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हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध आलोचक खगेंद्र ठाकुर का निधन, शोक

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हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध आलोचक खगेंद्र ठाकुर का निधन, शोक

रांची : हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध आलोचक खगेंद्र ठाकुर का आज पटना के एम्स अस्पताल में निधन हो गया, वे 83 वर्ष के थे. खगेंद्र ठाकुर पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे. उनके निधन की सूचना परिवार के लोगों ने दी.

खगेंद्र ठाकुर के निधन पर प्रतिक्रिया देते हुए साहित्यकार रणेंद्र ने कहा कि यह मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है. वे मेरे अभिभावक की तरह थे. उन्होंने मुझे हिंदी साहित्य का ककहरा सिखाया था. हिंदी साहित्य के लिए भी यह बहुत बहुत क्षति है. आलोचना के क्षेत्र में नामवर सिंह के बाद उनका जाना बहुत बहुत क्षति है.

सुकांत नागार्जुन ने कहा कि खगेंद्र ठाकुर के निधन पर प्रतिक्रिया देना मेरे लिए बहुत कठिन है. मुझे बहुत दुख है. उनके जाने से प्रगतिशील हिंदी साहित्य को बड़ा झटका लगा है. नामवर सिंह, केदारनाथ सिंह और अब खगेंद्र ठाकुर का जाना ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई बहुत मुश्किल है.

योगदा कॉलेज के प्रोफेसर डॉ नरेंद्र झा ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि खगेंद्र ठाकुर ने अपनी शब्द-साधना से संसार और संस्कार को मजबूती प्रदान की. किसी विषय को वह जिस बारीकी से प्रस्तुत करते थे, वह क्षमता बहुत कम लोगों में होती है. हिंदी जगत में डॉ नामवर सिंह के बाद वैश्विक दृष्टि रखने वाली एक बड़ी प्रतिभा का अंत बेहद दुखद है.

खगेंद्र ठाकुर का जन्म झारखंड के गोड्डा जिले में 9 सितंबर 1937 को हुआ था. उन्होंने हिंदी साहित्य की कई विधाओं मसलन कविता, आलोचना और व्यंग्य में अपनी कलम चलायी. उनकी प्रमुख रचनाओं में शामिल हैं-

आलोचना : विकल्प की प्रक्रिया; आज का वैचारिक संघर्ष मार्क्सवाद; आलोचना के बहाने; समय, समाज व मनुष्य, कविता का वर्तमान, छायावादी काव्य भाषा का विवेचना, दिव्या का सौंदर्य, रामधारी सिंह ‘दिनकर’ : व्यक्तित्व और कृतित्व

कविता संग्रह : धार एक व्याकुल; रक्त कमल परती पर

व्यंग्य : देह धरे को दंड; ईश्वर से भेंटवार्ता

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