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नयी किताब: मूर्धन्यता की खोज में

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नयी किताब: मूर्धन्यता की खोज में

ख्यात साहित्यकार अज्ञेय की अंग्रेजी में लिखी गयी जीवनी ‘राइटर रेबल सोल्जर लवरः द मेनी लाइव्स ऑफ अज्ञेय’ उन्हें जानने-समझने में बहुत सहायक हो सकती है. इस जीवनी के लेखक अक्षय मुकुल हैं. इनकी एक किताब 2015 में ‘गीता प्रेस एंड द मेंकिंग ऑफ इंडिया’ हार्पर कॉलिंस से छप चुकी है. पेशे से पत्रकार अक्षय कविता के प्रेमी व्यक्ति हैं. अज्ञेय आधुनिक हिंदी भाषा के बौद्धिक शिखर पुरुष रहे हैं. जितना विविध आयामी व्यक्तित्व उनका रहा है, उसके समानांतर कोई दूसरा नाम नहीं रखा जा सकता है. मलयज अज्ञेय को शुद्ध अनुभूतियों के कवि नहीं मानते. उनमें एक दृढ़ बौद्धिक आधार देखते हैं. अक्षय मुकुल के आकर्षण के केंद्र में भी शायद यही बौद्धिक आधार है. वे इस जीवनी में कहीं भी अज्ञेय पर आक्षेप दर्ज नहीं करते, न ही उनकी प्रशंसा या उनके जीवन से जुड़े तथ्यों को संग्रह भर कर देने की कोशिश करते हैं. वे संकीर्ण साहित्यिक जीवनी लेखक नहीं हैं. उनमें कलात्मक और रचनात्मक ईमानदारी भी है तथा जबरदस्त मेहनत करने की क्षमता भी.

मुकुल किताब के आमुख में कहते हैं कि क्रांतिकारी, सैनिक, लेखक और प्रेमी के रूप में अज्ञेय की मुख्तलिफ जीवन की कहानी मुझे अक्सर मिथकीय गुंजलकों में लिथड़ी हुई मिलती है. ये कहानियां सिर्फ एक व्यक्ति के बारे में न होकर दरअसल हिंदी साहित्य के इतिहास से संबंधित हैं, जिनमें एक तरफ विस्तृत विमर्श है, तो दूसरी तरफ क्षुद्र गिरोहबंदियां. भारतीय इतिहास के गहमागहमी से भरे दौर में सक्रिय एक विलक्षण व्यक्तित्व की अप्रतिम कहानी है. अज्ञेय जीवन में कदम दर कदम पर अपने को परिष्कार करते हैं, आगे बढ़ते हैं, शिकायत नहीं करते, दयनीय नहीं होते, हां, पसंद उनकी अपनी होती थी. जो पसंद नहीं आया, वहां वे गंभीर मौन में चले गये. अज्ञेय के इस मौन को भी समझने में जीवनीकार सफल है. अमिताव घोष का मानना है कि अक्षय मुकुल ने अपनी किताब में अज्ञेय जैसे जटिल और अंतर्विरोधों से भरे साहित्यिक व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को दर्ज किया है. अक्षय की विवरण-समृद्ध शैली अज्ञेय की इस साहित्यिक जीवनी को सामाजिक इतिहास के समकक्ष स्थापित कर देती है.

राइटर रेबेल सोल्‍ज़र लवर: द मैनी लाइव्ज ऑफ अज्ञेय / अक्षय मुकुल / विंटेज पेंगुइन इंडिया.

-मनोज मोहन

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