[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Prabhat Khabar Special विवेक रामास्वामी को डोनाल्ड ट्रंप ने दी ये अहम जिम्मेदारी, एच-1बी वीजा पर उनके एजेंडे से भारतीयों को होगा नुकसान

विवेक रामास्वामी को डोनाल्ड ट्रंप ने दी ये अहम जिम्मेदारी, एच-1बी वीजा पर उनके एजेंडे से भारतीयों को होगा नुकसान

0
विवेक रामास्वामी को डोनाल्ड ट्रंप ने दी ये अहम जिम्मेदारी, एच-1बी वीजा पर उनके एजेंडे से भारतीयों को होगा नुकसान
डोनाल्ड ट्रंप के साथ विवेक रामास्वामी

Vivek Ramaswamy : अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी प्रशासन में पहले भारतवंशी विवेक रामास्वामी को जगह दी है. वे टेस्ला के मालिक एलन मस्क के साथ मिलकर डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी का नेतृत्व करेंगे. डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी ब्यूरोक्रेसी की सफाई के लिए भारतवंशी विवेक रामास्वामी पर भरोसा किया है. ट्रंप ने विवेक रामास्वामी को देशभक्त अमेरिकन बताया है और एलन मस्क को ग्रेट मस्क.

विवेक रामास्वामी को मिली ब्यूरोक्रेसी पर लगाम कसने की जिम्मेदारी

डोनाल्ड ट्रंप ने डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी को अमेरिका बचाओ आंदोलन के लिए जरूरी बताया है. उनका यह दावा है कि यह विभाग नौकरशाही की मनमानी पर लगाम कसेगा और अनावश्यक खर्चों में कटौती भी करेगा. विवेक रामास्वामी और एलन मस्क बाहर से सरकार के कामकाज पर कड़ी नजर रखेंगे. सरकारी खर्चों पर लगाम कसने और बजट प्रबंधन में भी इनकी भूमिका रहेगी.

विवेक रामास्वामी ने डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद अपना रुख स्पष्ट कर दिया है और कहा है कि वे किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतेंगे. उन्होंने कहा है कि  DOGE (डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी) जल्द ही गवर्मेंट वेस्ट, धोखाधड़ी और दुरुपयोग के उदाहरणों को सामने लाना शुरू कर देगा. अमेरिकियों ने इसी तरह के कठोर सरकारी सुधार के लिए वोट किया है और वे इस बात को जानने और इसमें सुधार करने के भागीदार बनने के हकदार भी हैं.  हम नरमी से काम नहीं करेंगे. उन्होंने बताया है कि DOGE के कामकाज में पूरी पारदर्शिता रहेगी.

केरल से है विवेक रामास्वामी का नाता

Explainer Family
विवेक रामास्वामी को डोनाल्ड ट्रंप ने दी ये अहम जिम्मेदारी, एच-1बी वीजा पर उनके एजेंडे से भारतीयों को होगा नुकसान 3

विवेक रामास्वामी के माता-पिता का संबंध केरल से हैं. विवेक के पिता वी गणपति रामास्वामी हैं, जिन्होंने कालीकट के एनआईटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और उसके बाद वे अमेरिका चले गए थे. उनकी मां का नाम गीता रामास्वामी है, जिन्होंने मैसूर मेडिकल काॅलेज से पढ़ाई की थी और अमेरिका में एक मनोचिकित्सक के तौर पर काम किया. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार रामास्वामी के पिता गणपति रामास्वामी अभी भी भारतीय नागरिक हैं, जबकि उनकी मां ने अमेरिका की नागरिकता ले ली है. 

Also Read :रूसी सरकार का ऐलान– काम से ब्रेक लीजिए और डेट पर जाइए; 2050 के बाद भारत में भी बन सकती है ये स्थिति

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें

रिटायरमेंट से पहले बुलडोजर एक्शन पर डीवाई चंद्रचूड़ ने सुनाया फैसला, ‘पत्नी, पति की संपत्ति नहीं’ के फैसले में भी थे शामिल

विवेक रामास्वामी का जन्म अमेरिका के ओहियो में हुआ है और यहीं से उनकी पढ़ाई-लिखाई भी हुई है. वे भारतीय रीति-रिवाजों से अब भी जुड़े हैं और अकसर अपने माता-पिता के साथ भारतीय पर्व-त्योहारों के अवसर पर मंदिर जाते हैं. 39 साल के विवेक रामास्वामी एक इंटरप्रेन्योर हैं, जिन्होंने हार्वर्ड और येल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी की है और उसके बाद उन्होंने एक एसेट मैनेजमेंट फर्म बनाया था. उनकी बायोटेक कंपनी रोयवेंट साइंसेज अब सात अरब डॉलर की कंपनी हो चुकी है. विवेक की शादी भी एक भारतवंशी अपूर्वा से ही हुई है, जो ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में सर्जन और प्रोफेसर हैं. उनके दो बेटे भी हैं.

विवेक रामास्वामी के एजेंडे से भारतीयों को हो सकता है नुकसान

विवेक रामास्वामी के एजेंडे में अमेरिका फर्स्ट है. यही वजह है कि उनके एजेंडे में कई ऐसी बातें हैं जिनसे भारतीयों को नुकसान हो सकता है और उनमें सबसे प्रमुख है- एच-1बी वीजा को खत्म करने का प्रोग्राम. विवेक रामास्वामी इस वीजा को खत्म करना चाहते हैं, जिसका उपयोग कर कई भारतीय अमेरिका में अच्छी नौकरी पाते हैं. इस वीजा का उपयोग अमेरिका में विदेशी कुशल कर्मचारियों को भर्ती करने के लिए कंपनियों द्वारा किया जाता है. 

विवेक के एजेंडे में यह भी शामिल है कि रूस-यूक्रेन युद्ध बंद हो, क्योंकि यह अमेरिका के हित में है. वे यह भी चाहते हैं कि बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखा जाए. उनका यह मानना है कि यह बच्चों को डिजिटल फेंटानिल देने के समान है. फेंटानिल एक दर्द निवारक दवा है, जिसका प्रयोग करने से तत्काल तो अच्छा महसूस होता है, लेकिन बाद में इंसान के मृत्यु की भी आशंका होती है. 

विवेक कई विभागों को बंद करने की कर चुके हैं सिफारिश

विवेक की राय यह है कि कई सरकारी विभागों और एजेंसियों की कोई जरूरत नहीं है, इसलिए उन्हें बंद कर देना चाहिए. विवेक की इसी सोच को देखते हुए उन्हें ट्रंप ने DOGE का नेतृत्व सौंपा है. वे यह भी चाहते हैं कि मतदान के अधिकार की आयुसीमा 25 साल कर दी जाए. 18 साल की उम्र में उन्हीं लोगों को वोट का अधिकार मिले जो अमेरिका के प्रति अपना समर्पण साबित कर चुके हों.

कौन है विवेक रामास्वामी?

अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी प्रशासन में पहले भारतवंशी विवेक रामास्वामी को जगह दी है. वे टेस्ला के मालिक एलन मस्क के साथ मिलकर डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी का नेतृत्व करेंगे.विवेक रामास्वामी एक इंटरप्रेन्योर हैं, जिन्होंने हार्वर्ड और येल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी की है और उसके बाद उन्होंने एक एसेट मैनेजमेंट फर्म बनाया था. उनकी बायोटेक कंपनी रोयवेंट साइंसेज अब सात अरब डॉलर की कंपनी हो चुकी है.

भारत के किस राज्य से है विवेक रामास्वामी का संबंध?

विवेक रामास्वामी का संबंध भारत के केरल राज्य से है.

Previous article Personality Test: बाएं हाथ से काम करने वालों के बारे में जानें दिलचस्प बातें, जानें उनका स्वभाव
Next article BGT 2024-25: “गंभीर जल्दी चिढ़ जाते हैं”, पोंटिंग ने फिर ली चुटकी 
Avatar Of Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel