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सुहागिन स्त्रियों के लिए बेहद खास है वट सावित्री व्रत

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सुहागिन स्त्रियों के लिए बेहद खास है वट सावित्री व्रत

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत सुहागिन स्त्रियों के लिए बेहद खास है. मान्यता है कि इस व्रत को रखने से पति पर आये संकट चले जाते हैं और आयु लंबी हो जाती है. यही नहीं, अगर दांपत्य जीवन में कोई परेशानी चल रही हो तो वह भी इस व्रत के प्रताप से दूर हो जाते हैं. सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए इस दिन वट यानी कि बरगद के पेड़ के नीचे पूजा-अर्चना करती हैं.

इस दिन सावित्री और सत्यवान की कथा सुनने का विधान है. मान्यता है कि इस कथा को सुनने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है. पौराणिक कथा के अनुसार सावित्री मृत्यु के देवता यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले आयी थी.
वट सावित्री व्रत कब है
‘स्कंद’ और ‘भविष्योत्तर’ पुराण’ के अनुसार वट सावित्री का व्रत हिंदू कैलेंडर की ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि पर करने का विधान है. वहीं, ‘निर्णयामृत’ इत्यादि ग्रंथों के अनुसार वट सावित्री व्रत पूजा ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की अमावस्या पर की जाती है. उत्तर भारत में यह व्रत ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को ही किया जाता है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह व्रत हर साल मई या जून महीने में आता है. इस बार व्रत 3 जून को है.
व्रत का महत्‍व
वट का मतलब होता है बरगद का पेड़. बरगद में कई जटाएं निकली होती हैं. कहते हैं कि इसी पेड़ के नीचे सावित्री ने अपने पति को यमराज से वापस पाया था. सावित्री को देवी का रूप माना जाता है. हिंदू पुराण में बरगद के पेड़े में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास बताया जाता है.
मान्यता के अनुसार ब्रह्मा वृक्ष की जड़ में, विष्णु इसके तने में और शि‍व ऊपरी भाग में रहते हैं. इसलिए माना जाता है कि इस पेड़ के नीचे बैठकर पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है. वट सावित्री व्रत करने और इसकी कथा सुनने से उपासक के वैवाहिक जीवन या जीवन साथी की आयु पर किसी प्रकार का कोई संकट आया भी हो, तो टल जाता है.
तिथि और शुभ मुहूर्त :
अमावस्या तिथि प्रारंभ : 02 जून, 2019 को शाम 04:39 मिनट से
अमावस्या तिथि समाप्त : 03 जून, 2019 को दोपहर 03:31 मिनट तक
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