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Home Prabhat Literature Book Review : बेहतरीन शिक्षा का पूरा ट्यूटोरियल है– इंपावरिंग लर्नर्स बिल्डिंग फाउंडेशन

Book Review : बेहतरीन शिक्षा का पूरा ट्यूटोरियल है– इंपावरिंग लर्नर्स बिल्डिंग फाउंडेशन

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Book Review :  बेहतरीन शिक्षा का पूरा ट्यूटोरियल है– इंपावरिंग लर्नर्स बिल्डिंग फाउंडेशन
पुस्तक समीक्षा

Book Review : बच्चों को बेहतरीन शिक्षा कैसे दी जाए, यह आज की शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती है. माता–पिता इसके लिए पूरी तरह स्कूलों को जिम्मेदार बनाना चाहते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि बिना माता–पिता और बच्चों के सहयोग के यह संभव नहीं है. इंपावरिंग लर्नर्स बिल्डिंग फाउंडेशन, उसी दिशा में एक मार्गदर्शक है. इस किताब की लेखिका हैं मांडवी त्रिपाठी जो खुद एक शिक्षाविद्‌ हैं.

एजुकेशन के सभी स्टेक होल्डर का सहयोग जरूरी

मांडवी त्रिपाठी ने अपनी किताब में यह बताने का प्रयास किया है कि  सफल शिक्षा तभी संभव है जब तीनों पक्ष शिक्षक, माता-पिता और विद्यार्थी एक दूसरे को समझें और बेहतरीन शिक्षा के लिए प्रयास करें. बेहतरीन शिक्षा की राह में जो बाधाएं हैं, उसे मिटाने के सभी कारगर उपाय उन्होंने बताया है. 

स्कूल क्यों जरूरी हैं और उनकी असली भूमिका क्या है, इसके बारे में भी लेखिका ने बखूबी बताया है. कुल 11 चैप्टर में उन्होंने सफल शिक्षा के सभी आयामों पर चर्चा की है. विभिन्न चैप्टर्स में अलग–अलग विषयों पर चर्चा की गई है, मसलन अभिभावकों को स्कूल  से क्या उम्मीदें करनी चाहिए. स्कूल और पेरेंट्स मिलकर कैसे बच्चों की परवरिश को बेहतर बना सकते हैं. पॉजिटिव पेरेंटिंग के व्यावहारिक तरीके क्या हैं. टीचर्स और पेरेंट्स को बच्चों से किन बातों से बचना चाहिए. EQ (Emotional Quotient), SQ (Social Quotient) और AQ (Adaptability Quotient) जैसे पहलू अकादमिक सफलता जितने ही जरूरी हैं.

बेहतर शिक्षा के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण की जरूरत

मांडवी त्रिपाठी ने इस किताब में बहुत सहजता से उन बातों का जिक्र कर दिया है, जिसे बताने में हमेशा बोझिल तरीकों का प्रयोग किया जाता है. यह किताब  एक रोडमैप तैयार करती है, जिसके आधार पर बेहतर शिक्षा संभव है. यह किताब प्रैक्टिकल नजरिए पर काम करने की सलाह देती है. यह किताब बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों तीनों के लिए ही बहुत उपयोगी है.

लेखिका का परिचय

मांडवी त्रिपाठी एक शिक्षाविद और समाजसेवी हैं. उन्होंने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का समय दिया है. उन्होंने अपने करियर में शिक्षकों और माता–पिता के बीच की खाई को भरने का भरपूर प्रयास किया है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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