[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Prabhat Literature पूरबी गीतन के सम्राट महेंद्र मिसिर जयंती पर याद आइल ऊ अमर गीत, ‘अंगुरी में डंसले बिआ नगिनिया ए…

पूरबी गीतन के सम्राट महेंद्र मिसिर जयंती पर याद आइल ऊ अमर गीत, ‘अंगुरी में डंसले बिआ नगिनिया ए…

0
पूरबी गीतन के सम्राट महेंद्र मिसिर जयंती पर याद आइल ऊ अमर गीत, ‘अंगुरी में डंसले बिआ नगिनिया ए…
महेंद्र मिसिर

Mahendra Mishra: कलकत्ता के एक रंगमहल में, जब मशहूर तवायफ सोनाबाई गा रहल रहली- “माया के नगरिया में लागल बा बजरिया, ए सुहागिन सुन हो…” सभा में बैठे लोग उनकर आवाज़ सुनके झूम रहल रहले. गीत खतम भइते लोग ताली बजावत एक-एक कर निकल गइल, लेकिन एगो व्यक्ति अबहियों ओहिजे बइठल रहे.

सोनाबाई पूछली, “का बात बा, सभे चल गइल, रउरा अभी काहे बइठल बानी?”ओह आदमी के जवाब मिलल- “रउरा के आवाज़ मधुर बा, सुर भी बढ़िया बा, लेकिन आरोह-अवरोह के कमी बा.” सोनाबाई के ई बात सुनके अचरज भइल. उनकर अब तक के सफर में कवनो श्रोता उनकर गवनई पर सवाल नइखे उठवले. फिर उ व्यक्ति तानपूरा उठाके ऊहे गीत अपन अंदाज में गावे लागल. आवाज़ में गहराई, सुर में आरोह-अवरोह के बहार आ आलाप के जादू सुनके सोनाबाई चकित हो गइली. जब पूछली, “रउरा के हई?” तब उ आदमी हल्के मुस्कान देके कहले- “ई गीत महेंदर मिसिर के लिखल ह. आ महेंदर मिसिर हम हईं.” ई सुनते ही सोनाबाई उनका गोड़ पर गिर गइली. महेंद्र मिसिर भोजपुरी गीत-संगीत के एक अनमोल रतन रहलें. आजु के दिने उ जन्मल रहले आ भोजपुरी ठाट के हीरो बनके अमर हो गइलें.

महेंदर मिसिर के जन्म आ संगीत यात्रा

महेंदर मिसिर के जन्म 16 मार्च 1865 के बिहार के छपरा जिला के मिश्रौलिया गाँव में भइल रहे. उनका परिवार में संगीत के माहौल रहे, लेकिन गरीबी भी साथे रहे. पढ़ाई-लिखाई पारंपरिक गुरुकुल में भइल, लेकिन मन संगीत में लागल रहे.

पूरबी संगीत के पहचान

महेंदर मिसिर के भजन, कीर्तन, निर्गुण, ठुमरी, दादरा, खेमटा, कजरी आ ग़ज़ल में महारत हासिल रहे. लेकिन, सबसे बेसी प्रसिद्धि ऊ पूरबी गीतन के जनक के रूप में पवले. पूरबी गीत पहिले से रहे, लेकिन एकरा के जन-जन तक पहुँचावे के काम महेंदर मिसिर कइले. आज भोजपुरी लोकसंगीत में पूरबी आ महेंदर मिसिर एक दोसरा के पर्याय बन गइल बा.

भिखारी ठाकुर के गुरु

लोकनाटक के महान हस्ती भिखारी ठाकुर भी महेंदर मिसिर के शिष्य रहले. भले ही भिखारी ठाकुर खुल के एकर जिक्र ना कइले, लेकिन लोककथन में ई मान्यता बा कि उनका कई रचनाएँ महेंदर मिसिर से प्रेरित रहली.भिखारी ठाकुर के प्रसिद्ध नाटक ‘बिदेसिया’ भी महेंदर मिसिर के गीत ‘टुटही पलानी’ से प्रेरित मानल जाला.

तवायफन के गुरु आ भोजपुरी संगीत के संरक्षक

कलकत्ता, बनारस आ मुज़फ्फरपुर के कई तवायफ महेंदर मिसिर के आपन गुरु मानत रहली. उनकर गीत सभे गावत रहे. भोजपुरी के हर कोना में उनकर रचना बजत रहे.

स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

महेंदर मिसिर के समय गांधीजी के स्वतंत्रता संग्राम चरम पर रहे. ऊ भी क्रांतिकारियन के मदद कइले. उनका घर क्रांतिकारियन के गुप्त ठिकाना रहे, जहाँ गीत-संगीत के महफिल भी सजत रहे. ऊ अंग्रेजन के आर्थिक नुकसान पहुँचे खातिर नकली नोट छापे के मशीन से नकली नोट छापलें, जे ब्रिटिश सरकार के भारी क्षति पहुँचवलस.

Also Read: जाने वो कैसे लोग थे जिनके प्यार को प्यार मिला

Previous article Gopalganj News : जिले के पेशेवर अपराधियों व शराब माफियाओं पर पुलिस का कसा शिकंजा, एडीजी ने की समीक्षा
Next article SPORTING CLUB JAMSHEDPUR TEAM TRAIL : स्पोर्टिंग क्लब जमशेदपुर का ट्रायल 23 को आर्मरी मैदान में
Avatar Of Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 4 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel