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Home Prabhat Khabar Special अमेरिकी हमलों के जवाब में संयुक्त अरब अमीरात क्यों है ईरान के निशाने पर?

अमेरिकी हमलों के जवाब में संयुक्त अरब अमीरात क्यों है ईरान के निशाने पर?

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अमेरिकी हमलों के जवाब में संयुक्त अरब अमीरात क्यों है ईरान के निशाने पर?
ईरान का यूएई पर हमला

United Arab Emirates : ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने जो जवाबी कार्रवाई की उसमें सबसे अधिक किसी को भुगतना पड़ा है, तो वो है यूनाइटेड अरब अमीरात. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने यूएई को ही सबसे अधिक निशाना क्यों बनाया?


यूएई पर हमला ईरान की रणनीति का हिस्सा

28 फरवरी को ईरान पर हुए हमले में जब उनके शीर्ष नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत हुई, तो ईरान ने एक सोची–समझी साजिश के तहत संयुक्त अरब अमीरात पर हमलों की सीरीज शुरू कर दी. इस हमले में दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों को काफी नुकसान झेलना पड़ा. हालांकि ईरान ने खाड़ी के अन्य देशों को भी निशाना बनाया, लेकिन यूएई पर हमलों की तीव्रता अधिक थी. कई एयरपोर्ट को नुकसान हुआ जिसकी वजह से दुबई का व्यस्तम एयरपोर्ट ठप पड़ गया. यह ईरानी की रणनीति थी कि वह अमेरिका के करीबियों को सबक सिखाना चाहता था.

साथ ही वह अमेरिका को भी यह मैसेज देना चाहता है कि वह अमेरिका से डरता नहीं है. वह अबू धाबी में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के वाकिफ है. अमेरिका की धरती तक ईरान की मिसाइलें पहुंच नहीं सकती है, इसलिए वह उसके करीबियों को निशाना बना रहा है. यूएई अमेरिका का मेजर डिफेंस पार्टनर जिसकी वजह से दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और गहरा हुआ है.


आर्थिक नुकसान रणनीति का हिस्सा

दुबई और अबू धाबी अंतरराष्ट्रीय व्यापार, वित्त, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स के बड़े हब हैं. अगर इनपर हमला होगा तो वैश्विक स्तर पर आर्थिक नुकसान होगा, जिससे पूरे विश्व पर असर होगा और अमेरिका पर युद्ध रोकने का वैश्विक दबाव बनेगा. तेल की आवाजाही को रोकने के लिए ईरान ने जेबेल अली एयरपोर्ट और अन्य बंदरगाहों को भी निशाने पर लिया है, ताकि वैश्विक स्तर पर तेल की आवाजाही प्रभावित हो.

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पश्चिम देशों और इजरायल से नजदीकी की वजह से भी यूएई है निशाने पर

ईरान मिडिल ईस्ट में पश्चिमी प्रभाव का विरोधी रहा है जबकि यूएई इसको बढ़ावा देता है. उसके संबंध पश्चिमी देशों से बेहतर हैं. साथ ही उसने इजरायल के अब्राहम समझौते (Abraham Accords) पर हस्ताक्षर भी किए है, जिसका उद्देश्य मिडिल ईस्ट में शांति और सहयोग बढ़ाना है. ईरान, इजरायल का कट्टर विरोधी है, जब यूएई ने अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर किए तो ईरान ने इसे खाड़ी देशों के साथ विश्वासघात माना.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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