाजी करने के बजाय कुछ क्षण भगवान के प्रति आभार व्यक्त करें और आरती की लौ का सम्मान अवश्य करें. यही पूजा को पूर्णता प्रदान करता है.

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शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.
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