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Home Religion दीपोत्सव के पांच दिन, विशेष संयोग में आयेंगी लक्ष्मी, जानें क्या करना है उचित

दीपोत्सव के पांच दिन, विशेष संयोग में आयेंगी लक्ष्मी, जानें क्या करना है उचित

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दीपोत्सव के पांच दिन, विशेष संयोग में आयेंगी लक्ष्मी, जानें क्या करना है उचित

-दीपावली में विशेष मुहूर्त और शुभ संयोग में पूजा-अर्चना कर इसका लाभ उठा सकते हैं

दशहरा बीत जाने के बाद अब बारी दीपावली की है. दीपावली हिंदुओं में मनाये जाने वाले सबसे बड़े धार्मिक पर्वों में से एक है, जिसे कार्तिक महीने में मनाया जाता है. अंधेरे से उजाले में जाने का प्रतीक यह पर्व दीपावली घर में मां लक्ष्मी और गणेश के रूप में शुभ और लाभ को घर लाने का विशेष मौका भी है. पांच दिनों तक यह दीपोत्सव बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है. ज्योतिषियों के मुताबिक दीपावली में विशेष मुहूर्त और शुभ संयोग में पूजा-अर्चना कर इसका लाभ उठा सकते हैं. धनतेरस से भाईदूज तक इन पांच दिनों में आप क्या क्या करें जिससे समृद्धि आपके घर में आये, यह जानिए-
धनतेरस: 5 नवंबर
दीपावली का पहला दिन धनतेरस के रूप में पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है. कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही धंवन्तरि का जन्म हुआ था। इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है। इस दिन चांदी खरीदने की प्रथा है, इसके पीछे एक बड़ा कारण माना जाता है. कहा जाता है चांदी चंद्रमा का प्रतीक है, जो शीतलता प्रदान करता है और मन को संतोष रूपी धन देता है और जिसके पास संतोष है, वही सबसे सुखी व्यक्तिहै। लोग इस दिन ही दीपावली की रात लक्ष्मी, गणेश की पूजा के लिए मूर्ति भी खरीदते हैं. 19 अक्टूबर गुरुवार को दीपावली का प्रसिद्ध पर्व मनाया जाएगा. इसमें लक्ष्मी पूजन के लिए पंचांग में तीन मुहूर्त निर्धारित किये गये हैं.
क्या करें-
धनतेरस के दिन दीप जलाकर भगवान धंवन्तरि की पूजा करें. भगवान धंवन्तरि से स्वास्थ्य और सेहतमंद बनाए रखने हेतु प्रार्थना करें. चांदी का कोई बर्तन या लक्ष्मी, गणेश अंकित चांदी का सिक्का खरीदें.
छोटी दीपावली : 6 नवंबर
इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम, उनकी पत्नी माता सीता और उसके भाई श्री लक्ष्मण के द्वारा राक्षस राजा रावण पर विजय के बाद 14 साल वनवास (14 साल के निर्वासन) से वापसी की खुशी मे मानते हैं. दीये जलाते हैं, मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, एक या अधिक अपने इष्ट देवताओं का आवहान करते हैं, आम तौर पर गणेश, सरस्वती और कुबेर की पूजा करते हैं. एेसा माना जाता है, कि मां लक्ष्मी दीवाली की रात को पृथ्वी पर घूमने के लिए आती हैं. इसलिए लोग दीवाली की रात को, अपने दरवाजे और खिड़कियां मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए खुला छोड़ देते हैं. भारत के कुछ हिस्से मे दीवाली नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के रूप में भी मनाया जाता है. व्यापारी और दुकानदार अपने पुराने साल के खातों को बंद करते हैं एवं लक्ष्मी जी और अन्य देवताओं के आशीर्वाद के साथ एक नया वित्त वर्ष की शुरुआत करते हैं.
क्या करें- इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर तेल लगाएं और पानी में चिरचिरी के पत्ते डालकर उससे स्नान करें और विष्णु मंदिर या कृष्ण मंदिर में जाकर भगवान का दर्शन करने से सभी पाप खत्म होते हैं.
7 नवंबर -बड़ी दीवाली
बड़ी दीवाली नरक चतुर्दशी, रूप चतुर्दशी, रूप चौदस और काली चौदस के रूप में भी जानी जाती है। आमतौर पर नरक चतुर्दशी से पहले, घर की सजावट और रंगीन रंगोली बनाकर मानते हैं. उत्तर भारत में लोग घी का दीपक घर के बाहर जलाकर, इस दिन को बड़ी दीवाली के रूप मे मानते हैं. सिख धर्म मे लोग दीपावली को बंदी छोर दिवस के रूप में भी मनाया करते हैं और जैन इस त्योहार को भगवान महावीर जी की स्मृति के रूप में मानते हैं. दीपावली के तीसरे दिन भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी के तीन रूपों की पूजा की जाती है. वैसे भी किसी शुभ कार्य का शुभारंभ करने से पहले भगवान गणेश पहले पूजे जाते हैं.
क्या करें- दीपावली के दिन की विशेषता मां लक्ष्मी के पूजन से संबंधित है. इस दिन हर घर, परिवार, कार्यालय में लक्ष्मीजी की पूजा करके उनका स्वागत किया जाता है. दीपावली के दिन जहां गृहस्थ और कारोबारी धन की देवी लक्ष्मी से समृद्धि और धन की कामना करते हैं, वहीं साधु और संत कुछ विशेष सिद्धियां प्राप्त करने के लिए रात में अपने तांत्रिक पूजा पाठ करते हैं.
दीपदान
दीपावली के दिन दीपदान का विशेष महत्त्व होता है. नारद पुराण के अनुसार इस दिन मंदिर, घर, नदी, बगीचा, वृक्ष, गौशाला तथा बाजार में दीपदान देना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन यदि कोई श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी की पूजा करता है तो, उसके घर में कभी भी दरिद्रता का वास नहीं होता. इस दिन गायों के सींग आदि को रंगकर उन्हें घास और अन्न देकर प्रदक्षिणा की जाती है. दीपावली पर्व भारतीय सभ्यता की एक अनोखी छटा को पेश करता है. आज अवश्य पटाखों की शोर में माता लक्ष्मी की आरती का शोर कम हो गया है लेकिन इसके पीछे की मूल भावना आज भी बनी हुई है.
गोवर्धन पूजा: 8 नवंबर
दीपावली के दौरान चौथा दिन गोवर्धन पूजा के रूप के रूप में मनाया है. कुछ लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं. हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय माना गया है. शास्त्रों के अनुसार गाय गंगा नदी के समान पवित्र होती है. यहां तक गाय को मां लक्ष्मी का रूप भी माना जाता है. कहा जाता है भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलधार वर्षा से बचने के लिए सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली पर उठाकर रखा था.

क्या करें- इस दिन बृजवासी गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं. बिहार में लोग अपनी गायों और बैलों को स्नान कराकर उन्हें रंग लगाते हैं और उनके गले में नई रस्सी डाली जाती है. गाय और बैलों को गुड़ और चावल भी खिलाया जाता है.

भाई दूज: 9 नवंबर

दीपावली का आखिरी दिन भाईदूज के रूप में मनाया जाता है. यह दिन भाई और बहनों के लिए समर्पित होता है. भाईदूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है. इस दिन बहन रोली एवं अक्षत से अपने भाई का तिलक कर उसके अच्छे भविष्य की कामना करती है. कहा जाता है इस दिन जब यमराज यमी के पास पहुंचे तो यमी ने अपने भाई यमराज की खूब सेवा की, इससे खुश होकर यमराज ने अपनी बहन को ढेर सारा आशीष दिया. इसके अलावा कायस्थ समाज में भाईदूज के दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा भी की जाती है। कायस्थ समाज में लोग अपने बही-खातों की पूजा भी करते हैं.

क्या करें- इस दिन हर बहन अपने भाई को तिलक लगाकर भाई की सुख समृद्धि की मंगल कामना करती है और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीष देती है और भाई अपनी बहन को भेंट स्वरूप कुछ उपहार या दक्षिणा देता है.

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