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Home Prabhat Khabar Special Tej Pratap Yadav : क्या बिहार चुनाव में किंग मेकर बनेंगे तेजप्रताप यादव? महुआ से जीते, तो तेजस्वी के राजनीतिक कद पर कितना होगा असर

Tej Pratap Yadav : क्या बिहार चुनाव में किंग मेकर बनेंगे तेजप्रताप यादव? महुआ से जीते, तो तेजस्वी के राजनीतिक कद पर कितना होगा असर

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Tej Pratap Yadav : क्या बिहार चुनाव में किंग मेकर बनेंगे तेजप्रताप यादव? महुआ से  जीते, तो तेजस्वी के राजनीतिक कद पर कितना होगा असर
तेजप्रताप यादव

Tej Pratap Yadav : बिहार चुनाव का परिणाम 14 नवंबर को घोषित होगा, लेकिन उससे पहले ही सरकार गठबंधन को लेकर संकेत मिलने शुरू हो गए हैं. सरकार गठन की संभावनाओं के बीच एक सवाल लोगों के मन में तेजी से उठ रहा है कि अगर तेज प्रताप यादव चुनाव जीत जाते हैं, तो बिहार और राजद की राजनीति पर इसका कितना असर होगा? तेज प्रताप यादव, लालू यादव और राबड़ी देवी के बड़े बेटे हैं, लेकिन लालू यादव ने अपना उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव को चुना है. तेजप्रताप यादव को लालू यादव ने पार्टी से इसलिए निकाल दिया है क्योंकि उनका आचरण सामाजिक मूल्यों के खिलाफ है. तेजस्वी यादव और तेज प्रताप खुलकर एक दूसरे का विरोध तो नहीं करते हैं, लेकिन उनके विरोध लगातार उजागर होते रहे हैं.

तेजप्रताप की जीत से पार्टी पर क्या होगा असर?

तेजप्रताप यादव 2025 के विधानसभा में महुआ विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं. लालू यादव द्वारा पार्टी से निकाले जाने के बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाई है, जिसे नाम दिया है-जनशक्ति जनता दल. तेजप्रताप यादव महुआ विधानसभा सीट से 2015 में भी विधायक रह चुके हैं, हालांकि 2020 के चुनाव में उन्हें महुआ नहीं,हसनपुर विधानसभा सीट से टिकट दिया गया था. 2025 में वो राजद के उम्मीदवार नहीं हैं और महुआ विधानसभा सीट पर उनका मुकाबला राजद के आधिकारिक उम्मीदवार मुकेश रौशन से है. तेजप्रताप और मुकेश रौशन के बीच कांटे की टक्कर है, जीत किसकी होगी यह तो 14 नवंबर को ही पता चलेगा, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर तेजप्रताप यादव चुनाव जीत गए तो क्या होगा?

Tej-Pratap-Yadav
चुनावी सभा में तेजप्रताप यादव

प्रभात खबर के पाॅलिटिकल एडिटर मिथिलेश कुमार बताते हैं कि तेजप्रताप की जीत से कोई बहुत बड़ा प्रभाव बिहार की राजनीति या राजद पर पड़ेगा ऐसा नहीं है, लेकिन इस जीत के प्रभाव तो दिखेंगे और जिसका असर राजद और परिवार दोनों पर पड़ सकता है. तेजप्रताप की जीत से तेजस्वी के लिए स्थितियां असहज करने वाली हो सकती हैं. खासकर तब जब दोनों विधानसभा में एक साथ होंगे. तेजस्वी के लिए बड़े भाई के खिलाफ बोलना उन्हें असमंजस में डालने वाला होगा, जबकि तेजप्रताप यादव राजद के खिलाफ खुलकर बोल सकते हैं. विधानसभा में तेजस्वी के अतिरिक्त कोई और तो तेजप्रताप के खिलाफ बोलेंगे नहीं, तो यह स्थिति पार्टी के विधायकों के लिए ऊहापोह वाली हो सकती है. दूसरी बात यह भी है कि चुनाव जीतने पर तेज प्रताप यादव की स्थिति मजबूत होगी और अपने पिता की उत्तराधिकार पर वे अपना दावा फिर से कर सकते हैं. यह स्थिति तेजस्वी के लिए परेशान करने वाली हो सकती है, क्योंकि इससे उनके राजनीतिक कद पर असर पड़ेगा.

तेजप्रताप को लेकर परिवार का कैसा है रुख?

तेजप्रताप यादव को लालू यादव ने पार्टी से भले ही निकाल दिया हो, लेकिन तेजप्रताप यादव चुनाव जीत जाएं यह उनकी भी हार्दिक इच्छा है. तेजप्रताप यादव उनके बड़े बेटे हैं और प्रिय भी हैं. राबड़ी देवी के तो तेजप्रताप हमेशा ही प्रिय रहे हैं और तेजप्रताप भी उनसे उतना ही स्नेह करते हैं. छह नवंबर को मतदान से पहले राबड़ी देवी और रोहिणी आचार्य ने तेजप्रताप को जीत के लिए आशीर्वाद दिया. हालांकि मतदान से पहले वे इस विषय पर बात करने से बच रही थीं, लेकिन ठीक मतदान से पहले मां और बहन ने खुलकर तेजप्रताप के समर्थन में बोला है. इससे यह साफ है कि तेजप्रताप का परिवार यह चाहता है कि वे चुनाव जीत जाएं. वहीं तेजस्वी यादव की अगर बात करें, तो उनकी स्थिति इस मामले में थोड़ी अलग है. वे महुआ चुनाव प्रचार के लिए गए थे और अपने भाई के खिलाफ प्रचार किया. तेजस्वी यादव ने राजद के अधिकारिक उम्मीदवार मुकेश रौशन के लिए वोट मांगा, लिहाजा यह माना जा सकता है कि तेजप्रताप की जीत तो तेजस्वी नहीं चाहते हैं.

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परिवार के साथ तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव

क्या किंग मेकर बनेंगे तेजप्रताप?

तेजप्रताप यादव अपनी जीत और उसके बाद की रणनीति पर क्या सोचते हैं, यह जानने के लिए उनसे बात करने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन नंबर आउट ऑफ रेंज आ रहा था. ऐसा संभव है कि वे चुनाव में व्यस्त हों, लेकिन लगभग तीन महीने पहले उन्होंने प्रभात खबर के पाॅडकाॅस्ट में यह बात कही थी कि वे 2025 के चुनाव में किंगमेकर की भूमिका में रहना चाहते हैं. उन्होंने यह कहा था कि वे संभावनाओं को तलाशने के लिए किसी पार्टी के पास नहीं जा रहे हैं. इस संबंध में मिथिलेश कुमार बताते हैं कि अगर तेजप्रताप यादव चुनाव जीत जाते हैं और एनडीए की सीटें कुछ कम रहती हैं, तो संभावना है कि तेजप्रताप यादव को साथ लाने की कोशिश की जाए. तेजप्रताप यादव को वाई श्रेणी की सुरक्षा देना, इसी तरह की संभावित रणनीतियों की तरफ इशारा करता है. तेजप्रताप यादव ने अपने सभी विकल्पों को अभी खुला रखा है. पिछले दिनों बीजेपी नेता रविकिशन के साथ एयरपोर्ट पर गर्मजोशी के साथ उनकी मुलाकात इसी ओर इशारा करती है. चुनाव परिणामों की समीक्षा और संभावित रणनीतियों के लिए धर्मेंद्र प्रधान जैसे बड़े नेता पटना में हैं, हालांकि अभी तक तेजप्रताप के साथ मुलाकात की कोई सार्वजनिक सूचना सामने नहीं आई है.

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तेजप्रताप की पत्नी कौन हैं?

तेजप्रताप की पत्नी का नाम ऐश्वर्या राय है.

तेजप्रताप यादव की शिक्षा कहां से हुई है?

तेजप्रताप की शिक्षा पटना से हुई है.

तेजप्रताप की उम्र कितनी है?

तेजप्रताप अभी 37 साल के हैं. उनका जन्म 16 अप्रैल 1988 को हुआ है.

तेजप्रताप को राजद से क्यों निकाला गया?

तेजप्रताप यादव ने एक सोशल मीडिया पोस्ट किया था, जिसमें वे एक महिला के साथ थे. उनके इसी पोस्ट को सामाजिक नियमों के खिलाफ बताकर उनके पिता लालू यादव ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया.

तेजप्रताप की पार्टी का क्या नाम है?

तेजप्रताप यादव की पार्टी का नाम जनशक्ति जनता दल है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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