[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Prabhat Khabar Special क्या औरतें बेपर्दा मस्जिद में कर सकती हैं प्रवेश?

क्या औरतें बेपर्दा मस्जिद में कर सकती हैं प्रवेश?

0
क्या औरतें बेपर्दा मस्जिद में कर सकती हैं प्रवेश?
नमाज अदा करती महिला

Women In Mosque: समाजवादी पार्टी की नेता डिंपल यादव पर बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता जमाल सिद्दीकी ने मुसलमानों की भावना को आहत करने का आरोप लगाते हुए यह कहा कि उन्होंने मस्जिद में गलत पोशाक में प्रवेश किया है. ऐसा करके उन्होंने मुसलमानों की धार्मिक भावना को आहत किया है. दरअसल सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव की एक तस्वीर वायरल है, जिसमें वे मस्जिद के अंदर बैठक करते नजर आ रहे हैं. बीजेपी के नेता ने यह आरोप लगाया है कि अखिलेश यादव मस्जिद में राजनीतिक बैठक कर रहे हैं, जो कहीं से भी उचित नहीं है. उन्होंने सपा नेता और मस्जिद के मुफ्ती मोहिबुल्लाह नदवी की भी निंदा की है, उन्होंने यह सबकुछ मस्जिद में होने दिया. ऐसे में सवाल यह है कि क्या डिंपल यादव ने सचमुच मस्जिद में प्रवेश के नियमों की अवहेलना की है?

मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश को लेकर क्या है नियम?

इस्लाम के अनुसार मस्जिद में महिलाओं का प्रवेश वर्जित नहीं है. हालांकि महिलाओं के लिए घर पर नमाज बेहतर माना गया है, लेकिन अगर वे जाना चाहें, तो मस्जिद में उनके प्रवेश पर रोक नहीं है. पैगंबर मोहम्मद साहब कहते हैं कि अपनी औरतों को मस्जिद जाने से न रोको. उनके इस बयान से यह स्पष्ट है कि इस्लाम में महिलाओं को मस्जिद जाने की पूरी इजाजत है, लेकिन उन्हें पर्दे में रहने की भी सलाह दी गई है, इस तरह यह बात साबित होती है कि जो महिलाएं मस्जिद जाती हैं, उन्हें हिजाब में रहना जरूरी है. साथ ही किसी तरह का कोई सुगंध भी नहीं लगाना है ताकि उनकी ओर किसी का ध्यान ना जाए.

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें

भारत में महिलाएं अमूमन घर पर पढ़ती हैं नमाज

भारत में महिलाएं अमूमन घर पर नमाज पढ़ती हैं. उनके लिए मस्जिद में नमाज नहीं होती है. हालांकि शिया मुसलमानों ने महिलाओं के लिए मस्जिद में नमाज का कमरा बनाया है, जहां वे पूरी पर्देदारी के साथ नमाज अदा करती हैं. इस्लामिक नियमों के अनुसार महिला और पुरुष साथ में नमाज अदा नहीं करते हैं. बिरसा एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय की प्रोफसर तजवार इजहार बताती हैं कि हम मस्जिद में जाकर नमाज अदा नहीं करते. हमारे देश में ज्यादातर मस्जिद पुरुषों के लिए बने हैं, जहां महिलाओं को नमाज की इजाजत नहीं है. कुछ मस्जिद ऐसे हैं जहां महिलाएं भी नमाज अदा करती हैं, जैसे दिल्ली का जामा मस्जिद, लेकिन उनके लिए नमाज का कमरा अलग है और वे हिजाब में ही मस्जिद जाती हैं. महिलाओं के मस्जिद जाने पर प्रतिबंध तो नहीं है, लेकिन पर्दे की वजह से उन्हें यह कहा जाता है कि वे घर पर ही नमाज अदा करें.

महिलाएं मस्जिद नहीं जाती हैं : मौलाना तौफीक कादरी

मौलाना तौफीक कादरी कहते हैं कि देश में महिलाओं के मस्जिद जाने पर प्रतिबंध है. उन्हें मस्जिद जाने की इजाजत नहीं है. शिया मुसलमान अपनी औरतों को मस्जिद जाने की इजाजत देते हैं, उनके मस्जिद में औरतों के लिए अलग कमरा होता है, लेकिन सुन्नी मस्जिदों में महिलाएं नहीं जाती हैं. पूरे देश में यही व्यवस्था लागू है. जहां तक बात गैर मुसलमान के प्रवेश का है, तो मस्जिद में धर्म पूछकर प्रवेश नहीं दिया जाता है, कोई भी जो पाक-साफ हो वो मस्जिद में प्रवेश कर सकता है.

ये भी पढ़ें: बिहार की राजनीति में कितना इंपॉर्टेंट हैं मुसलमान?

मुसलमानों में कैसे तय की जाती हैं जातियां, जातिगत जनगणना से अरजाल और अजलाफ को क्या हो सकता है फायदा?

भारतीय मुसलमान क्यों करते हैं अपनी लड़कियों की पाकिस्तान में शादी?

क्या इस्लाम में महिलाओं के मस्जिद जाने पर प्रतिबंध है?

नहीं. इस्लाम महिलाओं को मस्जिद जाने से नहीं रोकता है.

क्या बिना पर्दा महिलाएं मस्जिद जा सकती हैं?

नहीं. पर्दे के बिना महिलाएं मस्जिद में प्रवेश नहीं कर सकती हैं.

Previous article ‘भारत में नौकरियां नहीं और चीन में’…Donald Trump ने अमेरिकी Companies को दिया अल्टीमेटम
Next article काव नदी पर पुल नहीं बनने से किसान परेशान
Avatar Of Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel