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कुंडली में कब होता है कालसर्प योग

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कुंडली में कब होता है कालसर्प योग

डॉ एनके बेरा, ज्योतिषाचार्य

प्राचीन विद्वानों ने कालसर्प योग के बारे में जन्मकुंडली में कुछ विशेष भावों में इसकी स्थिति व अनिष्ट प्रभावों को बताया है. इसकी विशद व्याख्या तो वही कर सकता है, जिसने इस दुर्योग का फल भुगता है. पापग्रहों के होने पर सर्पयोग एवं पंचम में राहु की स्थिति से संतान नाश प्रचीन आचार्यों ने भी स्वीकार किया है.
राहु केतु मध्ये सप्तो विघ्ना, हा कालसर्प सारिकाः ।
सुतयासादि सकलदोषा, रोगेन प्रवांसे चरणं ध्रुवम ।।
अर्थात् राहु केतु के मध्य समस्त ग्रहों के आ जाने से कालसर्प नाम का योग बनता है, जो संतान यश का नाश करता है. समस्त दुःखों एवं रोग का कारण बनता है. जातक एक ऐसे चक्रव्यूह में फंस जाता है कि उसे कुछ पता ही नहीं चल सकता. ऐसी स्थितियों में प्रख्यात चिकित्सक भी गच्चा खाकर रोगी का सही इलाज नहीं कर पाते.
योग रत्नाकर ने सत्य ही कहा है –
न शमं याति ना व्याधि ज्ञेय कर्मज्ञो बुधः ।
पुण्यश्च भेषजे शान्तस्ते ज्ञेया कर्म दोषजा ।।
अर्थात जब रोग के बारे में डॉक्टर निश्चित नहीं कर पाये, व्याधि का शमन दवाइयों से न हो, तो समझ लेना चाहिए कि कर्म दोष है, जिसकी शांति का उपाय किसी योग्य आचार्य का परामर्श लेकर करें.
कालसर्प योग बनने की प्रमुख स्थितियां :
1. जन्मकुंडली में राहु-केतु के मध्य सभी ग्रह स्थित होने से 2. राहु से अष्टम भाव में शनि स्थित हो 3. राहु केंद्र या त्रिकोण में हो 4. चंद्र या सूर्य से राहु आठवें भाव में हो 5. जन्म कुंडली में जातक की योनि सर्प हो 6. राहु की दृष्टि में चंद्र सूर्य व लग्न हो 7. त्रिक भावों में राहु रहने पर भी कालसर्प योग होता है 8. राहु का राशि अधिपति एवं नक्षत्रपति नीच राशियों में स्थित हो 9. राहु-केतु की पकड़ से बाहर एक ग्रह यदि स्थित हो एवं वह राहु के अंशों से कम अंश का हो, तो भी कालसर्प योग होता है.
कैसे पहचानें :
कालसर्प योग का विशेष प्रभाव जातक के उम्र के 42 वर्ष तक रहता है. जिनके कालसर्प योग अशुभ है, उन्हें रात्रि स्वप्न में सांप दिखना, पानी में डूबना, सोते समय ऐसा लगना जैसे शरीर पर सांप रेंग रहा हो, रात को घबरा कर उठना व नींद उचटते ही प्यास लगना, सपने में सांप से लड़ना, ऐसा लगना कि सांप पीछे लगा हो, सांप को मारकर टुकड़े-टुकड़े करना, सपने में पानी ही पानी या सांप ही सांप दिखे, तो समझें आप पर कालसर्प का प्रभाव है.
अशुभ प्रभाव निवारण हेतु उपाय :
1. 5 अगस्त श्रावण सोमवार को नागपंचमी है. इस दिन व्रत रखकर तांबे के कलश में काले तिल व सर्प सर्पिणी का जोड़ा रख कर गगांजल या शुद्ध जल भरकर शिवलिंग पर अर्पण करें तथा ऊँ हौं जूं सः मंत्र का 5 माला या यथासाध्य जप करें.
2. मोरपंख को अपने शयन कक्ष व कार्यालय में रखें. सुबह-शाम उससे हवा करें या नंगे बदन स्पर्श करवाएं.
3. चंद्र ग्रहण, सूर्यग्रहण, अमावस्या या नागपंचमी के दिन तांबे के घड़ा में जल भरकर सूर्योदय के पहले शिवलिंग पर चढ़ाएं तथा राहु के मंत्रों का 72,000 जाप करें व दशांश हवन करें. तत्पश्चात् ब्राह्मण को भोजन कराएं, दक्षिणा दें.
4. हनुमान चालिसा का नित्य प्रति 5 बार पाठ करें.
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