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Home Prabhat Khabar Special यूपीएससी : स्टेट लाइब्रेरी से पढ़कर झारखंड की सुदीपा दत्ता ने लाया 41वां रैंक

यूपीएससी : स्टेट लाइब्रेरी से पढ़कर झारखंड की सुदीपा दत्ता ने लाया 41वां रैंक

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यूपीएससी : स्टेट लाइब्रेरी से पढ़कर झारखंड की सुदीपा दत्ता ने लाया 41वां रैंक
सुदीपा दत्ता अपने परिवार के साथ

UPSC CSE Final Result 2025 Out : यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल परिणाम जारी कर दिया गया है. इस परीक्षा में झारखंड के दुमका की रहने वाली सुदीपा दत्ता ने 41वां रैंक हासिल किया है. यह उनका तीसरा प्रयास था. इस लिस्ट में बिहार-झारखंड के कई सफल उम्मीदवार शामिल हैं, जिसमें धनबाद से श्रुति मोदी हैं, जिन्होंने 569 रैंक हासिल किया है. साहिबगंज की रहने वाली निहारिका सिन्हा को 365वां रैंक मिला है, जबकि लातेहार के विपुल गुप्ता को 103वां रैंक हासिल हुआ है.

दुमका के स्टेट लाइब्रेरी से की पढ़ाई : सुदीपा दत्ता

प्रभात खबर के संवाददाता आनंद जायसवाल के साथ बातचीत में सुदीपा ने बताया कि यह उनका तीसरा प्रयास था, जिसमें उन्हें 41वां रैंक मिला. इससे पहले भी वे इंटरव्यू तक पहुंची थीं, लेकिन फाइनल सलेक्शन नहीं हो पाया था. सुदीपा दत्ता की स्कूलिंग बिहार के बांका जिला से हुई है. बाद में उन्होंने दुमका से ग्रेजुएशन किया. उन्होंने यूपीएससी की तैयारी भी अपने होम टाउन में रहकर ही की है. सुदीपा दत्ता ने अपने शहर के स्टेट लाइब्रेरी में जाकर पढ़ाई की और उपलब्ध संसाधनों से ही यह सफलता हासिल की है. सुदीपा दत्ता के पिता सच्चिदानंद दत्ता असिस्टेंट पोस्टमास्टर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि मां एक गृहिणी हैं. यूपीएससी में सलेक्शन से पहले सुदीपा का चयन जेपीएससी में सीडीपीओ के पद पर हुआ था.

अपने संसाधनों का उचित प्रयोग करके सफलता हासिल की जा सकती है

सुदीपा दत्ता ने यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्रों से कहा कि आपके पास जितने संसाधन हैं, उनका उचित उपयोग करें, ताकि आपको सफलता मिले. इंटरनेट एक बेहतरीन संसाधन है, जिसका उचित सदपयोग करें. हर किसी के पास संसाधन सीमित ही होते हैं, बस आपको तैयारी बेहतर करनी होती है.

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अनुज अग्निहोत्री ने किया है देश भर में टाॅप

यूपीएससी की परीक्षा में साल 2025 में 958 लोगों को सफलता हासिल हुई है. अनुज अग्निहोत्री टाॅपर हैं, दूसरे स्थान पर राजेश्वरी सुवे एम और तीसरे स्थान पर आकांक्षा धुल हैं. टाॅप 5 कैंडिडेट में इस बार दो महिलाएं शामिल हैं. चौथे स्थान पर राघव झुनझुनवाला हैं जो बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं और पांचवें स्थान पर ईशान भटनागर हैं. अनुज राजस्थान के रहने वाले हैं और मात्र 25 साल के हैं. उन्होंने जोधपुर एम्स से एमबीबीएस की पढ़ाई की है.

958 कैंडिडेट्‌स में से कितने किस वर्ग के?

2025 की यूपीएससी परीक्षा में कुल 958 कैंडिडेट्‌स ने सफलता हासिल की है. इनमें से 317 जेनरल 104 ईडब्ल्यूएस, 306 ओबीसी, 158 एससी और 73 एसटी कैटेगरी से सफल हुए हैं.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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