[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Prabhat Khabar Special हिंदू धर्म के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं शंकराचार्य, कैसे होता है चयन और क्यों पड़ी थी जरूरत?

हिंदू धर्म के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं शंकराचार्य, कैसे होता है चयन और क्यों पड़ी थी जरूरत?

0
हिंदू धर्म के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं शंकराचार्य, कैसे होता है चयन और क्यों पड़ी थी जरूरत?
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और योगी आदित्यनाथ

 Shankaracharya in India : प्रयागराज के माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और यूपी सरकार के बीच ठन गई. वजह, स्नान से जुड़ा था. विवाद इतना बढ़ा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आमने–सामने आ गए. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी से इस्तीफा मांगा, तो सीएम योगी ने भी किसी का नाम लिए बिना यह कहा कि सनातन धर्म को कालनेमियों से बचाने की जरूरत है.

सीएम योगी के इस बयान से अच्छा–खाना बवाल मच गया है और विपक्ष इसे शंकराचार्य और सनातन धर्म का अपमान बता रहा है. यहां सवाल यह है कि जिस शंकराचार्य पर सनातन की रक्षा का भार था, आखिर वही शंकराचार्य इसके खिलाफ कैसे हो गए?   यहां यह भी समझने की जरूरत है कि आखिर शंकराचार्य हैं कौन और इनका चयन कैसे होता है?

आदि शंकराचार्य ने की थी शंकराचार्य बनाने की शुरुआत

Adi-Shankaracharya
आदि शंकराचार्य अपने शिष्यों के साथ

आदि शंकराचार्य, महान दार्शनिक और हिंदू धर्म के ज्ञाता थे. वे जिस काल में हुए उस वक्त देश में हिंदू धर्म या सनातन धर्म खतरे में था. बौद्ध और जैन धर्म का प्रभाव बहुत बढ़ गया था और सनातन धर्म बिलकुल बिखर गया था. उस वक्त आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म को एकसूत्र में पिरोने और इसकी रक्षा के लिए देश की चारों दिशाओं में मठ स्थापित किया, जिसे पीठ कहा जाता है और वहां अपने शिष्यों को संत के रूप में स्थापित किया, जो शंकराचार्य कहलाए. इन संतों के ऊपर सनातन धर्म के आधार वेदों की रक्षा का भार था. शंकराचार्य आजीवन संन्यासी रहते हैं.

पीठस्थानसंबंधित वेदशंकराचार्य की जिम्मेदारी
श्रृंगेरी पीठकर्नाटकयजुर्वेदवेदांत, संन्यास परंपरा
पुरी गोवर्धन पीठओडिशाऋग्वेदमंत्र परंपरा, यज्ञ दर्शन
द्वारिका शारदा पीठगुजरातसामवेदउपासना, भक्ति, गायन
ज्योतिर्मठबद्रीनाथअथर्ववेददर्शन, तंत्र, सामाजिक धर्म

गुरु–शिष्य परंपरा के तहत होती है शंकराचार्य की नियुक्ति

आदि शंकराचार्य ने अपने चार शिष्यों पद्मपाद,सुरेश्वराचार्य,हस्तामलक और तोटकाचार्य का पट्टाभिषेक कर उन्हें शंकराचार्य बनाया था. यह पट्टाभिषेक कोई बड़ा आयोजन या समारोह नहीं था, बल्कि यह सिर्फ और सिर्फ एक गुरु द्वारा अपने शिष्य को प्रदान की गई एक जिम्मेदारी थी. इस जिम्मेदारी के तहत चारों पीठों के शंकराचार्यों पर सनातन धर्म की रक्षा और चारों वेदों में से एक वेद की रक्षा और उसकी व्याख्या का प्रभार था. जब शंकराचार्य का पट्टाभिषेक होता है, जो उसे अपने गुरु से यह सहमति मिलती है कि वह उनके बाद सनातन की रक्षा का प्रभार संभालेगा. इसी वजह से शंकराचार्य के पद का सनातन धर्म में बहुत आदर रहा है.

कौन है कालनेमि, जिसके आधुनिक स्वरूपों से सीएम योगी ने किया सावधान?

कालनेमि रामायण के काल का एक मायावी राक्षस था. वह रावण का बहुत खास था. जब राम–रावण युद्ध के दौरान रावण के बेटे मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे, तो उनके इलाज के लिए संजीवनी बूटी की जरूरत थी और रामभक्त हनुमान उसे लेने गए थे. हिमालय के द्रोणगिरि पर्वत से जब हनुमान संजीवनी बूटी लाने गए और रावण को इसकी सूचना मिली, तो उसने अपने मायावी राक्षस कालनेमि को वहां भेजा, ताकि वह उन्हें रोक सके. कालनेमि ने अपनी माया से इसका प्रयास भी किया, लेकिन हनुमान उसे पहचान गए और उसकी हत्या कर दी. कालनेमि को धूर्त और पाखंडी माना जाता है. 

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर और विशेष आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर क्या है विवाद?

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को उनके गुरु ने अपने जीवन काल में अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया था. उनकी मृत्यु के बाद अविमुक्तेश्वरानंद को उत्तराधिकारी घोषित किया गया और पट्टाभिषेक की विधि पूरी हुई. उनकी नियुक्ति से संत समाज के कुछ लोगों में असंतोष था, जिसकी वजह से उनके उत्तराधिकार का मामला कोर्ट तक पहुंचा था.

शंकराचार्य कहां-कहां होते हैं?

देश में कुल चार स्थानों पर शंकराचार्य होते हैं. श्रृंगेरी पीठ, पुरी गोवर्धन पीठ, द्वारिका पीठ और ज्योतिर्मठ.

चारों पीठों के पहले शंकराचार्य कौन-कौन थे?

पद्मपाद,सुरेश्वराचार्य,हस्तामलक और तोटकाचार्य.

ये भी पढ़ें : Viral Video 19 Minute : सावधान! बिना जांचे ना करें AI कंटेंट को शेयर–कमेंट ; मानहानि के मामले में भरना पड़ेगा जुर्माना या होगी जेल

Mughal Harem Stories : क्यों दिल्ली की सड़कों पर बिछी थीं लाशें, इज्जत बचाने के लिए कुएं में कूद रही थीं औरतें?

Previous article अधर में पाकिस्तान की भागीदारी, स्टैंडबाय पर बांग्लादेश, PCB आउट हुआ तो BCB की एंट्री पक्की! 
Next article Anandapur Fire: 33 घंटे बाद सामने आया गोदाम मालिक गंगाधर, कोल्ड ड्रिंक्स को ठहराया हादसे का दोषी
Avatar Of Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel