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भाई की लंबी उम्र की कामना का पर्व 9 को

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भाई की लंबी उम्र की कामना का पर्व 9 को

दीपावली के दो दिन बाद यानी शुक्रवार का दिन बहनों के लिए खास है. इस दिन कोई भाई फोटा मनायेगा तो कोई भैया दूज. भले ही परंपरा एवं नियम अलग-अलग हों, लेकिन यह पर्व भाई – बहन के प्यार भरे रिश्ते को गहरा और मजबूत बनाता है. बहन अपने भाई के लिए उपवास रखती हैं एवं नियमों का पालन करते हुए भैया दूज व भाई फोटा मनाती है.

बंगाली समुदाय में मनता है भाई फोटा

बंगाली समाज में भाई की लंबी उम्र के लिए उसे चंदन एवं घी का फोटा (तिलक) लगाया जाता है. जिसे समाज में भाई फोटा कहते हैं. अमावस के बाद द्वितीया को भाई फोटा होता है, इसलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं. इस दिन बहन अपने भाई के लिए उपवास रखती हैं एवं उसका पसंदीदा भोजन बनाती हैं. भाई फोटा की थाली में चंदन व घी, दूब, धान, दीया, मिठाई आदि रखा जाता है. सोनारी निवासी रश्मि चौधरी ने बताया कि भाई को पूर्व की दिशा में बैठा कर बहन अपने बायें हाथ की छोटी उंगली में चंदन व घी से तीन बार फोटा देती हैं और ऐसा करते हुए कहती हैं कि भाईयेर कोपाले दिलाम फोटा, जोमेर दुआरे पोरलो कांटा. इसके बाद उसकी आरती कर, उसे मिठाई खिलाती हैं. भाई अपने बहन को उपहार देता है.

बिहारवासी मनाते हैं गोधन

बिहार से ताल्लुक रखनेवाली साकची निवासी अंजु बताती हैं कि गोधन भैया चलले अहेरिया, अमुक बहिना देली आशीष, जीयस हो मोरे भैया, जीय भैया लाख बरिश …एवं अंवरा कूटीले जम के दुआर समेत अन्य पारंपरिक गीतों के साथ बहनें अपने भाई के लिए गोधन कूटती हैं और भाई के हाथों में धागा बांधती हैं. दीपावली के तीसरे दिन भोजपुरी समाज में गोधन कूटने की परंपरा है. इस दिन बहनें अपने भाइयों के दीर्घायु होने की कामना करती हैं. शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भोजपुरी समाज की महिलाओं ने इसके लिए शनिवार को गोबर से गोवर्धन और उनकी बहन की अनुकृति तैयार की. इस दौरान गोधन के गीत भी गूंजते रहे. शुक्रवार को गोधन कूटने के बाद महिलाएं सर्वप्रथम घर के पुरुषों, खासकर बहने भाइयों को गोधन पर चढ़ाया कर चना खिलायेंगी. इसे वज्र चना कहा जाता है. इसके बाद आटा व दाल से बना पीठा भी खाने की परंपरा है. गोधन कूटने के दौरान घर के पुरुषों को पहले तो शाप दिया जाता है, फिर उनके दीर्घायु होने की कामना की जाती है. इसे लेकर एक लोककथा भी सुनने का प्रचलन है.

नेपाली युवतियां करती हैं भाई टीका

केबुल टाउन निवासी ज्योति अधिकारी बताती हैं कि नेपाली समाज में भाई टीका, भाई की लंबी उम्र के लिए किया जाता है. आज के दिन बहनें पत्ते की टोकरी में फूल और अखरोट दरवाजे के चौखट पर रख देती हैं. भाई को आसन में बैठाया जाता है. पीतल के कलश में पानी व फूल की पखुंरियां डाली जाती हैं और तीन बार कलश को भाई के चारों की और घुमाते हुए बहनें अपने भाई की लंबी उम्र एवं खुशहाल रहने की कामना करती हैं. कलश के जल को चौखट में रखे पत्ते की कटोरी में छिड़कती हैं. ऐसा तीन बार करने के बाद बहन उस अखरोट को भाई से छुआ कर रख देती हैं. उसके बाद पीसा हुआ चावल के पेस्ट से भाई का तिलक करती हैं, फूलों का माला पहनाती हैं. फिर उस रखे हुए अखरोट को बाहर ले जाकर एक बार में फोड़ कर फेंक देती हैं. भाई को सेल रोटी खिला कर व दूध पिला कर भैया दूज संपन्न करतीं हैं.

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