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Home Prabhat Khabar Special क्या मुगल बादशाह बाबर समलैंगिक था? युवा लड़के बाबरी से प्रेम का बाबरनामा में है जिक्र…

क्या मुगल बादशाह बाबर समलैंगिक था? युवा लड़के बाबरी से प्रेम का बाबरनामा में है जिक्र…

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क्या मुगल बादशाह बाबर समलैंगिक था? युवा लड़के बाबरी से प्रेम का बाबरनामा में है जिक्र…
मुगल बादशाह बाबर और बाबरी, एआई इमेज

Mughal Emperor Babur : मुगल बादशाह बाबर ने अपने जीवन का अधिकांश समय युद्ध में बिताया. वह अपने परिवार से दूर रहा और साम्राज्य विस्तार में जुटा रहा. भारत पर आक्रमण भी उसने इसी नीयत से किया था, लेकिन इसी तलवारबाज बाबर को एक युवा 16-17 के लड़के बाबरी से इश्क था. बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा में स्पष्ट तौर पर बाबरी के प्रति अपने आकर्षण को व्यक्त किया है. पांच पत्नियों के होते हुए भी बाबरी के प्रति बाबर के आकर्षण को किस तरह देखा जाए, क्या वह एक समलैंगिक था?

योद्धा के साथ-साथ शायर भी था बाबर

भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखने वाले बाबर के जीवन पर अगर नजर डालें, तो हम पाएंगे कि बाबर सिर्फ एक योद्ध नहीं था. उसके दिल में कई अन्य तरह की ख्वाहिशें भी थीं. वह कविताएं लिखता था और प्राकृतिक सुंदरता का प्रेमी था. उसे बागों की हरियाली से बहुत प्रेम था. ब्रिटिश एनेट सुजाना बेवरिज ने उसकी आत्मकथा बाबरनामा का अनुवाद The Babur-nama in English (Memoirs of Babur) 1921 में किया. जिसके अनुसार बाबर ने अपनी आत्मकथा में लिखा है-मुझे सुंदर चेहरे और अच्छी शायरी बहुत प्रिय हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि बाबर के दिल में कोमलता भी थी. एनेट ने बाबरनामा का अंग्रेजी में अनुवाद करते वक्त बाबर के व्यक्तित्व पर गहन टिप्पणियां भी की हैं, जो यह बताती हैं कि बाबर की शख्सीयत कई पक्ष थे.

बाबर की थी 5 पत्नियां, जिनके बारे में बाबरनामा में काफी कम लिखा गया

Mughal King Babur
कविताओं का शौकीन था बाबर

बाबर ने अपनी आत्मकथा तो लिखी, लेकिन उसने अपनी बीवियों का जिक्र उस आत्मकथा में काफी सीमित तौर पर किया. एनेट सुजाना बेवरिज ने अनुवाद में बताया है कि महम बेगम बाबर की प्रमुख पत्नी थी, जिसने उसके पुत्र हुमायूं को जन्म दिया था. आयशा सुल्तान बेगम बाबर की पहली पत्नी थी, जिससे बाबर का निकाह काफी कम उम्र में हुआ था. इन दोनों के अलावा बाबर की तीन और पत्नियां थीं, जिनका जिक्र बाबरनामा में है, जिनके नाम मसीह बेगम, दिलदार बेगम और जैनब बेगम था. जब बाबर की पहली शादी हुई थी, तो वह अपनी पत्नी से काफी कम मिलता-जुलता था. उसने लिखा है कि वह संकोचवश आयशा से नहीं मिलते थे, लेकिन अपनी मां के आदेश पर वह सप्ताह में कभी-कभी उससे मिलने जाते थे. महम बेगम को काफी पसंद करते था, लेकिन बाबर ने अपनी पत्नियों के साथ अपने संबंधों को लेकर बाबरनामा में कुछ खास नहीं लिखा है. हां, उसने एक जगह पर यह जरूर लिखा है लड़ाकू और अड़ियल पत्नियों से अल्लाह बचाकर रखे. दरअसल बाबर अपने निजी संबंधों के बारे में खुलकर लिखना नहीं चाहता था. बाबर ने जब भारत में अपना साम्राज्य स्थापित किया, तो महम बेगम को आगरा बुलाया गया था. उसकी बाकी बीवियां काबुले

कैसी थी बाबर की दिनचर्या

बाबर की दिनचर्या के बारे में भी उसकी आत्मकथा में विस्तार से लिखा है. बाबर लिखता है कि वह सूर्योदय से पहले उठता था और फिर फज्र की नमाज के बाद वह कुरान का पाठ करता था. बाबर का शराब का सेवन करता था, क्योंकि उस दौर में इसे आम माना जाता था. यही वजह थी कि बाबर कभी-कभी सुबह में ही थोड़ी शराब पी लेता था. फिर वह अपने सेनापतियों से मिलता था और अपने राजकाज से संबंधित कार्यों को निपटाता था. युद्ध की योजनाएं बनाता. वह विद्वानों से भी बातचीत करता और शिकार पर भी जाता था. उसे बहता पानी बहुत पसंद था.रात को वह शायरी करता और साहित्य पढ़ता था. बाबर मांसाहारी था और उसे भारत का खानपान पसंद नहीं आया था.

क्या बाबर समलैंगिक (Gay) था?

बाबर ने अपनी पत्नियों के प्रति अपने प्रेम को तो आत्मकथा में वर्णित नहीं किया है,लेकिन उसने एक किशोर जिसे बाबुरी या बाबरी कहकर संबोधित किया जाता है, उसके प्रतिक अपने प्रेम को प्रदर्शित किया है. उसने लिखा है कि उसने जब बाबुरी को पहली बार देखा था, तो उसे गजब का आकर्षण महसूस हुआ था. वह उसके प्रति पागलपन की हद तक आकर्षण महसूस करता था. वह यह लिखता है कि अगर वह सामने आ जाता था, तो शर्म के बारे वह उससे नजरें नहीं मिला पाता था. मैं उससे बात नहीं कर पाता है और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के कविताएं लिखता था. एनेट सुजाना बेवरिज ने अपने अनुवाद में बाबर की मनस्थिति के बारे में बताते हुए अनुवाद किया है- “During this time I had a strange inclination, a craze, a kind of madness came over me. I used to go to the roof of the house repeatedly just to get a glimpse of Baburi. Though I made many efforts, I could not speak to him. I was so distraught and restless… I used to recite poetry expressing my feelings for him.” लेकिन एनेट ने बाबर के इस आकर्षण को समलैंगिक होने का आधार नहीं माना. कई इतिहासकार भी यह कहते हैं कि उस दौर में पुरुषों का इस तरह आकर्षण व्यक्त करना आम था, जिसे बाबर के समलैंगिक होने से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. सच्चाई तो यह है कि बाबरनामा के अतिरिक्त इतिहास की किसी भी किताब में बाबरी को लेकर विस्तार से कुछ भी नहीं लिखा गया है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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