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Home Religion 10.30 तक सप्तमी तिथि, इसके बाद प्रारंभ हो जायेगी अष्टमी, आज से खुलेंगे मां दुर्गा के पट, पूजा की तैयारी पूरी

10.30 तक सप्तमी तिथि, इसके बाद प्रारंभ हो जायेगी अष्टमी, आज से खुलेंगे मां दुर्गा के पट, पूजा की तैयारी पूरी

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10.30 तक सप्तमी तिथि, इसके बाद प्रारंभ हो जायेगी अष्टमी, आज से खुलेंगे मां दुर्गा के पट, पूजा की तैयारी पूरी
पटना : आज से सभी पूजा-पंडालों में मां दुर्गा का दर्शन कर सकेंगे. सप्तमी पूजा के साथ ही माता के पट खोल दिये जायेंगे.शारदीय नवरात्र के छठे दिन सोमवार को माता के स्वरूप मां कत्यायनी की पूजा-अर्चना की गयी.
षष्ठी पूजा के साथ दुर्गा-पूजा की चहल -पहल बढ़ गयी. पूजा पंडालाें में कलाकार मां दुर्गा की मूर्ति को अंतिम रूप देने में जुटे रहे. पंडालों की सजावट का कार्य भी देर-रात तक होता रहा. वहीं, शाम को शंख, ढोल, नगाड़े के गूंज के बीच भक्तगण बेल निमंत्रण के लिये बेल वृक्ष के पास पहुंचे. जहां रोली व सिंदूर से बेल का न्योता दिया गया.
पुरोहितों के मंत्रोच्चार के बीच बेल निमंत्रण देकर जोड़ा बेल को सप्तमी पूजा के लिये आमंत्रित किया गया. मंगलवार को सप्तमी पूजा के साथ मां मंदिरों के कपाट खुल जायेंगे. बंगला समुदाय स्थित दुर्गा बाड़ी में माता का कपाट सोमवार को ही खोल दिया गया.
सप्तमी,अष्टमी आज
पंडित श्री पति त्रिपाठी ने बताया कि मंगलवार की सुबह 10.30 तक सप्तमी तिथि है. इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ हो जायेगी. इस दिन बिल्व पत्र पूजा स्थल पर लाया जायेगा और पूजा स्थान में रखकर पूजा की जायेगी. मध्य रात्रि में अष्टमी का योग होने से मंगलवार को ही निशा पूजा किया जायेगा. बुधवार को दिन में 12.27 बजे तक अष्टमी तिथि है.
उदया तिथि होने से पूरे दिन श्रद्धालु महाष्टमी व्रत कर सकेंगे. नवमी तिथि गुरुवार को दिन में 02.31 बजे तक है. इस दिन पाठ-समाप्ति,हवन,तर्पण,मार्जन, कन्या पूजन आदि कराने के साथ नवरात्रि का व्रत पूरा किया जायेगा. शुक्रवार को दशमी तिथि प्रातः प्रतिमा विसर्जन किया जायेगा.
नवरात्र जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है पूजा समितियां अपने पंडालों को एक दूसरे से भव्य बनाने में जुटी हैं. सभी पूजा समितियां पंडाल पर ही लाखों रुपये खर्च कर रही हैं.
बांग्ला मंडपों में देवी दुर्गा के पट खुले, बजने लगे ढाक
सोमवार के अहले सुबह से ही बांग्ला पद्धति से पूजा होने वाले मंडपों में खास रौनक बिखर गयी. यारपुर स्थित कालीबाड़ी मंदिर के अलावा बंगाली अखाड़ा पीडब्लूडी परिसर, आर ब्लॉक, मीठापुर, जक्कनपुर, कदमकुआं और पाटलिपुत्र स्थित बंगाली मंदिरों और पूजा पंडालों में वंदनवार सज चुके थे, ढाक तैयार थे और जैसे ही सुबह साढ़े आठ बजे षष्ठी पूजा शुरू हुई, मद्धम-मद्धम आवाज में ढाक बज रहे थे.
साढ़े तीन से चार घंटे तक चली पूजा के बाद माता को आमंत्रण भेजा गया. इसके पूर्व सुबह आठ बजे से माता का बोधन हुआ फिर कल्पारंभ होने के बाद शाम में अधिवास किया गया. बेलवरण की पूजा संपन्न हुई और वहां सभी को आमंत्रण देने के बाद शाम में अनुष्ठान के उपरांत माता का पट खोल दिया गया. पूजा कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि बंगाली अखाड़ा में सबसे लंबे समय से पूजा होती आ रही है, इस बार 126वें साल लगातार माता का दर्शन हो रहा है.
कोलकाता की मां काली की झलक राजधानीवासियों को कालीबाड़ी में देखने को मिलेगी. यहां मां दुर्गा महिषमर्दनी के रूप में रौद्र रूप में दिख रही है.
फलाहार और मिठाई का लगाया भोग
माता का आगमन होने के उपरांत उन्हें पुष्पांजली अर्पित की गयी और भोग लगाने के बाद भक्तों द्वारा पूजा-अर्चना शुरू हुई. पूरी-सब्जी और हलवा का भोग लगाने के बाद देवी का आरती-पूजन किया गया. शाम में मिष्ठी दही का भोग लगा कर शयन की प्रार्थना की गयी. काली बाड़ी मंदिर के पुजारी वासुदेव चक्रवर्ती के अनुसार भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी और सभी ने माता से मनोवांछित आशीर्वाद मांगे. सप्तमी को खिचड़ी का भोग लगाया जायेगा.
विजयादशमी को होगा सिंदूर खेला
कालीबाड़ी में जो प्रतिमा स्थापित की जाती है. उसमें सबसे खास बात यह होती है कि मां दुर्गा की पूजा बंगाली रीति रिवाज से ही होती है. और तो और विजयादशमी के दिन ही मां दुर्गा की प्रतिमा को विसर्जन कर दिया जाता है. अष्टमी व नवमी के मध्य चामुंडा की विशेष पूजा होता है. जिसे बंगाली भाषा में संधि पूजा कहा जाता है. बंगाली रीति रिवाज में मां दुर्गा के मायके से जाते समय विजयादशमी के दिन सिंदूर खेल का बहुत ही ज्यादा महत्व होता है.
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