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खार्ग द्वीप पर हमला करके क्या अमेरिका दुनिया को कर देगा बर्बाद?

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खार्ग द्वीप पर हमला करके क्या अमेरिका दुनिया को कर देगा बर्बाद?
खार्ग द्वीप की एआई तस्वीर

US strikes on Kharg Island : ईरान युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका ने नयी चाल चली है. वह ईरान पर दबाव बना रहा है, ताकि वह सरेंडर कर दे और उसके सामने झुक जाए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसी नीति के तहत खार्ग द्वीप के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू किया है, ताकि ईरान पर दबाव बने और उतना नुकसान भी ना हो.

खार्ग द्वीप से होता है ईरान का लगभग 90% ऑयल एक्सपोर्ट

खार्ग द्वीप ईरान का सबसे प्रमुख कच्चा तेल निर्यात टर्मिनल है. इसका अर्थ यह है कि ईरान का 90% ऑयल एक्सपोर्ट यहीं से होकर जाता है. इसी वजह से ईरान के तेल क्षेत्र में खार्ग द्वीप का बहुत महत्व है. खार्ग द्वीप के महत्व को समझते हुए युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजरायल ने इसपर हमला नहीं किया, लेकिन अब जबकि युद्ध 40वें दिन में प्रवेश कर रहा है, युद्ध को खत्म करने के लिए निर्णायक फैसले के तहत खार्ग द्वीप पर हमला किया गया है.

खार्ग द्वीप पर हमला विश्व को आर्थिक संकट की ओर लेकर जाएगा

खार्ग द्वीप के जरिए ईरान अपने देश के 90% कच्चे तेल को पूरी दुनिया के बाजारों तक पहुंचाता है. खार्ग द्वीप पर हमला होने से बड़े-बड़े तेल टैंक, पाइपलाइन नेटवर्क और लोडिंग सुविधाओं पर असर होगा. इसका सीधा प्रभाव यह होगा कि विश्व में तेल आपूर्ति पर असर होगा.कच्चे तेल की सप्लाई बंद होने से घोर संकट उत्पन्न होगा और तेल की कीमतें अप्रत्याशित तरीके से बढ़ेंगी. ईरान की अर्थव्यवस्था भी पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी और जो देश ईरान से तेल खरीदते हैं उनपर व्यापक प्रभाव होगा. रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबकि अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर हमला तो शुरू कर दिया है, लेकिन वह तेल के इंफ्रास्टक्चर पर हमला करने से बच रहा है. इसकी वजह यह है कि उसे पता है कि अगर खार्ग तबाह होता है, तो उसका असर अमेरिका पर भी दिखेगा.

पूरे विश्व पर गहरा जाएगा ऊर्जा संकट

अमेरिका ने अगर खार्ग द्वीप के इंफ्रास्टक्चर पर हमला किया, तो विश्व के बाजारों तक कच्चे तेल को पहुंचाना कठिन हो जाएगा. उसपर होर्मुज स्ट्रेट भी पहले से ही बाधित है. यह स्थिति विश्व को भयंकर ऊर्जा संकट की ओर लेकर जाएगा, क्योंकि जवाबी कार्रवाई में ईरान भी अमेरिका के तेल ठिकानों पर हमला कर सकता है. इसका प्रभाव यह होगा कि यह युद्ध एक क्षेत्र का युद्ध नहीं रहेगा और इसका फैलाव कई देशों तक हो सकता है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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