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Home Prabhat Khabar Special Tsunami : जलप्रलय लेकर आता है सुनामी, जानिए यह भूकंप से कैसे होता है अलग?

Tsunami : जलप्रलय लेकर आता है सुनामी, जानिए यह भूकंप से कैसे होता है अलग?

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Tsunami : जलप्रलय लेकर आता है सुनामी, जानिए यह भूकंप से कैसे होता है अलग?
जलप्रलय लेकर आता है सुनामी

Tsunami : फिलीपींस में अहले सुबह 7.6 तीव्रता का भूंकप आया है. फिलीपींस के मिंडानाओ क्षेत्र में आए इस भूकंप से लोगों में दहशत है. सुनामी का अलर्ट जारी कर दिया गया है. पिछले सप्ताह भी यहां भूकंप के झटके महसूस किए गए थे जिसमें 69 लोगों की मौत हो गई थी. हालांकि उस समय कमजोर सुनामी की आशंका व्यक्त की गई थी. अधिकारियों ने विनाशकारी सुनामी की चेतावनी जारी की है. उन्होंने कहा है कि लहरों की ऊंचाई जानलेवा हो सकती है. जुलाई महीने में रूस के सुदूर पूर्वी तट पर 8.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आने के बाद प्रशांत महासागर के पार के देशों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की गई . भूकंप से रूस के कुरील द्वीप समूह, जापान के बड़े उत्तरी द्वीप होक्काइडो और हवाई तट के तटीय क्षेत्रों में भी सुनामी की स्थिति उत्पन्न हो गई. उस वक्त भी इंडोनेशिया और फिलीपींस ने भी सुनामी की चेतावनी जारी की थी. सुनामी का प्रभाव बहुत भयंकर होता है और इसका उदाहरण मानव जाति को 2004 में मिल गया था जब इंडोनेशिया में आए भयंकर सुनामी की वजह से दो लाख से अधिक लोगों की मौत हुई थी.

क्या होता है सुनामी?

सुनामी का शाब्दिक अर्थ होता है बंदरगाह पर उठने वाली लहरें. सुनामी एक जापानी भाषा का शब्द है. सुनामी तब आता है जब समुद्र के अंदर भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट या भूस्खलन की घटना होती है. इसका परिणाम यह होता है कि समुद्र में तेज लहरें उठने लगती है. साथ ही ये लहरें बहुत तेज गति से किनारे की ओर जाती हैं, जिसकी वजह से किनारे पर बसे नगरों और लोगों को नुकसान होता है. लहरें इतनी ऊंची और तेज होती हैं कि इसके प्रभाव में आने वाले लोग अपनी जान नहीं बचा पाते हैं, साथ ही संपत्ति का भी उतना ही नुकसान होता है. सुनामी भी भूकंप की तरह एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है, जिसकी भविष्यवाणी संभव नहीं है. चूंकि सुनामी का कनेक्शन समुद्र के अंदर आने वाले भूकंप या ज्वालामुखी विस्फोट से होता है इसलिए जब ये घटनाएं हो जाती हैं, तब सुनामी की चेतावनी जारी की जाती है. वैज्ञानिक समुद्र में लगे सेंसर के जरिए पानी के दबाव में होने वाले बदलाव को देखकर सुनामी की चेतावनी जारी करते हैं. Deep ocean Assessment and Reporting of Tsunamis के जरिए पानी के दबाव की जानकारी प्राप्त की जाती है और फिर चेतावनी जारी होती है. समुद्र में लगे सेंसर जो पानी के दबाव में बदलाव से सुनामी की पहचान करते हैं. सिस्मिक सेंसर समुद्र के नीचे भूकंप का पता लगाते हैं और सैटेलाइट के जरिए लहरों की गति और ऊंचाई को मापा जाता है.

भूकंप क्या है?

पृथ्वी की सबसे ऊपर परत (क्रस्ट) में मौजूद अधिकांश दरारें अमूमन हिलती नहीं हैं, लेकिन कई बार टेक्टोनिक बल या फोर्स की वजह से दरारों के दोनों तरफ की चट्टानें धीरे-धीरे विकृत होने लती है. जब भूमिगत चट्टान अचानक टूटती है और उसकी गति तेज होती है,तो भूकंप आता है.भूमिगत चट्टानों के टूटने से भूकंपीय तरंगें उत्पन्न होती हैं, जो पृथ्वी की ऊपर परत यानी क्रस्ट को कंपा देती है. पृथ्वी तबतक कांपती है जबतक कि टूटने वाली चट्टानें हिलती रहती हैं, जब टूट के बाद चट्टानें फिर कहीं पर अटक जाती है, तो धरती का कंपन बंद हो जाता है. टेक्टोनिक बल पृथ्वी के अंदर उत्पन्न होने वाला बल है, जो पृथ्वी की ऊपर क्रस्ट को टेढ़ा करता है और उसे खंडित करता है या तोड़ता है. यह बल पृथ्वी की क्रस्टल प्लेटों की गति से उत्पन्न होता है. इसकी वजह से भूकंप, पर्वत निर्माण और ज्वालामुखी विस्फोट जैसी घटनाएं होती हैं. जब भूकंप आता है तो उसका फोकस या हाइपोसेंटर (Hypocenter) उस स्थान को कहते हैं, जहां चट्टान पहली बार टूटती है. एपिसेंटर (Epicenter) धरती का वो हिस्सा होता है, जो फोकस एरिया के ठीक ऊपर होता है.

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भूकंप और सुनामी में फर्क

भूकंप और सुनामी दोनों ही प्राकृतिक आपदाएं हैं और इनका प्रभाव व्यापक होता है. इनमें फर्क ये है कि एक धरती के नीचे उत्पन्न होता है, जबकि दूसरा समुद्र के नीचे.
जमीन के ऊपरी परत के नीचे जब चट्टानें अचानक टूटती हैं और प्लेटें खिसकती हैं, तो धरती के ऊपरी सतह पर तेज झटके महसूस किए जाते हैं, यह भूकंप है. वहीं सुनामी वह है जिसमें समुद्र के नीचे भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट या भूस्खलन होता है, जिसकी वजह से समुद्र में काफी तेज लहरें उठती हैं और किनारों की ओर तेजी से बढ़ती हैं. भूकंप और सुनामी दोनों में ही जानमाल का भारी नुकसान होता है. भूकंप को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है, जबकि सुनामी को लहरों की ऊंचाई से सैटेलाइट के जरिए मापा जाता है. सुनामी में बाढ़ या जलप्रलय जैसी स्थिति होती है जबकि भूकंप में इमारतों का गिरना, पुल टूटना, पेड़ गिरना जैसी घटनाएं होती हैं.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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