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Home Prabhat Khabar Special ट्रंप और नेतन्याहू के बीच पड़ी दरार, क्या होगा ईरान युद्ध का परिणाम?

ट्रंप और नेतन्याहू के बीच पड़ी दरार, क्या होगा ईरान युद्ध का परिणाम?

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ट्रंप और नेतन्याहू के बीच पड़ी दरार, क्या होगा ईरान युद्ध का परिणाम?
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच दरार

Trump Netanyahu rift : साउथ पारस गैस फील्ड पर इजरायल के हमले के बाद मिडिल ईस्ट में स्थिति बिलकुल बदल गई है, क्योंकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर स्थित दुनिया के सबसे बड़े LNG भंडार रास लाफान पर बड़ा हमला किया. इस हमले से दुनिया में हड़कंप मच गया और पहली बार अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद नजर आए. ईरान के गैस फील्ड पर हमले के बाद ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि इजरायल, ईरान के तेल भंडार साउथ पारस गैस फील्ड पर हमला करने वाला है. ट्रंप ने इजरायल से यह कहा कि वे संयम बरतें और ऊर्जा भंडारों पर हमले ना करें.


ट्रंप और नेतन्याहू के बीच मतभेद क्यों उभरें?

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के तीसरे हफ्ते में दोनों देशों के रुख में बदलाव आया है, इसमें कोई शक नहीं है, जिसकी वजह से दरार साफ नजर आ रही है. न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार प्रेसिडेंट ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने ईरान के सबसे बड़े गैस फील्ड्स में से एक पर बमबारी के बारे में जानकारी नहीं थी और उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से ऐसा ना करने को कहा है. वही इजरायली सेना के उच्च अधिकारियों ने यह कहा है कि अमेरिका को इस हमले के बारे में बता दिया गया था. यह बयान दोनों देशों की अलग–अलग रणनीति के बारे में बताया है. हालांकि दोनों नेता यह कह रहे हैं कि उनके बीच कोई मतभेद नहीं है और वे इस मसले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. बाद में बेंजामिन नेतन्याहू ने यह कहा कि ईरान पर हमला इजरायल की अपनी पहल थी.

अमेरिका और इजरायल की अलग–अलग रणनीति आई सामने

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच जो दरार दिख रही है उसकी बड़ी वजह दोनों देशों की रणनीति और उनका लक्ष्य है. दरअसल अमेरिका यह चाहता है कि वह ईरान को डिसआर्म कर दे, जबकि इजरायल उसे स्टेट कोलैप्स की स्थिति में लाना चाहता है. किसी व्यक्ति का देश को डिसआर्म करने का मतलब है उसे शक्तिहीन बना देना, जबकि स्टेट कोलैप्स का अर्थ है उस देश को खत्म कर देना. रणनीति का यही अंतर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच दूरी को बढ़ा रहा है.

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ट्रंप और नेतन्याहू के मतभेद के क्या हो सकते हैं परिणाम?

ईरान पर हमला दोनों नेताओं का संयुक्त अभियान है, अगर दोनों के बीच मतभेद हुए तो संयुक्त सैन्य अभियान कमजोर पड़ सकता है और ईरान के खिलाफ जो रणनीति बनाई गई है, वो कमजोर पड़ सकती है. इसके साथ ही मिडिल ईस्ट में तनाव भी बढ़ सकता है जिसकी वजह से पूरे विश्व को ऊर्जा संकट झेलना पड़ सकता है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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